Noida PG Fire: सीढ़ियों की तरफ भागे ऋषभ और स्नेहा... पर आग की लपटों ने चपेट में लिया; दोनों की दर्दनाक मौत
Noida PG Fire: नोएडा के ममूरा गांव में एक चार मंजिला पीजी बिल्डिंग में आग लगने से ऋषभ और स्नेहा की मौत हो गई। संकरी सीढ़ियों और भूतल पर वाहनों में आग ...और पढ़ें
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नोएडा सेक्टर-66 मामूरा गांव में पीजी में आग में फंसे लोगों को बचाने के लिए सीढ़ी लगाने वाली गौरी (दाएं से दूसरी), आसमा, रवि शाक्य और सुबेद आलम (बाएं से)। जागरण
HighLights
नोएडा के ममूरा गांव में पीजी बिल्डिंग में आग लगी।
ऋषभ और स्नेहा की आग में फंसकर मौत हो गई।
संकरी सीढ़ियों के कारण बड़ा हादसा टल गया।
धर्मेंद्र चंदेल, नोएडा। Noida PG Fire: नोएडा में सेक्टर-66 का ममूरा गांव। चार मंजिला बिल्डिंग। 65 कमरे और रहने वाले करीब 265 लोग। संकरी दो सीढियां। गनीमत रही कि आग की घटना पूर्वान्ह 11 बजे के बाद हुई।
आग रात में अथवा सुबह लगती तो अधिक जनहानि हो सकती थी। चार मंजिल से नीचे उतरने के लिए भले ही दो सीढ़ियां थी, लेकिन वह इनती संकीर्ण थी कि उनमें एक साथ दो लोग नीचे नहीं उतर सकते थे। मृतक स्नेहा व रिषभ पहली मंजिल पर रहते थे। आग लगते ही वह नीचे की तरफ दौड़े। भूतल पर बने कॉरिडोर में सभी किराएदारों के वाहन खड़े होते थे। उस कारण वहां से पैदल चलकर निकलना मुश्किल होता था।
आग की लपटों ने चपेट में लिया
स्नेहा व रिषभ युवा होने के कारण सबसे पहले नीचे उतरे, लेकिन भूतल पर खड़े दुपहिया 17 वाहनों में आग लगी थी। सामने आग देख वह वापस दौड़े, लेकिन पीछे अन्य लोग थे, इस कारण तेजी से सीढ़ियों पर वापस ऊपर की तरफ नहीं चढ़ सकें। आग की लपटों ने उन्हें चपेटे में ले लिया।

प्रत्यदर्शियों ने बताया कि दोनों ने बचने के लिए खूब हाथ पैर मारे। चीखे-चिल्लाए, बचने के लिए मदद की गुहार लगाए। बचा लो, बचा लो कहते हुए एकाएक उनकी आवाज गुम हो गई।
पीजी में फैक्ट्री वर्कर, गार्ड, डिलीवरी बाय और छात्र किराए पर रहते हैं। शाम को छह बजे से रात 10 बजे तक यह बिल्डिंग पूरी भर जाती है। बच्चे, बूढ़े, महिलाएं भी हैं।

लोगों ने सुनी धमाके की आवाज
बुधवार को पूर्वान्ह अचानक धमाके की आवाज आई। शार्ट सर्किट। फिर तेजी से लपटें आने लगी। धुआं सीढ़ियों से ऊपर-नीचे फैलने लगा। उस वक्त बिल्डिंग में सिर्फ 65 लोग थे। बाकी सब काम पर गए थे। घटना रात अथवा सुबह होती, जब सब नहा-धोकर, खाना बनाकर निकलने की तैयारी में होते।
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10 मिनट में सब निकल गए
65 कमरों के गेट एक साथ खुलते। ढाई सौ से अधिक लोग दौड़कर सीढ़ियों से नीचे उतरते तो क्या हालात बनते, इसका अंदाजा सहज लगाया जा सकता है। सोचो 4 मंजिल, दो संकरी सीढ़ी, 265 लोग। सबसे आगे बच्चे, पीछे महिलाएं, धुएं में कोई किसी को नहीं देख पाता। लोग एक दूसरे को धक्का देते हुए आगे बढ़ते। ऐसा होता तो लाशों का ढेर लग जाता। पूर्वान्ह में सिर्फ 65 लोग थे। इसलिए 10 मिनट में सब निकल गए।