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    नोएडा में सुपरटेक-अजनारा समूह का बड़ा फर्जीवाड़ा आया सामने, बिना पंजीकरण बेचे हजारों फ्लैट

    Updated: Thu, 26 Mar 2026 04:41 AM (IST)

    नोएडा में सुपरटेक-अजनारा समूह ने बिना पंजीकरण और प्राधिकरण की अनुमति के हजारों निवेशकों को ठगा। सेक्टर-118 में IVR प्राइम डेवलपर्स को आवंटित जमीन पर प ...और पढ़ें

    सुपरटेक-अजनारा समूह का बड़ा फर्जीवाड़ा आया सामने।

    सुपरटेक-अजनारा समूह का बड़ा फर्जीवाड़ा आया सामने।

    HighLights

    1. सुपरटेक-अजनारा ने बिना पंजीकरण हजारों निवेशकों को ठगा।

    2. IVR प्राइम की जमीन पर अवैध रूप से परियोजनाएं बनाईं।

    3. सीबीआई और ईडी धोखाधड़ी की गहन जांच कर रहे हैं।

    कुंदन तिवारी, नोएडा। सुपरटेक-अजनारा समूह का बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। इनके बिल्डरों ने सेक्टर-118 में सुपरटेक रोमानो-अजनारा एम्ब्रेसिया परियोजना को बिना पंजीकृत कराए हजारों निवेशकों को आशियाने का सपना दिखाकर अरबों रुपये निवेश करवा दिया।

    अब खेल सामने आया है कि जिस जमीन पर परियोजनाओं को तैयार किया जा रहा था, असल में वहां प्राधिकरण ने 2013 में आइवीआर प्राइम डेवलपर्स (आवाडी) प्राइवेट लिमिटेड को 1 लाख 42 हजार 967 वर्गमीटर जमीन आवंटित की थी। प्राधिकरण का जमीन पर 600 करोड़ रुपये से अधिक बकाया है। यही नहीं आवंटी ने जमीन सबलीज पर कब दी थी, प्राधिकरण मेें इसके दस्तावेज नहीं हैं।

    सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद जांच तेज की

    यह बात प्राधिकरण के तीन अधिकारियों द्वारा सीबीआई को दर्ज कराए बयान में सामने आई, जिसके बाद खुद सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर सबवेंशन स्कीम के तहत खरीदारों के साथ धोखाधड़ी की जांच तेज कर दी है।

    बुधवार को सीबीआई ने कार्यालय में प्राधिकरण के भूलेख, ग्रुप हाउसिंग, नियोजन विभाग के अधिकारियों से पांच घंटे पूछताछ की, जिसमें नोएडा प्राधिकरण से जुड़ी मूल फाइलें, आवंटन पत्र, अनुबंध पत्र और तत्कालीन अधिकारियों के हस्ताक्षर से जुड़े दस्तावेज, फाइल नोटिंग, निर्णय लेने की प्रक्रिया पर अहम सवाल पूछे गए।

    इसमें जमीन आवंटन की शर्तें और आइवीआर को किसी अन्य डेवलपर को प्रोजेक्ट देने की अनुमति देने समेत बिल्डर का पक्ष लिया गया। पता चला है कि जमीन आवंटन की प्रक्रिया में अनियमितता, प्रोजेक्ट के डेवलपमेंट एग्रीमेंट में नियमों का उल्लंघन व वित्तीय लेन-देन से जुड़े पहलुओं में खामियां मिली हैं।

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    अन्य कंपनियों से मिलीभगत की भी जांच

    सीबीआई बिल्डरों की अन्य कंपनियों से मिलीभगत की भी जांच कर रही है। सीबीआई को मनी लांड्रिंग के केस में ईडी द्वारा सुपरटेक के मालिक आरके अरोड़ा को गिरफ्तार होने का भी पता चला है। सुपरटेक की परियोजनाओं में सामने आया कि आवंटित भूखंड पर रोमानो परियोजना के तहत 2335 फ्लैट बनने थे।

    इस परियोजना को 2017 में यूपी रेरा में फाइंड माइ प्रापर्टी प्राइवेट लिमिटेड, इनवेस्टर क्लीनिक इन्फ्राटेक प्राइवेट लिमिटेड ने पंजीकृत कराया, जिसे 2020 में पूरा किया जाना था, लेकिन इसके भी दस्तावेज प्राधिकरण के पास नहीं थे।

    चुपके से दोनों बिल्डरों को सबलीज कर दी गई

    सूत्र बताते हैं कि सीबीआई को यह पता चला है कि 2023 में जब अजनारा परियोजना के निवेशक एनसीएलटी गए थे, तब प्राधिकरण के शीर्ष अधिकारियों से परियोजना की जानकारी मांगने पर चौकानें वाले तथ्य सामने आए कि 2013 में प्राधिकरण ने आइवीआर को जो जमीन आवंटित की थी, उसके प्राधिकरण को बिना कोई दस्तावेज दिए चुपके से दोनों बिल्डरों को सबलीज कर दी गई।

    मामले में प्राधिकरण ने भी सुपरटेक और अजनारा समूह की परियोजनाओं से संबंधित आवंटी आइवीआर प्रबंधन ने कई बार जानकारी मांगी, लेकिन कोई जवाब मिला और न ही बकाया रकम जमा की गई। नोएडा के अधिकारियों ने जांच एजेंसी को स्पष्ट कहा है कि भूखंड प्राधिकरण की मर्जी के बिना किसी को सब लीज भी नहीं की जा सकता है।

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