नोएडा में चार दिन से सुलग रही थी आग की चिंगारी, पुलिस और प्रशासन भांप नहीं सके; हिंसक प्रदर्शन की Inside Story
नोएडा में वेतन वृद्धि की मांग को लेकर हुई औद्योगिक हिंसा पुलिस-प्रशासन की विफलता दर्शाती है। चार दिन से सुलग रही चिंगारी को अधिकारी भांप नहीं पाए। श्र ...और पढ़ें
-1776099831473_m.webp)
नोएडा में हिंसक प्रदर्शन की इनसाइड स्टोरी।
HighLights
पुलिस-प्रशासन चार दिन से सुलग रही चिंगारी भांप न सका।
श्रमिक नेताओं की गिरफ्तारी ने आंदोलन को नेतृत्वविहीन कर दिया।
न्यू लेबर कोड लागू न होना भी हिंसा का एक कारण।
कुंदन तिवारी, नोएडा। नाेएडा में उद्योगों में हुई हिंसक वारदात ने एक बार फिर शहर की छवि को भारी नुकसान पहुंचाया है। ऐसा नहीं है कि वेतन बढ़ोतरी की मांग को लेकर (श्रमिक) कामगारों का उपद्रव अचानक हो गया। इसकी चिंगारी चार दिन से सुलग रही थी। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी इसको भाप नहीं सकें। पुलिस ने कामगारों के नेताओं को हाउस अरेस्ट कर यह मान लिया कि अब यह मामला दब जाएगा।
श्रमिक नेताओं के हाउस अरेस्ट के निर्णय ने इस आंदोलन में आग में घी डालने की काम कर दिया। कामगारों का आंदोलन नेतृत्वविहीन हो गया। हाउस अरेस्ट उनके नेता मोबाइल से उनके पर आंदोलन के लिए संदेश भेजते रहे। नेतृत्वहीन श्रमिक उनकी उद्योगों को अपना निशाना बनाते रहे, जिनसे लाखों लोगों के घर चल रहे हैं। इस मामले में पुलिस प्रशासन की न केवल नाकामी सामने आई, बल्कि सूचना तंत्र की भी पोल खुल गई।
सोमवार को बड़े आंदोलन की चेतावनी दी थी
शनिवार को कामगारों ने वेतन वृद्धि की मांग पूरी न होने पर सोमवार को बड़े आंदोलन की चेतावनी दी थी। इतना ही नहीं कामगारों ने चेतावनी दी थी कि सोमवार को वह अपने साथ पत्थर लाएंगे। पुलिस और प्रशासन ने इसको हल्के में लिया। सोमवार को पुलिस और प्रशासन कही भी अर्लट मोड पर नजर नहीं आया। सुबह के समय सड़कों पर पुलिस नहीं थी। आगजनी की घटना के बाद पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी सड़कों पर उतरें।
बता दें कि शुक्रवार औद्योगिक सेक्टर फेज दो (सेक्टर-80 से 88 के) स्थित औद्योगिक इकाइयों के कामगारों आक्रोशित हुए, डीएससी रोड को करीब सात घंटे तक जाम रखकर जमकर उपद्रव किया। किसी तरह से मामले को शांत किया गया। उसके बाद उपाश्रमायुक्त ने इस प्रकरण में बैठक की, लेकिन मामला हल नहीं हो सका।
खबरें और भी
सात बिंदुओं पर उद्यमियों से काम करने के लिए कहा गया
लिहाजा पुलिस, प्रशासन, प्राधिकरण को तमाम औद्योगिक इकाइयों के प्रतिनिधि व औद्योगिक संगठन नोएडा एंटरप्रिनियोर्स एसोसिएशन (एनईए) पदाधिकारियों के साथ रविवार को विस्तार से बैठक करनी पड़ी, जिसमें सात बिंदुओं पर उद्यमियों से काम करने के लिए कहा गया। इस पर उद्यमियों ने रजामंदी दे दी, लेकिन इससे पहले सोमवार को सुबह औद्योगिक इकाइयों का संचालन होता, कामगारों ने उपद्रव शुरू कर दिया।
आरोप है कि इन बैठकों में कामगारों के मांग पर बातचीत करने के लिए एक भी नेता शामिल नहीं किया गया। सभी कामगारों के नेता हाउस अरेस्ट रहे। अब सवाल यह उठता है कि जब कामगारों से बातचीत कर उन्हें समझाने वाले नेता ही मौके पर नहीं रहे, तो उन तक सूचना कैसे भेजी जाए, इसका ध्यान नहीं रखा गया। समय पर सूचना नहीं मिलने का खामियाजा सोमवार को सड़क पर उपद्रव के रूप में देखा गया।
न्यू लेबर कोड के लिए नियमावली पहले ही तैयार कर ली
बता दें कि उत्तर प्रदेश सरकार ने न्यू लेबर कोड के लिए नियमावली पहले ही तैयार कर ली है और इसे चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा रहा है लेकिन नोएडा का वर्तमान संकट यही दर्शाता है कि कानून का 'नोटिफाई' होना और 'इन्फोर्स' होना दो अलग बातें हैं। कामगारों की मांगें और काम कराने के ढर्रे को लेकर लगाए जा रहे आरोप यह स्पष्ट करता है कि नोएडा में न्यू लेबर कोड पूरी सख्ती से लागू नहीं है।
न्यू लेबर कोड के जमीन पर पूरी तरह से लागू होने की प्रक्रिया अभी ट्रांजिशन के दौर में है। न्यूनतम वेतन को लेकर भी राज्य और केंद्र के बीच के 'फ्लोर वेज' के आंकड़ों पर स्पष्टता की कमी है। फैक्ट्रियां अभी भी पुराने वेतन ढांचे पर चल रही हैं। ठेकेदारों की मनमानी को उद्यमियों का समर्थन जारी है।
दबाव सिर्फ उद्यमियों पर बनाया गया कि वह सात बिंदुओं पर कामगारों की मांग को पूरा कर दे। इसे मान भी लिया गया, लेकिन कामगारों पर सूचना पहुंचाने में लेटलतीफी हुई। जिस प्रकार से इकाइयों में तोड़फोड़ की गई, यह निंदनीय घटना है। -पीयूष कुमार द्विवेदी, चेयरमैन, उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार मंडल
कभी नहीं देखा गया कि अपनी मांगों को मनवाने का इस प्रकार से प्रयास किया गया हो। औद्योगिक सेक्टरों की चूलें हिला कर रख दी है। उद्यमी भयभीत है। -विपिन कुमार मल्हन, अध्यक्ष, नोएडा एंटरप्रिनियोर्स एसोसिएशन
यह भी पढ़ें- 'नोएडा हिंसा में पाकिस्तान कनेक्शन की भी हो रही जांच', योगी के मंत्री अनिल राजभर का बड़ा बयान