आस्था पर भारी बदइंतजामी: कीचड़ और झाड़ियों से गुजरकर मांगेंगी पति की लंबी उम्र, वट सावित्री व्रत से पहले प्रशासन की खुली पोल
पीलीभीत के घुंघचाई गांव में वट सावित्री व्रत पूजा स्थल पर हर साल सुहागिन महिलाओं को गंदगी और झाड़ियों के बीच पूजा करनी पड़ती है। रास्ते और चबूतरे के अ ...और पढ़ें

पूरनपुर के गांव घुंघचाई में वटवृक्ष के आसपास फैली गंदगी और उगी घास। जागरण
HighLights
चबूतरा और रास्ता तक नहीं, हर साल परेशानी झेल रहीं सुहागिन महिलाएं
संवाद सूत्र, घुंघचाई (पूरनपुर)। सोलह मई शनिवार को श्रद्धा भाव के साथ सुहागिन महिलाएं पूरे की तरफ से मनाई जाने वाली वट वृक्ष पूजा इस बार भी बदहाल व्यवस्था की भेंट चढ़ती नजर आ रही है। पूजा स्थल पर फैली गंदगी, झाड़ झंकाड़ और बिना रास्ता के श्रद्धालुओं की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। वट वृक्ष स्थल पर न तो चबूतरा है और न रास्ता। गंदगी और झाड़ियों के बीच उन्हें पूजा करनी पड़ेगी।
व्रत रखकर वट वृक्ष की पूजा अर्चना कर सुहागिनें अपने पति, संतान की दीर्घायु और स्वजन के सुख समृद्धि की कामना करती हैं। घुंघचाई गांव की सुहागिन महिलाएं हर साल की तरह पूजा स्थल की बदहाली को लेकर चिंतित नजर आ रही है। गांव की उत्तर दिशा में स्थित वट वृक्ष स्थल पर वर्षों से पूजा होती चली आ रही है।
पूरे गांव में मात्र एक ही स्थान है। जहां महिलाएं पहुंचकर पूजा करती है। इसके बाद भी आज तक वट वृक्ष पर न तो चबूतरे का निर्माण कराया गया और न ही स्थल तक पहुंचने के लिए रास्ता बनाई गई। निर्माण कार्य दूर की बात सफाई तक नहीं कराई गई है। जबकि घुंघचाई गांव की आबादी 12 हजार से अधिक है। चार हजार मतदाता हैं।
पूजा के दिन स्थल की साफ सफाई भी नहीं कराई जा रही है। व्रती महिलाएं पूजा सामग्री लेकर उबड़ खाबड़ खेतों से गुजर कर स्थल तक पहुंचेंगी। बारिश होने पर खेत और स्थल पर कीचड़ भर जाता है। सुहागिनों को कीचड़ से गुजर कर कपड़े संभालते हुए झाड़ झंकाड़ और गंदगी के बीच पूजा करनी पड़ती है। हर साल शिकायतों और मांगों के बावजूद जिम्मेदार केवल आश्वासन देकर अपना पल्ला झाड़ लेते हैं।
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महिलाओं में इसको लेकर खासा रोष है। उनका कहना है कि वट सावित्री व्रत सुहागिन महिलाओं की आस्था और परंपरा से जुड़ा महत्वपूर्ण पर्व है। लेकिन प्रशासनिक उपेक्षा के चलते उन्हें बिषम परिस्थितियों में पूजा करने को मजबूर होना पड़ता है। बुजुर्ग महिलाओं को सबसे अधिक परेशानी झेलनी पड़ती है।
गांव में स्थित वट वृक्ष स्थल एकता की मिसाल है। बडी आबादी होने के बाद भी एक ही वट वृक्ष स्थल पर पूरे गांव की सुहागिन महिलाएं पूजा करने पहुंची है। स्थल पर पहुंचने के लिए रास्ता न होने से खेतों से होकर पहुंचना पड़ता है। इससे परेशानी होती है। - सोनम
वट वृक्ष पूजा स्थल पर रास्ता तो दूर की बात है साफ सफाई भी नहीं कराई जाती। झाड़ियों और गंदगी के बीच पूजा करनी पड़ती है। व्रत नजदीक आते ही वृक्ष स्थल पर चबूतरा और साफ सफाई की हर साल मांग की जाती। लेकिन कोई ध्यान नहीं दिया जाता। - सुधा
पूरे गांव में एक स्थान पर हर साल वट सावित्री व्रत के दिन बड़ी संख्या में सुहागिन महिलाओं को पूजा करने को खेतों से होकर पहुंचना पड़ता है। वट वृक्ष पूजा स्थल पर साफ सफाई के अभाव में गंदगी झाड़ झंकाड़ के बीच पूजा करनी पड़ती है। - ममता
पूजा स्थल पर सुहागिनों के लिए कोई भी सुविधा नहीं है। हर साल कीचड़ से गुजर कर स्थल पर पूजा करनी पड़ती है। चबूतरा और साफ सफाई की मांग की जाती है। लेकिन इसके बाद भी अव्यवस्थाओं के बीच ही पूजा करना मजबूरी बन गया है। - अंजलि
धार्मिक स्थल पर सरकारी मद से चबूतरे का निर्माण नहीं कराया जा सकता है। रास्ते को दिखवाकर निर्माण कार्य कराया जाएगा। टीम भेजकर स्थल की अच्छी तरह से साफ सफाई करा दी जाएगी।
- अवनीश कुमार, पंचायत सचिव एवं प्रभारी एडीओ
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