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    नेपाल हिंसा पर सीमा पार से बड़ी चेतावनी: 'बाहरी लोग बिगाड़ रहे माहौल, बंद हों अवैध मदरसे'

    Updated: Fri, 07 Aug 2026 03:54 AM (IST)

    नेपाल में हिंसा के बीच पीलीभीत सीमा पर सशस्त्र बलों की सतर्कता बढ़ाई गई है। सीमावर्ती नेपाली नागरिक नेपाल को हिंदू राष्ट्र बनाना चाहते हैं, लेकिन आगजन ...और पढ़ें

    नेपाल के सीमावर्ती गांव निशानी टोल में आपस में बातचीत करते नेपाली नागरिक। जागरण

    नेपाल के सीमावर्ती गांव निशानी टोल में आपस में बातचीत करते नेपाली नागरिक। जागरण

    HighLights

    1. पीलीभीत में नेपाल सीमा पर सशस्त्र बलों की सतर्कता बढ़ी

    2. नेपाल के नागरिक चाहते हैं हिंदू राष्ट्र, आगजनी पर लगे रोक

    जागरण संवाददाता, पीलीभीत। पड़ोसी देश नेपाल हिंसा में सुलग रहा, मधेश व कोशी प्रांत में आगजनी की आंच दूर तक महसूस की जा रही। पीलीभीत में सीमावर्ती गांवों के नेपाली चाहते हैं कि नेपाल हिंदू राष्ट्र बने, मगर आगजनी पर रोक लगे। वो नेपाल की इन परिस्थितियों के लिए बाहरी लोगों को जिम्मेदार ठहराते हैं।

    ऐसे लोग, जो फेरी-व्यापार के नाम पर नेपाल के अलग हिस्सों में जाते हैं। वहां के लोगों को भरोसा जीतकर रहने की जगह बना लेते। इसके बाद अराजकता का हवा देते हैं। गुरुवार को जागरण टीम ने नेपाल में सीमावर्ती गांवों के हाल और ग्रामीणों के मन की बात जानी।

    पीलीभीत जिले की 47 किमी की सीमा नेपाल से जुड़ी है। मित्र देश की सीमाओं पर तार-फेसिंग है ना कोई दीवार। सशस्त्र सीमा बल के जवान उसकी निगरानी करते हैं। पीलीभीत के सीमावर्ती गांवों में लगने वाली बाजार में प्रतिदिन बड़ी संख्या में नेपाली लोग खरीदारी करने आते हैं। खेतों में मजदूरी भी करते हैं।

    पीलीभीत के लोग भी सहजता से नेपाली गांवों में जाकर व्यापार करते हैं। बीते दिनों नेपाल में हिंदू युवकों की हत्या के बाद हिंसक प्रदर्शन हुए, प्रदर्शनकारियों ने मुस्लिमों के घर फूंक दिए। हिंसा मुख्य रूप से मधेश व कोशी प्रांत में हुई, जो पीलीभीत सीमा से 600 किमी अंदर नेपाल में है।

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    पीलीभीत से सटे नेपाल के गांवों में हिंसा-प्रदर्शन नहीं हो रहे, मगर सशस्त्र सीमा बल ने सतर्कता बढ़ा दी है। गुरुवार को सीमावर्ती नौजल्हा गांव के पास तैनात जवान प्रत्येक ग्रामीण का नाम-पता पूछकर ही सीमा पार करने दे रहे थे। उनसे पूछ रहे थे कि किस काम से जा रहे, कब लौटकर आएंगे।

    सीमा पार नेपाल में ढाई किमी चलने के बाद निशानी टोला गांव है। वहां चार-पांच युवाओं के साथ खड़े ललित बोले कि अवैध मदरसा बंद कराने और रोहिंग्या मुस्लिमों को देश से बाहर निकालने का आंदोलन चल रहा, मगर हमारे क्षेत्र से काफी दूर है।

    हमारे गांव, यहां से आगे चलकर दोधारा कस्बा व कंचनपुर जिले तक किसी प्रकार का प्रदर्शन नहीं हो रहा। इस क्षेत्र में अधिकतर हिंदू आबादी है। आलोक दमाई ने बाहरियों पर चिंता जताई। उनका कहना था कि कुछ लोग अपना अस्तित्व जमाने के लिए नेपाल में आ जाते हैं, प्रलोभन देते हैं।

    ऐसे लोग जब पैर जमा लेते तो हमारे हिंदुओं पर हमला करने लगते हैं। अच्छी बात यह है कि हमारे गांव के आसपास किसी दूसरे धर्म का कोई व्यक्ति या ठिकाना नहीं है।

    गणेश बोले, हिंदू राष्ट्र नेपाल में यही हिंदुओं की हत्या की जाएगी तो आक्रोश होना जायज है। नेपाल के सुंदरनगर, धगना आदि गांवों में भी शांति है। यहां के लोग झूला पुल से साइकिल, बाइक और पैदल रास्ते से पीलीभीत के नौजल्हा आदि गांवों में खरीदारी करते हैं। यह दूरी तीन किमी की है।

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