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    सावधान! फोन पर दिखने वाला सेलिब्रिटी असली नहीं AI है; दुबई से चल रहा 150 करोड़ का 'फेयरप्ले' खेल

    Updated: Sat, 21 Feb 2026 02:46 PM (IST)

    पीलीभीत पुलिस ने ₹150 करोड़ से अधिक के AI-आधारित साइबर ठगी गिरोह का भंडाफोड़ किया है। ठग AI-जनरेटेड सेलिब्रिटी वीडियो का उपयोग कर Fairplay247.games जै ...और पढ़ें

    प्रतीकात्‍मक च‍ित्र

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    HighLights

    1. म्यूल खातों को खोलकर हवाला के जरिये दुबई में रकम भेजते हैं साइबर ठग

    पीयूष दुबे, पीलीभीत। जिले की पुलिस ने जिस साइबर ठग गैंग का राजफाश किया है। एक-एक करके घुंघचाई, रुद्रपुर, गोरखपुर और दिल्ली व भोपाल में साइबर ठग पकड़े जा चुके हैं। चार काल सेंटरों को बंद कराया गया है। साइबर ठगी के आरोपितों को जेल भेजा गया है। इसके बाद पुलिस साइबर ठगों के गैंग के सरगना तक पहुंच गई, जो दुबई में बैठे हैं।देश में मिले साइबर ठगों के विरुद्ध तो कार्रवाई हो गई, लेकिन दुबई में बैठे सरगना नहीं पकड़े जा सके। लेकिन पुलिस ने पूरे गैंग का भंडाफोड़ करते हुए आम जन को सतर्क किया।

    पुलिस ने बताया कि साइबर ठग लोगों को फंसाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआइ) का सहारा लेते हैं, जिससे लोगों को फंसाने में आसानी रहती है। साइबर ठग एआइ तकनीक से बने सेलेब्रिटी का वीडियो इंटरनेट मीडिया मेटा प्लेटफार्म फेसबुक, इंस्टाग्राम विज्ञापनों के माध्यम से वेबसाइट Fairplay247.games का प्रमोशन व एडवरटाइजमेंट करते है।

    नामी गेम‍िंंग एप का करते हैं प्रचार 

    इसके माध्यम से एविएटर, क्रिकेट तीन पत्ती, रमी इत्यादि गेमिंग एप का प्रचार-प्रसार किया जाता है, जिनमें लोग फंस जाते है। एआइ तकनीक से बने सेलेब्रिटी का वीडियो इंटरनेट मीडिया पर दर्शाया जाता है, जिसमें यह बताया जाता है कि यह विश्वसनीय गेमिंग पोर्टल है। इसमें गेम खेलकर अधिक से अधिक मुनाफा कमाया जाता है।

    आइपीएस नताशा गोयल ने बताया कि आनलाइन व एआइ से जेनरेटेड वीडियो को देखने के लिए जब क्लिक करते तो संबंधित व्यक्ति का डेटा उनके पास पहुंच जाता है। वहां से मार्केटिंग साफ्टवयेर पैनल में नये रजिस्ट्रेशन का डाटा काल सेंटर की टीम को देकर ठगी का खेल शुरू हो जाता है।

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    150 करोड़ से अध‍िक की हो चुकी ठगी

    पीड़ित को वेबसाइट पर रजिस्ट्रेशन करने के बाद गेमिंग प्लेटफार्म पर निवेश करने के लिये क्यूआर कोड प्राप्त होता है, जिस पर स्कैन कर पीड़ित व्यक्ति यूपीआइ के माध्यम से गेमिंग वालेट में प्रदर्शित होता है। गेमिंग वेबसाइट पर दिखाई देने वाला वालेट पूरी तरह से वर्चुअल होता है, जो गूगल पे व फोन पे जैसे ओरिजनल वालेट जैसा प्रतीत होता है, परंतु इसमें कोई वैध ट्रांजेक्शन आइडी प्रदर्शित नहीं होती है।

    जांच में जुटे पुलिस कर्मियों की मानें तो दुबई से आपरेट होने वाला यह साइबर ठग गैंग करीब 150 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी कर चुका है। इसमें शामिल सदस्यों को एक-एक करके पकड़ा जाएगा और ठगी की गई रकम का ब्योरा जुटाया जाएगा तो इससे कम नहीं होगा।

    ऐसे दुबई पहुंचती ठगी की रकम

    इंटरनेट मीडिया पर संचालित बेवसाइट पर संचालकों से संपर्क स्थापित करके बेवसाइट की फ्रेंचाइजी ब्रांच हेड से खरीदी जाती है। इसमें ब्रांच हेड की ओर से म्यूल खातों की व्यवस्था करके उन खातों पर नेट बेकिंग तैयार कर बेवसाइट में लिंक कर दिया जाता है।

    ऐसे में जब कोई ग्राहक बेवसाइट पर रजिस्ट्रेशन कर पेमेंट करता है तो वह ब्रांच के खातों में ट्रांसफर हो जाता है। इसके बाद ब्रांच हेड की ओर से अकाउंट ग्रुप के माध्यम से खातों में प्राप्त धनराशि से अपना लाभांश निकालकर शेष धनराशि कैश में हवाला एजेंट या ब्रोकर के माध्यम से दुबई स्थित हेड आफिस भेज दी जाती है।

     

    सबसे जरूरी है कि लोग साइबर अपराधों के प्रति जागरूक हों। साइबर ठग एआइ से बने वीडियो का प्रयोग करके लोगों को फंसाते हैं। इस तरह के प्रलोभन से बचकर आनलाइन गेमिंग के चक्कर में न फंसे, अन्यथा साइबर ठगी का शिकार हो सकते हैं।

    - नताशा गोयल, सीओ सदर


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