जानवरों की सिरिंज मंगवाने वाले कर्मचारी पर कौन मेहरबान? जांच के बीच निलंबित कर्मी को मिली नई जिम्मेदारी
नोएडा जिला अस्पताल में जानवरों की सिरिंज मंगवाने के मामले में निलंबित स्टाफ कर्मी योगेश कुमार को जांच के बीच गुपचुप तरीके से दोबारा डाटा ऑपरेटर का काम ...और पढ़ें

जिलाधिकारी मेधा रूपम ने आरोपित योगेश कुमार से सीएमएस ऑफिस के बराबर में डाटा एंट्री ऑपरेटिंग वाले कमरा नंबर-28 ए में काम कराने का संज्ञान लिया है।
HighLights
निलंबित कर्मी योगेश कुमार को मिली डाटा ऑपरेटर की जिम्मेदारी।
जानवरों की 1.20 लाख सिरिंज मंगवाने का है यह मामला।
जिलाधिकारी ने अस्पताल प्रबंधन की मिलीभगत की जांच के दिए आदेश।
जागरण संवाददाता, नोएडा। जिला अस्पताल में जानवरों की 1.20 लाख सिरिंज मंगवाने के प्रकरण में प्रबंधन की मिलीभगत का एक और मामला सामने आया है। गंभीर लापरवाही बरतने पर निलंबित हुए स्टाफ कर्मी को गुप्त तरीके से डाटा ऑपरेटर की जिम्मेदारी दे दी गई है। जिलाधिकारी ने आरोपित से सीएमएस ऑफिस के बराबर में डाटा एंट्री ऑपरेटिंग वाले कमरा नंबर-28 ए काम कराने का संज्ञान लिया है।
जांच में हुआ गलत दवा मंगाने का खुलासा
जिला प्रशासन की चल रही जांच में किसी को भी क्लीन चिट नहीं मिलने के बावजूद आउटसोर्स कर्मी से डाटा आपरेटर का काम कराने पर डीएम ने विस्तृत जांच के निर्देश दिए हैं। मिलीभगत के इस खेल में प्रशासन जल्द ही जिला अस्पताल प्रबंधन को नोटिस जारी कर लिखित स्पष्टीकरण मांग सकता है। दिसंबर 2025 में जिला अस्पताल में जानवरों की सिरिंज मंगवाने के लिए जैम पोर्टल से दो बार ऑर्डर हुए थे। 60-60 हजार वैटरनरी सिरिंज के आर्डर अस्पताल में पहुंचे तो जांच में गड़बड़ी पकड़ी गई। तुरंत आला अफसरों ने ऑर्डर को वापस करा दिया।
तीन सदस्यीय कमेटी ने की जांच
अस्पताल प्रबंधन ने तीन सदस्यों की कमेटी बनाकर इंटरनल जांच कराई तो लापरवाही की परतें खुलती गईं। कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर डाटा एंट्री डाटा ऑपरेटर योगेश कुमार ने निलंबित कर नशा मुक्ति केंद्र से अटैच कर दिया। दैनिक जागरण ने अस्पताल की जांच रिपोर्ट पर सवाल खड़े किए तो जिलाधिकारी ने प्रशासनिक स्तर पर समिति का गठन कर जांच शुरू करा दी।
मूल तैनाती नशा मुक्ति केंद्र में
वह जांच अभी तक चल रही है, जिसमें तत्कालीन कार्यवाहक सीएमएस समेत अन्य चिकित्सक व स्टोर प्रबंधकों के बयान दर्ज हो चुके हैं, लेकिन किसी भी आरोपित को क्लीन चिट नहीं मिली है। मगर हैरानी की बात है कि जिला प्रशासन की जांच चलने के बीच ही गुप्त तरीके से योगेश कुमार को फिर से डाटा एंट्री ऑपरेटर की जिम्मेदारी दे दी है। उन्हें सीएमएस आफिस के बराबर वाले 28ए नंबर कमरे में बैठाया गया है जबकि उनकी मूल तैनाती नशा मुक्ति केंद्र में है।
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"जानवरों की सिरिंज मंगवाने के प्रकरण में जांच चल रही है। किसी सदस्य को क्लीन चिट नहीं मिली है। पता चला है कि निलंबित आउटसोर्स कर्मी योगेश को डाटा एंट्री ऑपरेटर की जिम्मेदारी दी गई है। इसकी जांच कराकर संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।"
-मेधा रूपम, जिलाधिकारी, गौतमबुद्ध नगर।
"आउटसोर्स कर्मी योगेश कुमार नशा मुक्ति केंद्र में तैनात है। उससे डाटा एंट्री का काम ले लिया जाता है जबकि अन्य लोग भी डाटा आपरेटिंग के लिए मौजूद हैं। उसको नौकरी से हटाया नहीं गया था।"
-डाॅ. अशोक कुमार झा-सीएमएस, जिला अस्पताल।
"मैं नशा मुक्ति केंद्र में कार्यरत हूं। 28ए नंबर कमरे में पेपर प्रिंटआउट के लिए जाता हूं। नशा मुक्ति केंद्र के अलावा दूसरी कोई जिम्मेदारी नहीं मिली है। मैंने प्रशासन की टीम को भी बयान दर्ज कराए हैं।"
-योगेश कुमार- आउटसोर्स एजेंसी।
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