बाघों और तेंदुओं के लिए खुशखबरी: पीलीभीत टाइगर रिजर्व बना 'ईको सेंसटिव जोन', वन्यजीवों को मिलेगा नया जीवनदान
पीलीभीत टाइगर रिजर्व को पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा ईको सेंसटिव जोन घोषित किया गया है। इस अधिसूचना से बाघों, तेंदुओं और अन्य वन्य ...और पढ़ें

मुस्तफाबाद स्थित पीलीभीत टाइगर रिजर्व का गेट : जागरण
HighLights
ईको सेंसटिव जोन में शामिल क्षेत्र में व्यावसायिक निर्माण कार्यों पर होगी रोक
प्राकृतिक जल निकायों और भूमि क्षेत्र में अशोधित जल नहीं कर सकेंगे प्रवाह
जागरण संवाददाता, पीलीभीत। पीलीभीत टाइगर रिजर्व (पीटीआर) को ईको सेंसटिव जोन (पारिस्थितकी संवेदी जोन) घोषित किया गया। इसका गजट (अधिसूचना) पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की ओर से जारी किया गया। इससे टाइगर रिजर्व में पाई जाने वाले बाघ, तेंदुआ, फिशिंग कैट, लेपर्ड कैट, दलदली हिरण, चित्तीदार हिरण, बार्किंग हिरण, काला हिरण, सांभर, स्लाथ बियर, मगरमच्छ, घड़ियाल समेत वन्यजीवों को संरक्षण मिलेगा।
केंद्र सरकार की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार पीटीआर से जिले में दो किलोमीटर तक के क्षेत्र को ‘ईको सेंसटिव जोन’ घोषित किया। पीटीआर 730.24 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला है, जिसमें 602.79 वर्ग किलोमीटर कोर एरिया होने के साथ ही 127.45 वर्ग किलोमीटर बफर जोन आता है।
इसके दायरे में 230 गांव आएंगे, जिसमें उत्तराखंड की अंतरराज्यीय सीमा और उत्तर-पूर्व में नेपाल की अंतरराष्ट्रीय सीमा होने के कारण वहां विस्तार शून्य किलोमीटर रखा, जबकि शाहजहांपुर जिले की सीमा पर इसे एक किलोमीटर रखा गया। इस ईको सेंसटिव जोन को प्रतिषिद्ध, विनियमित और संवर्धित क्षेत्र में बांटा गया।
ईको सेंसटिव जोन में पारिस्थितकी संवेदी जोन में पर्यावरणीय संसाधनों का विशेष संरक्षण किया जाता है, जिससे वहां पर हर स्तर पर सुधार किया जाता है। इसमें खास तौर पर वाणिज्यिक खनन, पत्थर उत्खनन व पिसाई इकाइयाें पर रोक लगा दी गई। इसके अलावा ध्वनि, जल, वायु व मृदा प्रदूषण करने वाली औद्योगिक इकाइयाें की स्थापना, बड़ी जल विद्युत परियोजनाओं की स्थापना, नई आरा मशीन लगाने, ईंट भट्ठों को लगाने व जलावन लकड़ी का वाणिज्यिक उपयोग करने पर पूरी तरह से रोक लगा दी जाती है।
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यही नहीं, प्राकृतिक जल निकायों या भूमि क्षेत्र में अशोधित बहिस्रावों का निस्सरण और किसी परिसंकटमय पदार्थ का प्रयोग, उत्पादन या प्रसंस्करण करने पर भी पूरी तरह से रोक लगा दी गई। इसके अलावा विनियमित गतिविधियों में संरक्षित क्षेत्र की सीमा से एक किलोमीटर के अंदर नये होटलों, रिजार्ट पर रोक रहेगी, जबकि पर्यटन अधिनियमों के अंतर्गत आने वाले छोटे निर्माण कार्य किये जा सकेंगे। यही नहीं, रात के समय सेंसटिव जाेन के अंदर वाहनों का आवागमन भी नियंत्रित किया जाएगा।
राज्य सरकार तैयार करेगी आंचलिक महायोजना
केंद्र सरकार की अधिसूचना लागू होने के बाद राज्य सरकार दो वर्षों में ‘आंचलिक महायोजना’ तैयार करेगी। इस महायोजना के अंतर्गत भूमि उपयोग, जल प्रबंधन और स्थानीय समुदाय की आजीविका की सुरक्षा सुनिश्चित करेगी। इसके लिए डीएम की अध्यक्षता में एक ‘निगरानी समिति’ का गठन किया गया है, जिसमें पीलीभीत टाइगर रिजर्व के उप निदेशक सदस्य सचिव के रूप में कार्य करेंगे।
पीलीभीत व शाहजहांपुर के 230 गांव ईको सेंसटिव जोन में
ईको सेंसिटिव जोन की देवरिया, हरीपुर,बराही, महोफ, माला रेंज में जिले के अलावा शाहजहांपुर के 230 गांव भी शामिल किए गए। जिले में सिरसा सरदाह, माला कालोनी, पांडेय कालोनी, गांधीनगर, कोलकाता कालोनी, माला गोयल कालोनी, धेरम मंदारिया, कंजा हरैया, ज्ञानपुर, अजीतपुर पटपरा, राम नगरैया को शामिल किया है।
साथ ही महुआ अजीतपुर, रानीगंज, बांस खेड़ा, बड़ेपुरा, चतुर्भुजपुर, अमखिड़िया, ढकिया, केशरापुर, चकपुर, इमलिया फार्म, सफहा, बरुआ, संदई पड़ाव, शाहगढ़ और अभयपुर, पिपरिया करम, बानगंज ग्रांट, शिव नगर, बड़ी महदिया, छोटी महदिया, इटौरिया, पिंडारा, घुंघचाई आदि को शामिल किया गया।
पूर्व में हुए निर्माण का एनजीटी में चल रहा मामला
पीलीभीत टाइगर रिजर्व के दो किलोमीटर के दायरे में बड़े निर्माण कार्य कराया गया। इसे लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) में मामला चल रहा है। एनजीटी का फैसला आने के बाद पूर्व में किए गए निर्माण कार्यों पर ही अग्रिम कार्यवाही की जाएगी।
सरकार से अधिसूचना जारी करके पीलीभीत टाइगर रिजर्व को ईको सेंसटिव जोन घोषित किया गया है। इसमें वर्णित नियमों का अनुपालन कराया जाएगा। पूर्व में किए गए निर्माण कार्यों पर एनजीटी के फैसले के अनुसार कार्य किया जाएगा।
- मनीष सिंह, डीएफओ, पीलीभीत टाइगर रिजर्व
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