नोएडा के रोहिल्लापुर में किसानों के 5 प्रतिशत विकसित भूखंड लगाने का विरोध, क्या है पूरा मामला?
नोएडा के रोहिल्लापुर गांव में प्राधिकरण द्वारा किसानों के लिए पांच प्रतिशत विकसित भूखंड आबादी की जमीन पर बनाए जाने का विरोध हो रहा है। ...और पढ़ें
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सांकेतिक तस्वीर। सौजन्य- ai generated
जागरण संवाददाता, नोएडा। रोहिल्लापुर गांव में किसानों के पांच प्रतिशत विकसित भूखंड लगाने के मामले में प्राधिकरण के विरोध में नोएडा विलेज रेजिडेंट्स एसोसिएशन खड़ा हो गया है। ग्रामीणों का कहना है कि ये जमीन किसानों की आबादी की है। इसे प्राधिकरण ने समझौते के आधार पर वर्ष 2016-17 में छोड़ा है।
यह जमीन करीब 8500 वर्ग मीटर है। अब इसी जमीन के 1917.03 वर्ग मीटर हिस्से में किसानों के पांच प्रतिशत के आठ भूखंड लगा दिए गए हैं। यह किसानों के साथ अन्याय है। यह विवाद तब सामने आया जब शनिवार को प्राधिकरण के शीर्ष अधिकारियों ने अधिसूचित और कब्जा प्राप्त जमीन पर निर्माण कराने पर संज्ञान लिया।
आरोप था कि वर्क सर्किल नौ के अवर अभियंता निशांत त्यागी अपने दो सुपरवाइजर के सहयोग से रोहिल्लापुर गांव के खसरा संख्या 4 की 1917.03 वर्ग मीटर जमीन पर निर्माण कराने में जुटे है। इसकी शिकायत की गई। इसके बाद वर्क सर्किल नौ के वरिष्ठ प्रबंधक अनिल मोराल ने शिकायत पर निर्माण रुकवाने का आदेश भी दिया, लेकिन अवर अभियंता ने वरिष्ठ प्रबंधक को गुमराह कर कहा कि उन्होंने निर्माण कार्य रुकवा दिया है।
शनिवार को जब प्राधिकरण के शीर्ष अधिकारियों को सीधे वाटसएप के माध्यम से अवर अभियंता और उनके सहयोगी सुपरवाइजर की फोटो और वीडियो भेजी गई, जिसमें उनकी मौजूदगी में निर्माण होता दिख रहा है। इसके बाद प्राधिकरण के शीर्ष अधिकारियों ने महाप्रबंधक सिविल एके अरोड़ा को निर्माण कार्य रुकवाने का आदेश दिया।
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अवर अभियंता ने भूलेख विभाग अधिकारियों के साथ मौके पर पहुंचकर कार्य को रुकवा दिया। भूलेख राजस्व अधिकारी ओएसडी क्रांति शेखर सिंह ने बताया कि अवैध निर्माण को ध्वस्त करने के लिए महाप्रबंधक सिविल एके अरोड़ा से निर्देश दिया गया है।
संबंधित अवर अभियंता व सुपरवाइजर के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। इस संबंध में नोएडा विलेज रेजिडेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष रंजन तोमर ने बताया कि प्राधिकरण आबादी की जमीन छोड़ने के बाद कैसे उस पर पांच प्रतिशत का विकसित भूखंड लगा सकता है।
यह पूरी तरह से समझौते का उल्लंघन है, क्योंकि अभी इस प्रकरण का मामला कोर्ट के विचाराधीन है। नोएडा प्राधिकरण के साथ वर्ष 2006 में समझौता हुआ था। समझौते में प्राधिकरण को बाकी जमीन दे दी थी। बाकी जमीन आबादी में छोड़ी गई। इसके लिखित दस्तावेज भी उन्होंने मीडिया को दिखाए।