नोएडा के सरकारी स्कूलों में पढ़ाई के साथ हुनर की पाठशाला, छात्र सीख रहे AI से लेकर वेब डेवलपिंग तक
सरकारी स्कूलों में 'लर्निंग बाय डूइंग' योजना के तहत छात्रों को कौशल और स्वरोजगार का प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जिसमें वे प्लास्टिक वेस्ट से उत्पाद बनान ...और पढ़ें

सरकारी स्कूलों में 'लर्निंग बाय डूइंग' योजना के तहत छात्रों को कौशल और स्वरोजगार का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इमेज एआई
चेतना राठौर, नोएडा। छात्रों को पढ़ाई के साथ कौशल और स्वरोजगार के जुड़ी गतिविधियों का प्रशिक्षण सरकारी स्कूलों में दिया जा रहा है। लर्निंग बाय डूइंग योजना के तहत स्कूलों में रोजाना कक्षाओं के बाद बच्चों को स्कूल के और घर के प्लास्टिक ओर रबर वेस्ट से उत्पाद बनाना सिखाया जा रहा है। जिससे छात्र वेस्ट वस्तुओं से उपयोगी वस्तु तैयार स्कूल परिसर को सजा रहे हैं। इसके साथ ही छात्र कंप्यूटर स्किल्स में भी अव्वल बन रहे हैं।
ग्राफिक्स,वेब डवलपिंग, जावा स्क्रीप्ट,एआइ साफ्टवेयर डवलप करना सीख रहे हैं। इसके साथ ही अपने कौशल से छात्र नवाचार कर कई समस्याओं का समाधान भी तलाश रहे हैं।
बता दें इस योजना के अंतर्गत छात्रों को विभिन्न मिनी प्रोजेक्ट दिए जा रहे हैं, जिनसे वे नई चीजें सीखने के साथ भविष्य में रोजगार के अवसरों के लिए भी तैयार हो रहे हैं। इसका उद्देश्य छात्रों को केवल किताबों तक सीमित रखना नहीं, बल्कि उन्हें स्वयं कार्य करके सीखने के लिए प्रेरित करना है।
सेक्टर 12 राजकीय इंटर कालेज के शिक्षक निखिल ने बताया कि छात्रों को साफ्टवेयर और हार्डवेयर दोनों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। 10 वी से 12 वी कक्षा तक के छात्रों को कंप्यूटर स्किल्स दी जा रही है। एआइ,वेब डवलपिंग, डाटा एनालिटिक, आइटी,एआइ साथ वेब साइट डिजाइनिंग का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
छात्रों ने गणित पढ़ना किया आसान
राजकीय इंटर कालेज के 12 वीं कक्षा के छात्रों ने मैथ्स फार आल वेब साइट तैयार की है। इस वेबसाइट से 6 से 12 वी कक्षा तक के छात्रों के लिए गणित विषय को आसान बना दिया है। बच्चों को एक ही लागिन पर सभी नोट्स आडियो और वीडियो के रूप में प्रोवाइड हो जाएंगे। एक क्लिक पर छात्र घर बैठे पढ़ सकेंगे।
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गेझा स्थित उच्च प्राथमिक विद्यालय की प्रधानाचार्या नीलम ने बताया कि विद्यार्थियों को विभिन्न गतिविधियां कराकर उनके कौशल को निखारा जा रहा है। छात्रों से पेपर बैग बनवाना, गमले तैयार कराना, खाद्य सामग्री बनाना, पौधारोपण, रसोई में विभिन्न प्रकार के व्यंजन तैयार करना, टैरिस गार्डन विकसित करना तथा घर में बेकार पड़ी वस्तुओं से उपयोगी सामान, जैसे कपड़ों का स्टैंड बनाना जैसी गतिविधियां कराई जा रही हैं। इन कार्यों के माध्यम से छात्रों में रचनात्मकता, आत्मनिर्भरता और उद्यमिता की भावना विकसित हो रही है।
गिझौड़ कंपोजिट स्कूल की प्रधानाचार्या शशि बाला ने बताया कि विद्यार्थियों को कंप्यूटर स्किल्स में निपुण बनाया जा रहा है जिससे वे भविष्य में अपना करियर स्थापित कर सकें। साथ ही कम उम्र में अपने रूझान को भी समझ सकें। कंप्यूटर लैब में छात्रों को एआई के साथ साफ्टवेयर डवलपिंग का भी कार्य सिखाया जा रहा है। साथ ही वेस्ट से बेस्ट बनाकर कई बेकार वस्तुओं काे उपयोगी आकार दे रहे हैं।