पिंजरा खुलते ही भरी ऐसी दहाड़, पलक झपकते ही दुधवा के घने जंगलों में ओझल हुआ 'हजारा का राजा'
हजारा क्षेत्र के चंद्रनगर गांव से पकड़े गए एक बाघ को लखीमपुर खीरी के दुधवा टाइगर रिजर्व में छोड़ दिया गया है। यह बाघ आबादी में आतंक फैला रहा था और मवे ...और पढ़ें
HighLights
चंदनगर गांव के पास वन विभाग की टीम ने बाघ का किया था रेस्क्यू
पिंजरे से निकलते ही बाघ ने जंगल में लगाई तेजी से दौड़
संवाद सहयोगी, पूरनपुर (पीलीभीत)। बाघ की बादशाहत जंगल में अलग ही अंदाज में नजर में आती है, लेकिन जब बाघ जंगल से बाहर आबादी में आता है तो मानव वन्यजीव संघर्ष की आशंका बढ़ जाती है। हजारा क्षेत्र के लोगों के लिए आतंक का पर्याय बने बाघ का रेस्क्यू करके पिंजड़े में कैद किया गया था।
गांव चंद्रनगर के पास रेस्क्यू किए बाघ को लखीमपुर खीरी के दुधवा टाइगर रिजर्व के जंगल में परीक्षण के बाद छोड़ दिया गया। बाघ पिंजरा से आजाद होते ही जंगल के अंदर तेजी के साथ दौड़ा। कुछ ही देर में टीम आंखों से ओझल हो गया। हजारा क्षेत्र के चंद्रनगर गांव के पास मेन सड़क से सौ मीटर दूर बाघ ने चार दिन पहले गोवंशीय पशु का शिकार किया था।
तब से उसकी लोकेशन लगातार शव के पास ही मिल रही थी। कभी गन्ना के खेत में तो कभी शव के पास राहगीरों को अक्सर बैठा हुआ बाघ दिख रहा था। राहगीर भी उसे देखने के रूक रहे थे। बाघ को लेकर लोगों में दहशत का माहौल बना हुआ था। ग्रामीण डर के कारण खेतों में नहीं जा पा रहे थे। भय और दहशत के चलते मवेशियों के लिए चारा लाने से भी कतरा रहे थे।
वन विभाग की टीम लगातार बाघ की निगरानी कर रही थी। संपूर्णानगर सामाजिकी वानिकी प्रभाग के क्षेत्रीय वनाधिकारी ललित कुमार ने कर्मचारियों और बफर जोन के डा. दया सिंह के साथ गुरुवार शाम के समय बाघ को रेस्क्यू कर लिया था। जरा में कैद कर उसे रेंज कार्यालय ले जाया गया। वहां स्वास्थ्य का परीक्षण हुआ।
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बाघ की उम्र करीब दो वर्ष और वजन 125 किलोग्राम के करीब है। बाघ पूरी तरह से स्वस्थ है। गुरुवार को दोपहर में बाघ को दुधवा टाइगर रिजर्व के जंगल ले जाया गया। वहां उसे पिंजरा से आजाद कर दिया गया। गजब की फुर्ती के साथ दौड़ लगाते हुए बाघ जंगल के अंदर चला गया। रेंजर ने बताया कि रेस्क्यू किए गए बाघ को जंगल में छोड़ दिया गया।
इससे पहले रेस्क्यू किए गए 32 बाघ और तेंदुए
पीलीभीत टाइगर रिजर्व के जंगल से बाहर आकर आबादी क्षेत्र में पहुंचने वाले वन्यजीवों को रेस्क्यू किया जाता है। वर्ष 2014 से इससे पहले तक 32 बाघ तेंदुओं को रेस्क्यू किया जा चुका है, जिनको जंगलों व चिड़ियाघरों में छोड़ा गया।