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14 करोड़ से बनेगा रेस्क्यू सेंटर, पीलीभीत में बेघर बाघ और तेंदुओं को मिलेगा स्थायी आश्रय

Published: Mon, 15 Jun 2026 11:38 AM (IST)

पीलीभीत के गोपालपुर जंगल में 14 करोड़ रुपये की लागत से बाघों और तेंदुओं के लिए एक रेस्क्यू सेंटर तैयार ...और पढ़ें

टाइगर रिजर्व। फाइल फोटो।

टाइगर रिजर्व। फाइल फोटो।

HighLights

  1. गोपालपुर जंगल में 14 करोड़ का रेस्क्यू सेंटर तैयार

  2. जून अंत तक वन विभाग को सौंपा जाएगा केंद्र

  3. घायल बाघों-तेंदुओं को मिलेगा उपचार और नया घर

जागरण संवाददाता, पीलीभीत। जंगल से निकलकर गांवों में भटकने वाले बाघों, तेंदुओं को नया घर मिलेगा। इसके लिए 14 करोड़ रुपये से गोपालपुर के जंगल में रेस्क्यू सेंटर तैयार कराया जा चुका। जून के अंत तक इसे वन विभाग को सौंप दिया जाएगा।

प्रभागीय वनाधिकारी मनीष सिंह ने बताया कि कार्यदायी संस्था 30 जून को भवन हस्तांतरित कर देगी। इसके बाद चिकित्सकों एवं वनकर्मियों की तैनाती प्रक्रिया कराई जाएगी।

आपसी संघर्ष या शिकार के कारण बाघ, तेंदुओं को जंगल से बाहर आना पड़ता है। कई बार वे घायल अवस्था में गांवों के आसपास भटकते हैं। इसके अलावा, जंगल के बाहर आबादी क्षेत्र में मानवों से संघर्ष भी हो जाता है। इन परिस्थितियों में बाघ, तेंदुओं को रेस्क्यू कर लखनऊ, कानपुर या गोरखपुर के चिड़ियाघरों में भेजा जाता है।

पीलीभीत में बेघर बाघ व तेंदुओं को मिलेगा नया घर

इस व्यवस्था में बदलाव के लिए वर्ष 2023 में गोपालपुर गांव के पास सामाजिक वानिकी के जंगल में रेस्क्यू सेंटर बनना शुरू हुआ। अब इसका निर्माण पूरा हो चुका, रंगाई-पुताई अंतिम चरण में है। इसके एक हिस्से को प्राकृतिक स्वरूप में ही रखा गया है। इसके अलग क्षेत्रों में रेस्क्यू बाघ या तेंदुआ रखे जाएंगे।

इसी परिसर में अस्पताल, क्वारंटाइन जोन, पोस्टमार्टम हाउस एवं शवदाह गृह बना है। वनकर्मियों के आवास भी तैयार हो गए हैं।

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माह के अंत तक तैयार हो जाएगा रेस्क्यू सेंटर

रेस्क्यू किए गए बाघ, तेंदुओं को सबसे पहले अस्पताल में रखकर स्वास्थ्य परीक्षण कराया जाएगा। यदि उनके शरीर पर किसी प्रकार की कोई चोट नहीं है तो कुछ समय क्वारंटाइन सेंटर में रखकर जंगल में छोड़ा जाएगा। बीमारी या संघर्ष में मरने वाले वन्यजीवों का पोस्टमार्टम कर शवदाह करने की व्यवस्था भी इसी परिसर में है।

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