नोएडा में बारिश से खुली विकास की पोल, जलभराव के बाद CEO का एक्शन- JE और सुपरवाइजर बर्खास्त
नोएडा के हाईटेक शहर के बीच बसे 81 गांवों में मानसून की पहली बारिश ने जलभराव की गंभीर समस्या पैदा कर दी है, जिससे विकास के अधूरे वादों की पोल खुल गई है ...और पढ़ें

नोएडा के हाईटेक शहर के बीच बसे 81 गांवों में मानसून की पहली बारिश ने जलभराव की गंभीर समस्या पैदा कर दी है। इमेज एआई
धर्मेंद्र चंदेल, नोएडा। नोएडा नाम सुनते ही आंखों के सामने मेट्रो, सेक्टर-18 व 144 का भीड़ वाला बाजार, फिल्म सिटी और ऊंची-ऊंची आईटी टावर आ जाते हैं। रात को यहां की सड़कें रोशनी से नहाती हैं। इन्हीं टावरों की छाया में 81 गांव भी सांस ले रहे हैं। 40 साल पहले जब नक्शे पर लाल लाइन खिंची थी, तब अफसर गांव-गांव गए थे।
वादा एक ही था। जमीन दे दो, हम आपको शहर जैसा गांव बना देंगे। पक्की सड़क, नाली, स्कूल, अस्पताल, जलनिकासी के उचित प्रबंध, पार्क, हरित पट्टी सब मिलेगा। शहरीकरण की उम्मीद में किसानों ने जमीन दे दी।
बदले में मुआवजा, एक भूखंड और एक सपना मिला। गांवों के चारों तरफ बिल्डिंग खड़ी है पर विकास का सपना पूरा नहीं हुआ है। मानसून शुरू होते ही गांवों की वही कहानी लौट आती है। हालात बद से बदतर हो जाते हैं। यह कहानी हर वर्ष की है।
मंगलवार को तेज वर्ष हुई तो बरौला, सालारपुर, आगाहपुर, हरौला, सदरपुर, ककराला, भंगेल सोरखा, बहलोलपुर, सरफाबाद आदि अधिकांश गांवों की गलियों में घुटने-घुटने पानी जमा हो गया। किसी भी गांव में जलनिकासी के लिए नालियां नहीं हैं।
वर्षा थमने के बाद बुधवार को प्राधिकरण ने व्यापक स्तर पर प्रयास कर पानी को निकालने की कोशिश की। फिलहाल गांवों में राहत मिल गई है। हालांकि, कई जगहों पर रास्तों में अभी भी पानी जमा रहा।
बच्चे स्कूल नहीं जा सकें, क्योंकि रास्ते में कीचड़ और सीवर लाइन में गिरने का डर। फिर से वर्षा हुई तो मंगलवार जैसे हालात बन जाएंगे। गांव में हैंडपंपों से पीला पानी आ रहा है। लोग दूषित पानी पीने को मजबूर है।
सीईओ ने कार्रवाई तो की, लेकिन बरकरार
मंगलवार की वर्षा से बरौला व सालारपुर आदि गांवों में जलभराव हुआ तो नोएडा प्राधिकरण सीईओ कृष्णा करूणेश ने एक जेई, एक सुपरवाइजर की सेवा समाप्त कर दी। सिविल व जल सीवर विभाग के प्रबंधक को प्रतिकूल प्रविष्टि दी है, लेकिन इससे गांव में जलभराव की समस्या तो हल नहीं हुई। पानी निकासी के प्रयास हुए पर समस्या का स्थाई समाधान नहीं हुआ।
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घर के सामने गंदा पानी भरा हुआ है। नालियां टूटी होने के कारण पानी नहीं निकल पा रहा है। गांवों की स्थिति बहुत खराब है।
-अशोक भाटी, सालारपुर
जमीन लेते समय गांवों के विकास का वादा किया गया था। विकास सिर्फ नक्शे पर है। हकीकत जमीन पर दे सकते हैं। गांवाें में कीचड़ के अलाव कुछ नहीं है।
-बीसी प्रधान, बरौला
गांवों में नालों की सफाई कराई गई है। बुधवार को बरौला और सालारपुर गांव से पानी निकाल दिया गया। आगे जलभराव न हो, इसके लिए पुख्ता इंतजाम किए जा रहे हैं।
-इंद्र प्रकाश सिंह, ओएसडी, नोएडा प्राधिकरण