पीलीभीत मेडिकल कॉलेज की खोज, सिर्फ 2% लोगों में होने वाली दुर्लभ मांसपेशी 'बिफिड सार्टोरियस' मिली
पीलीभीत मेडिकल कॉलेज में एक 88 वर्षीय शव में दुर्लभ यूनिलेटरल बिफिड सार्टोरियस मांसपेशी पाई गई है। यह खोज मेडिकल छात्रों को घुटनों और कूल्हों की सर्जर ...और पढ़ें

दुर्लभ मांसपेशी यूनिलेटरल बिफिड सार्टोरियस से सीखेंगे मेडिकल के छात्र।

समय कम है?
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वैभव मिश्रा, पीलीभीत। राजकीय मेडिकल कॉलेज में शोध के दौरान एक 88 वर्षीय पुरुष के शव के बाएं पैर में यूनिलेटरल बिफिड सार्टोरियस मसल मिली, जो केवल दो प्रतिशत लोगों में होती है। इससे मेडिकल के छात्र घुटनों और कूल्हों की सर्जरी को बेहतर तरीके से करना सीख सकेंगे।
मेडिकल कॉलेज के लिए देहदान करने वाले व्यक्ति के शव में ऐसी स्थिति गर्भ में अधूरे विभाजन के कारण असामान्य संरचना बनती है।
मेडिकल कॉलेज के छात्रों की पढ़ाई के लिए 88 वर्षीय वृद्ध पुरुष ने अपनी देहदान की थी। वृद्ध के शव के जब पढ़ाई के लिए रखा गया तो प्रोफेसरों ने पाया कि बाएं पैर में यूनिलेटरल बिफिड सार्टोरियस मसल नामक संरचनात्मक भिन्नता है।
विभागाध्यक्ष डॉ. अर्चना सिंह और डॉ. मनीषा स्काट ने पाया कि सामान्य तौर पर एकल रूप में रहने वाली सार्टोरियस मांसपेशी इस शव में दो भागों में विभाजित थी। यूनिलेटरल बिफिड सार्टोरियस मांसपेशी कूल्हे से लेकर घुटनों के नीचे तक होती है, जो किसी व्यक्ति को बैठने, उठने और घुटने मोड़ने आदि में सहायक होती है।
यह सामान्य तौर पर एक ही होती है। लेकिन वृद्ध के शव में मिली सार्टोरियस मांसपेशी का एक मुख्य भाग सामान्य स्थान पर और दूसरा अतिरिक्त भाग पैर की गहरी फैशिया में अलग से जुड़ा हुआ था।
उन्होंने बताया कि इस प्रकार की असामान्य संरचनाएं गर्भ में भ्रूणीय विकास के दौरान मांसपेशियों के अपूर्ण यानी अधूरे विभाजन के कारण पैदा होती हैं। चिकित्सा विज्ञान और इतिहास में ऐसे मामलों का मिलना बहुत ही दुर्लभ होने की वजह से यह खोज चिकित्सा एवं शारीरिक संरचना विज्ञान के क्षेत्र में एक अनोखा महत्व रखती है।
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ऐसा सिर्फ दो प्रतिशत लोगों में ही होता है। शव के बाएं पैर में घुुटने के पास दोहरी मांसपेशी होने से मेडिकल के छात्र इस तरह के क्रिटिकल केस के बारे में आसानी से समझ सकेंगे। उन्होंने बताया कि शरीर के भीतर मौजूद ऐसी अतिरिक्त मांसपेशी शल्य चिकित्सा (सर्जरी) के दौरान चिकित्सकों के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है, विशेष रूप से घुटने के आसपास के आपरेशनों, टेंडन ग्राफ्ट और एसीएल रिकंस्ट्रक्शन जैसी जटिल प्रक्रियाओं में इस दुर्लभ मांसपेशी की सही पहचान करना बेहद आवश्यक होता है।
यदि सर्जनों को शरीर की इस प्रकार की जन्मजात और दुर्लभ संरचनात्मक भिन्नताओं की पहले से सटीक जानकारी न हो, तो आपरेशन थियेटर में गंभीर भ्रम अथवा कई समस्याएं खड़ी हो सकती हैं।
शोधकर्ताओं का मानना है कि यह लाइव अध्ययन मेडिकल की पढ़ाई कर रहे छात्रों, एनाटामी विशेषज्ञों और देश-विदेश के सर्जनों के लिए भविष्य में उपयोगी सिद्ध होगा, इससे वे मानव शरीर की दुर्लभ आंतरिक विविधताओं को गहराई से समझ सकेंगे और भविष्य में होने वाले सर्जरी अभ्यासों व शोध कार्यों में इससे अधिक मदद मिलेगी।
मेडिकल कॉलेज के एनाटामी विभाग का यह शोध चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि है। मानव शरीर के भीतर की ऐसी दुर्लभ संरचनात्मक विविधताओं को खोजना हमारे डॉक्टरों की बेहतरीन कार्यकुशलता को साबित करता है। यह खोज भविष्य में सर्जनों को जटिल आपरेशनों को अधिक सटीकता व सुरक्षा के साथ करने में मार्गदर्शन देगी।
डॉ. संगीता अनेजा, प्राचार्य मेडिकल कॉलेज
यह कैडवर अध्ययन इस बात का प्रमाण है कि व्यावहारिक और व्यावहारिक अनुसंधान मेडिकल शिक्षा के स्तर को कितना ऊंचा उठा सकता है। पैर की मांसपेशी में मिला यह दुर्लभ विभाजन हमारे छात्र-छात्राओं के व्यावहारिक ज्ञान को समृद्ध करेगा, इससे क्लिनिकल प्रैक्टिस और सर्जरी के तौर-तरीकों में काफी सुधार आएगा।
डॉ. अरुण सिंह, उप प्राचार्य मेडिकल कॉलेज