पीलीभीत के 'जंगल के राजा' अब सलाखों के पीछे: जानें क्यों 32 में से 17 बाघ-तेंदुओं को नहीं मिल सकी आजादी?
पीलीभीत टाइगर रिजर्व में 2014 से अब तक 32 बाघों और तेंदुओं को रेस्क्यू किया गया है। इनमें 24 बाघ और 8 तेंदुए शामिल हैं। 17 जानवरों को चिड़ियाघरों में ...और पढ़ें

प्रतीकात्मक चित्र
HighLights
79 बाघ स्वछंद विचरण करते हैं पीलीभीत टाइगर रिजर्व में
73 हजार वर्ग हेक्टेयर में फैला हुआ पीलीभीत टाइगर रिजर्व
पीयूष दुबे, जागरण, पीलीभीत। बाघ की मौजूदगी का एहसास दहाड़ के शोर से नहीं बल्कि शांत रहकर शिकार होने वाले जानवर की तड़प भरी आवाज कराती है। जबरदस्त हंटिंग एक्युरेसी वाले बिग कैट बाघ की हुकूमत जंगल में राजा की तरह ही चलती है। बाघ की बात हाे तो बिना पीलीभीत टाइगर रिजर्व के अधूरी लगती है।
पीलीभीत टाइगर रिजर्व में बाघों की बढ़ती संख्या जंगल को प्राकृतिक आवास होने का एहसास दिलाती है, लेेकिन जंगल से बाहर खुले में निकलकर शिकार करने वाले बाघ और तेंदुओं को चिड़ियाघर में रहने की सजा दी गई। वर्ष 2014 से अब तक जंगल से बाहर निकलने वाले 32 बाघ व तेंदुओं का रेस्क्यू किया गया, जिनको वन क्षेत्रों व चिड़ियाघरों में छोड़ा गया।
घोड़े की नाल के आकार में 73 हजार हेक्टेयर में बसे पीलीभीत टाइगर रिजर्व (पीटीआर) में 79 बाघ स्वछंद विचरण करते हैं, जबकि तेंदुओं की संख्या भी अच्छी है। राजा की तरह शिकार करते हैं, नहर, झील और घने जंगल में घूमते हैं, लेकिन पीटीआर के जंगल के ऐसे बाघ भी हैं, जो चिड़ियाघरों में उम्रकैद की सजा काट रहे हैं।
वर्ष 2014 में जंगल को टाइगर रिजर्व घोषित किए जाने से 32 बाघ तेंदुआ बाहर निकले, जिनको रेस्क्यू करके अलग-अलग स्थानों पर छोड़ा गया। इसमें सबसे ज्यादा बाघ और तेंदुओं को चिड़ियाघरों में छोड़ा गया, जहां वे सजा काट रहे हैं। इनमें 24 बाघों को अब तक रेस्क्यू करके छोड़ा गया, जबकि आठ तेंदुए अब तक रेस्क्यू करके छोड़े गए।
खबरें और भी
वन्य प्राणि उद्यान केंद्र कानपुर, नवाब वाजिद अली शाह प्राणि उद्यान लखनऊ, गोरखपुर प्राणि उद्यान और इटावा लायन सफारी में 13 बाघ और चार तेंदुआ छोड़ गए। वहीं, पीलीभीत टाइगर रिजर्व की महाेफ रेंज के घने वन क्षेत्र, बराही रेंज, दियोरिया रेंज, कतर्नियाघाट वन क्षेत्र, दुधवा टाइगर रिजर्व के बेलराया रेंज, सोनारीपुर रेंज, हरीपुर रेंज में 11 बाघों और चार तेंदुओं को रेस्क्यू करने के बाद छोड़ा गया। वन क्षेत्र में छोड़े गए बाघ-तेंदुए स्वच्छंद विचरण कर रहे हैं, जबकि चिड़ियाघरों में वे कैद होकर रह गए।
बाघ-तेंदुओं को रेस्क्यू करने के बाद तात्कालीन स्थितियों परिस्थितियों के अनुसार ही उनको वन क्षेत्र छोड़ा या चिड़ियाघरों में सौंपा जाता है। चिड़ियाघरों में सौंपने के बाद वहां के कर्मचारी ही देखभाल करते हैं। पीलीभीत टाइगर रिजर्व से बाहर 32 बाघ तेंदुओं का रेस्क्यू अब तक किया गया।
- मनीष सिंह, डीएफओ
यह भी पढ़ें- कहीं 'रंभा' की खूबसूरती, तो कहीं 'राकेट' की फुर्ती; पीलीभीत के जंगलों में गूंज रही है बाघों की दहाड़