नोएडा के 2 लाख फ्लैट खरीदार फिर फंसे, 26000 करोड़ बकाया पर 30 बिल्डरों को नया नोटिस; कब होगा निरस्तीकरण?
नोएडा प्राधिकरण बिल्डरों से 26,000 करोड़ रुपये का बकाया वसूलने में विफल रहा है, जिससे हजारों फ्लैट खरीदारों की रजिस्ट्री अटकी हुई है। अमिताभ कांत की स ...और पढ़ें

प्राधिकरण केवल नोटिस जारी कर रहा है, जबकि उसके पास आवंटन निरस्तीकरण का अधिकार है।
HighLights
नोएडा प्राधिकरण 26,000 करोड़ रुपये का बकाया वसूलने में विफल।
अमिताभ कांत सिफारिशों के बावजूद 30 बिल्डरों ने नहीं किया भुगतान।
हजारों फ्लैट खरीदारों की रजिस्ट्री अटकी, प्राधिकरण की नई योजना।
कुंदन तिवारी, नोएडा। नोएडा प्राधिकरण को बिल्डरों से 26 हजार करोड़ रुपये का बकाया वसूलने में विफलता का सामना करना पड़ा है। अमिताभ कांत की सिफारिशों के बावजूद 30 बिल्डरों ने अपनी बकाया राशि का भुगतान नहीं किया है, जिसके कारण फ्लैट खरीदारों के पक्ष में रजिस्ट्री भी नहीं कराई जा सकी है। इस स्थिति के मद्देनजर प्राधिकरण ने इन 30 बिल्डरों से बकाया वसूलने और उन्हें जुर्माना राशि का नोटिस फिर से जारी किया है। यह प्रक्रिया एक बार फिर से प्राधिकरण की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाती है, क्योंकि प्राधिकरण केवल नोटिस जारी कर रहा है, जबकि उसके पास आवंटन निरस्तीकरण का अधिकार है।
जीरो पीरियड का लाभ
प्राधिकरण की अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी वंदना त्रिपाठी ने बताया कि 21 दिसंबर 2023 को अमिताभ कांत की सिफारिशों का शासनादेश लागू किया गया था। इसका मुख्य उद्देश्य बिल्डरों और फ्लैट खरीदारों के बीच चल रहे विवाद को समाप्त करना था, ताकि खरीदारों को उनके आशियाने का मालिकाना हक मिल सके।
इस प्रक्रिया के तहत 57 बिल्डरों को राहत देने के लिए नोएडा प्राधिकरण ने मार्जिनल कास्ट आफ फंड्स बेस्ड लेंडिंग रेट (एमसीएलआर) पर बकाया की गणना की। बिल्डरों को चार किस्तों में बकाया जमा करने की सुविधा दी गई थी। यदि वे तय राशि का 25 प्रतिशत जमा करते, तो उन्हें वर्ष 2013 में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के आदेश के तहत जीरो पीरियड का लाभ भी मिलता।
फ्लैट खरीदारों के अधिकारों पर प्रभावित
इस योजना के तहत 27 बिल्डरों ने 25 प्रतिशत राशि जमा की और कोरोना काल का लाभ उठाया, जबकि 13 बिल्डरों ने एनजीटी का लाभ लिया। हालांकि, इस योजना के तहत 57 बिल्डरों से कुल 5500 करोड़ रुपये प्राधिकरण को मिलने थे, जिससे 21 हजार से अधिक फ्लैट खरीदारों की रजिस्ट्री कराई जानी थी। लेकिन 12 बिल्डरों ने प्राधिकरण के नोटिस का जवाब नहीं दिया, और 14 बिल्डरों ने आंशिक भुगतान किया।
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पिछले दो वर्षों में प्राधिकरण को केवल 874 करोड़ रुपये प्राप्त हुए हैं, जिसके कारण केवल 4364 फ्लैट खरीदारों की रजिस्ट्री हो सकी है। इस प्रकार प्राधिकरण की बकाया वसूली की प्रक्रिया और बिल्डरों के प्रति सख्ती की कमी ने फ्लैट खरीदारों के अधिकारों को प्रभावित किया है।
बुकिंग का रुपया दूसरी परियोजनाओं में ट्रांसफर
नोएडा-ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने कुल 4,31,064 यूनिट्स की पहचान की है, जिनमें से 2,12,752 यूनिट्स के लिए ओसी जारी की गई है, जबकि 2,18,312 यूनिट्स को ओसी अभी तक नहीं मिली है। इनका निर्माण कब तक होगा, इसकी जानकारी प्राधिकरण के पास नहीं है, क्योंकि बिल्डरों ने इनकी बुकिंग का रुपया दूसरी परियोजनाओं में ट्रांसफर कर दिया है।
अब प्राधिकरण ने दो लाख फ्लैट खरीदारों की रजिस्ट्री के लिए फिर से बिल्डरों को छूट देने का प्रस्ताव तैयार किया है। इसमें वन टाइम सेटेलमेंट (ओटीएस) स्कीम लाने की योजना है, जिसके माध्यम से बिल्डर एक बार में बकाया राशि का भुगतान करेंगे। इस प्रस्ताव पर कैबिनेट की बैठक में चर्चा होगी।
नोएडा में बिल्डर परियोजना की स्थिति
| सूचकांक | स्थिति/संख्या |
|---|---|
| बिल्डर परियोजनाएं (कुल) | 116 |
| अधूरी परियोजनाएं | 47 |
| डिफाल्टर बिल्डर | 57 |
| आशियाना नहीं मिला | 2 लाख फ्लैट खरीदार |
| मालिकाना हक नहीं मिला | 91 हजार फ्लैट खरीदार |
| बिल्डरों पर कुल बकाया | ₹26,000 करोड़ |
| सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन मामले | 14 |
| एनसीएलटी में विचाराधीन मामले | 16 |
| सुप्रीम कोर्ट व एनसीएलटी में विचाराधीन परियोजनाओं पर कुल बकाया | ₹3,000 करोड़ |
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