ग्रेटर नोएडा में 16 साल से अटकी बुलंद एलिवेट्स परियोजना, आशियाने की उम्मीद में भटक रहे खरीदार
ग्रेटर नोएडा वेस्ट में बुलंद एलिवेट्स परियोजना के फ्लैट खरीदार 16 साल से अपने आशियाने का इंतजार कर रहे हैं। 2010 में शुरू हुई यह परियोजना विभिन्न कारण ...और पढ़ें
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ग्रेटर नोएडा वेस्ट में निर्माणाधीन बिल्डर परियोजना।
HighLights
बुलंद एलिवेट्स परियोजना 16 साल से अधूरी पड़ी है।
एनसीएलटी की मंजूरी के दो साल बाद भी काम ठप।
खरीदार अपने आशियाने के लिए लगातार भटक रहे हैं।
जागरण संवाददाता, ग्रेटर नोएडा। ग्रेटर नोएडा वेस्ट में निर्माणाधीन परियोजनाओं के बाहर फ्लैट खरीदार लगातार आशियाने की उम्मीद में बिल्डर, विकास एजेंसियों के साथ यूपी रेरा का दरवाजा खटखटा रहे हैं। धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं, लेकिन उसके बाद भी उनके आशियाने का सपना पूरा होता नजर नहीं आ रहा है।
ताजा मामला ग्रेटर नोएडा वेस्ट की बुलंद एलिवेट्स बिल्डर परियोजना का है। फ्लैट खरीदारों का कहना है कि बिल्डर परियोजना 2010 में लॉन्च हुई। 16 साल पहले उन्होंने फ्लैट खरीदा। परियोजना में आठ सौ फ्लैट के साथ सैकड़ों की संख्या में कामर्शियल दुकानों का निर्माण होना है। यूपी रेरा में लंबी लड़ाई लड़ी, लेकिन बिल्डर के खिलाफ मामला एनसीएलटी में पहुंच गया।
क्यों फंसी रही परियोजना?
2024 में एनसीएलटी ने भी बिल्डर परियोजना को पूरी करने के दिशा निर्देश दे दिए। उम्मीद थी कि अब आशियाने की आस पूरी होगी, लेकिन दो साल बाद भी परियोजना ढांचागत स्थिति में खड़ी है। फ्लैट खरीदार चंद्रभूषण ने बताया कि परियोजना पहले किसानों की और से जमीन अधिग्रहण के खिलाफ दायर मुकदमे के चलते फंसी रही।
फ्लैट खरीदारों से बढ़ा हुआ मुआवजा वसूलकर परियोजना किसी तरह शुरू हुई तो उसके बाद नोट बंदी उसके बाद कोरोना काल के चलते परियोजना का निर्माण कार्य ठंडे बसते में चला गया। प्रमोर्टरों के बीच आपसी झगड़े के चलते मामला एनसीएलटी में चला गया।
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वहां दो साल की सुनवाई के बाद एनसीएलटी ने बिल्डर को प्रोजेक्ट से बाहर कर एक अन्य कंस्ट्रक्शन कंपनी एसआरए को परियोजना पूरी करने की जिम्मेदारी दे दी, लेकिन परियोजना अभी भी ढांचागत स्थिति में है। फ्लैट खरीदारों का कहना है कि केंद्र व राज्य में तीन बार सरकार बदल चुकी हैं, लेकिन जीवन भर की कमाई बिल्डर के हाथ सौंपने के बाद भी फ्लैट खरीदारों के हाथ खाली है।