ग्रेटर नोएडा से अब मथुरा और आगरा तक दौड़ेगी हाइड्रोजन बसें, यीडा ने बनाई लंबे रूट की नई योजना
यीडा ग्रेटर नोएडा से आगरा तक हाइड्रोजन बसों के संचालन की योजना बना रहा है। जुलाई में नोएडा-एयरपोर्ट रूट पर ...और पढ़ें

ग्रेटर नोएडा से मथुरा आगरा जाएगी हाइड्रोजन बस। फोटो: आर्काइव
HighLights
ग्रेटर नोएडा से आगरा तक हाइड्रोजन बसों का संचालन होगा
जुलाई में छोटे रूट पर सवारियां कम मिलने से भरपाई हुई
लंबे रूट पर बसों से राजस्व व दक्षता बढ़ाने की उम्मीद
जागरण संवाददाता, ग्रेटर नोएडा। नोएडा और ग्रेटर नोएडा के छोटे रूट पर यात्रियों की संख्या कम मिलने के बाद हाइड्रोजन बसों के संचालन की योजना में बदलाव किया जा रहा है।
अब ग्रेटर नोएडा से मथुरा और आगरा तक लंबे रूट पर इन बसों को चलाने की तैयारी है। इसके लिए यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा) शासन से वार्ता कर रहा है।
जिले में ईवी बसों के साथ तीन हाइड्रोजन बसों का संचालन शुरू किया गया था। इन बसों और इनके लिए आवश्यक ईंधन की व्यवस्था एनटीपीसी की ओर से की गई थी। बसों को नोएडा, ग्रेटर नोएडा और नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के बीच चलाया गया।
एक महीने का ट्रायल, बसें चलीं सिर्फ 18 दिन
तीनों हाइड्रोजन बसों का ट्रायल एक जुलाई से 31 जुलाई तक निर्धारित था, लेकिन पर्याप्त सवारियां नहीं मिलने के कारण ट्रायल पूरे एक महीने तक नहीं चल सका। बसों का संचालन कुल 18 दिन तक ही हुआ।
ट्रायल के दौरान तीनों बसों ने कुल 17,444 किलोमीटर की दूरी तय की। इस दौरान संचालन से 1.66 लाख रुपये की कमाई हुई, जबकि प्राधिकरण को 8.32 लाख रुपये की भरपाई करनी पड़ी।
तीनों बसों का संचालन भी अलग-अलग दिनों तक हुआ-
- एक बस 18 दिन चली
- दूसरी बस 15 दिन चली
- तीसरी बस केवल चार दिन ही संचालित हो सकी
अब लंबे रूट पर बढ़ेगा राजस्व?
दिसंबर से नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर अंतरराष्ट्रीय विमान सेवा शुरू होनी है। इसे देखते हुए प्राधिकरण अब हाइड्रोजन बसों को लंबे रूट पर चलाने की योजना बना रहा है, ताकि यात्रियों की संख्या बढ़े और संचालन में होने वाले नुकसान से बचा जा सके।
योजना के तहत इन बसों को ग्रेटर नोएडा से मथुरा और आगरा रूट पर संचालित करने पर विचार किया जा रहा है।
एक बार ईंधन भरने पर 600 किमी चलेगी बस
हाइड्रोजन बस की सबसे बड़ी खासियत इसकी लंबी दूरी तय करने की क्षमता है। एक बार ईंधन भरने के बाद बस करीब 600 किलोमीटर तक चल सकती है।
यीडा का मानना है कि लंबे रूट पर संचालन से बसों की दक्षता बढ़ेगी और यात्रियों से मिलने वाला राजस्व भी अधिक होगा। साथ ही यात्रियों को स्वच्छ ईंधन से चलने वाली सार्वजनिक परिवहन सेवा का विकल्प मिलेगा।
यीडा के एसीईओ राजेश कुमार सिंह के अनुसार, ट्रायल के दौरान सामने आई तकनीकी खामियों को दूर करने के बाद हाइड्रोजन बसों को लंबे रूट पर चलाया जाएगा।
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