कहीं 'रंभा' की खूबसूरती, तो कहीं 'राकेट' की फुर्ती; पीलीभीत के जंगलों में गूंज रही है बाघों की दहाड़
पीलीभीत टाइगर रिजर्व में 79 से अधिक बाघ हैं, जिनकी पहचान गाइड और पर्यटक उनके व्यवहार, फुर्ती या खूबसूरती के आधार पर करते हैं। 'रंभा' अपनी सुंदरता के ल ...और पढ़ें

पीटीआर में चहलकदमी करता बाघ
HighLights
पीलीभीत टाइगर रिजर्व में बाघिन रंभा, नैना, सुंदरी, चूका फीमेल का अलग ही अंदाज, चूका मेल, भीम ताल मेल भी खास
पीयूष दुबे, जागरण, पीलीभीत। पीलीभीत टाइगर रिजर्व (पीटीआर) में 79 से अधिक बाघ हैं। प्रत्येक के शरीर पर अलग धारियां होती हैं, यही इनकी पहचान का माध्यम है। विशेषज्ञ प्रशिक्षण के बाद इनकी पहचान करना सीखते हैं, जबकि दिनभर जंगल में घूमने वाले गाइड अनुभव के सहारे यह काम कर लेते हैं।
सफारी वाहनों पर पर्यटकों के साथ चलने वाले इन गाइडों ने बाघों की पहचान कर नामकरण भी कर दिया है। बराही रेंज में अक्सर दिखने वाली बाघिन को बराही मेल नाम दिया, इसी रेंज में तालाब के पास विचरण करने वाले बाघ का नाम राकेट रखा है। तीन वर्ष पहले पर्यटकों के कैमरे के सामने बीच सड़क पर शिकार करने वाले बाघ का नाम सुल्तान रखा।
सरकारी कागजों में बाघ नामकरण का उल्लेख नहीं
उसके शावक अब वयस्क हो चुके, उन्हें सुल्तान-1, सुल्तान-2, सुल्तान-3 नाम दिया है। ये बाघ जंगल सफारी के दौरान दिखते हैं तो गाइड पर्यटकों को इन्हीं नामों सें परिचय कराते हैं। ये नाम गाइडों ने दिए हैं, सरकारी कागजों में किसी बाघ के नामकरण का उल्लेख नहीं है।सर्वाधिक नजर आने वाला राकेट बाघ अक्सर कच्ची पटरी और पक्की पटरी पर मिलता है।
पर्यटकों का दिल जीत रहा है 'S3' बाघ pic.twitter.com/slzFgwjLAG
— anshul saxena (@rudrasaxena) January 11, 2026
राकेट बाघ की खास अदाकारी यह है कि वह फोटोग्राफी जमकर कराता है। यह बाघ अपने गठीले शरीर और फुर्ती के लिए जाना जाता है। इसको राकेट नाम पर्यटकों ने फुर्ती देखकर दिया है। बराही रेंज और चूका जाने वाले गेट के पास अक्सर दिखने वाली बाघिन का नाम रंभा रखा गया, जिसकी खूबसूरती को देखकर पर्यटकों ने बालीवुड अदाकारा रंभा का नाम रख दिया।
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कम नजर आती है सुंदर बाघिन
बाघिन नैना अपने दो शावकों के साथ घूम रही है, जो खटीमा मार्ग पर पर्यटकों को नजर आती है। सुंदरी बाघिन कम नजर आती है। स्टार बाघ पर्यटकों को अक्सर सफारी रूट दो पर नजर आता है। भीम ताल मेल बाघ अक्सर भीमताल के पास नजर आता है, जिसका शरीर काफी अच्छा है।
पीलीभीत में पर्यटकों के सामने जब राजा की तरह चला कुनबा। pic.twitter.com/lPkwuTzS6N
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चूका बीच के पास नजर आने की वजह से एक बाघ का नाम चूका मेल और बाघिन का नाम चूका फीमेल रख दिया गया। इन दिनों काफी समय से सुल्तान, एस-2 बाघ और बराही मेल नजर नहीं आ रहे हैं। इन बाघों को देखने के लिए पीलीभीत में पर्यटक बड़ी संख्या में पहुंचते हैं और प्राकृतिक नजारों का आनंद लेते हैं।
बाघ के बारे में जानकारी
समस्त बिल्ली प्रजातियों में बाघ सबसे बड़े विडाल वंशी होते हैं। भारतीय नर बाघ की लंबाई 2.70 मीटर से 3.15 मीटर, ऊंचाई 90 से 105 सेंटीमीटर तक होती है। नर बाघ का वजन 185 किलोग्राम से 300 किलोग्राम तक होता है। भारत में पाए जाने वाले बाघों को बंगाल टाइगर कहा जाता है, जिसका वैज्ञानिक नाम पैंथरा टाइग्रिस टाइग्रिस है। प्रत्येक बाघ के शरीर पर पाई जाने वाली भूरी-काली और सफेद धारियां मानव की अंगुलियों के निशान की तरह होती हैं, जो उनकी गणना करने और प्राकृतिक परिवेश में छिपने में सहायक होती हैं।
टाइगर रिजर्व में घूमने वाले गाइड और पर्यटकों ने बाघों के वजन, बनावट और क्षेत्र के आधार पर उनके नाम रख दिए हैं, जो अब लोगों की जुबां पर चढ़ने लगे हैं। पीटीआर में बाघों का आधिकारिक नाम नहीं दिया गया।
- मनीष सिंह, प्रभागीय वनाधिकारी, पीलीभीत टाइगर रिजर्व
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