सड़क-बिजली की सेहत सुधरी, शिक्षा व स्वास्थ्य की हालत दयनीय, प्रतापगढ़ के बाबागंज विधायक का देखें रिपोर्ट कार्ड
प्रतापगढ़ के बाबागंज विधायक विनोद सरोज के रिपोर्ट कार्ड में सड़कों और बिजली में सुधार दिखा है, लेकिन शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के मोर्चे पर स्थिति द ...और पढ़ें
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प्रतापगढ़ के बाबागंज विधायक का देखें रिपोर्ट कार्ड।
HighLights
विकास के तमाम दावों के बीच युवाओं में रोजगार को लेकर मायूसी
युवाओं में रोजगार की कमी और कई परियोजनाएं अधूरी।
जागरण संवाददाता, प्रतापगढ़। एक तरह बकुलाही नदी और दूसरी तरफ नालों से घिरी बाबागंज (सुरक्षित) विधानसभा में पिछले सवा चार सालों में विकास की हलचल दिख रही है। सड़कों की दशा सुधरने के साथ गांव-गांव तक बिजली पहुंची है। पुल बनने से आवागमन सुगम हो गया है। वहीं विकास के तमाम दावों के बीच युवाओं में रोजगार को लेकर मायूसी है। शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा में कुछ खास काम न होने से जनता मायूस भी है। कई परियोजनाएं अटकी हुई हैं। लोग उनके धरातल पर उतरने का इंतजार कर रहे हैं।
कुछ काम अभी भी अधूरे
2022 के विधानसभा चुनाव में जनसत्ता दल लोकतांत्रिक के टिकट पर विनोद सरोज 67,282 वोट पाकर विधायक चुने गए थे। उन्होंने सपा प्रत्याशी गिरीश पासी को हराया था, जिनको 51,515 वोट हासिल हुए थे। इस सीट पर विनोद की यह लगातार चौथी जीत है। लोगों ने उनसे बड़ी उम्मीद की थी। इस पर उन्होंने खरा उतरने का प्रयास किया, लेकिन कुछ काम अभी भी अधूरे रह गए हैं, जो जनता की हर दिन की जरूरत है।
ये हुए कार्य
बकुलाही नदी की खोदाई और सफाई करवाकर उस पर 12 नए पुलों का निर्माण, भिटारा में आइटीआइ कालेज का निर्माण कराकर उन्होंने लोगों की सालों की मांग को पूरा किया। बिहार-बाबागंज मार्ग, बाबूगंज-खटवारा मार्ग, खनवारी-कुशवापुर मार्ग, अवसानगंज मार्ग जैसी कई सड़कों का कायाकल्प हुआ और अंधेरा दूर करने को गांव-गांव बिजली की लाइन पहुंची। मगर बाबागंज मुख्यालय पर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र नहीं बन सका, जबकि जमीन उपलब्ध है।
रोडवेज बस सेवा का अभाव
स्वास्थ्य सेवाओं के लिए लोगों को महेशगंज जाना पड़ता है। जो अतिरिक्त पीएचसी है, वह संसाधनों का रोना रो रही है। ऐसे में मरीजों को मजबूरी में गैर जनपद तक चक्कर लगाना पड़ता है। बिजली की आसान उपलब्धता के लिए नया पावर हाउस बनने की भी उम्मीद थी, जो फिलहाल पूरी नहीं हो पाई है। बाबागंज मुख्यालय से जिला मुख्यालय के लिए रोडवेज बस सेवा नहीं है। इसकी शुरुआत होनी थी, जो नहीं हो पाई। लोगों को प्राइवेट बसों का सहारा लेना पड़ता है। रात में बसों का आवागमन न होने पर समस्या आने पर प्राइवेट साधन की व्यवस्था करनी पड़ती है।
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राजकीय शिक्षा मंदिरों की कमी
ग्रामीण प्रतिभाओं को निखारने के लिए कोई ग्रामीण स्टेडियम भी आज तक नहीं बन पाया है। शिक्षा की बात करें तो प्रबंधन तंत्र के तो कई विद्यालय हैं, लेकिन राजकीय स्तर पर अभी शिक्षा मंदिरों की कमी अखरती है। झींगुर में औद्योगिक पार्क बनने की अभी कवायद तक ही बात है। इस क्षेत्र में बौद्ध की स्मृति के कुछ स्थल भी हैं, जो विकास मांग रहे हैं। यह पर्यटन के नजरिए से महत्वपूर्ण स्थल बन सकते हैं। इस दिशा में समुचित प्रयास नहीं हो पा रहा है। लघु उद्योगों की भी इस क्षेत्र में भारी कमी है। ऐसे में लोगों को मेहनत-मजदूरी करनी पड़ती है या दूसरे प्रांतों में जाना पड़ता है। हालांकि बगल से गंगा एक्सप्रेसवे गुजरने से रोजगार के कुछ अवसर जरूर नजर आने लगे हैं, लेकिन यह ऊंट के मुंह में जीरे के सामान हैं।
बाबागंज विधानसभा में हमारा मुख्य फोकस पहले सड़कों पर रहा। गांवों की मुख्य मार्गों से कनेक्टिविटी बढ़े, इस पर काम किया गया। बकुलाही नदी और नालों से प्रभावित क्षेत्र में सड़कों की दशा अब और बेहतर हो गई है। जनसत्ता दल के मुखिया रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया के मार्गदर्शन में विकास की रफ्तार लगातार तेज हो रही है। बहुत प्रयास करके गांवों को विद्युतीकृत करवाया गया है। मेरे पहले मेरे पिता स्व. रामनाथ सरोज यहां के विकास के लिए प्रयत्नशील रहे। उनके बाद हम भी गांवों की दशा बदलने में लगे हैं। शिक्षा के संसाधनों को बढ़ाने का प्रयास चल रहा है। भिटारा में आइटीआइ कालेज का निर्माण रुका था। सदन में आवाज उठाकर इसे शुरू कराया। स्वास्थ्य सेवा की बात करें तो डेरवा अस्पताल में चिकित्सकों व संसाधनों की उपलब्धता कराई गई। झींगुर में औद्योगिक पार्क बनने जैसे कुछ बड़े प्रोजेक्ट पर काम हो रहा है, इसमें अभी समय जरूर लगेगा, लेकिन हो जाने पर बाबागंज और चमकेगा। बौद्ध स्थलों का विकास पर्यटन विभाग से कराया जाएगा।
- विनोद सरोज, विधायक जनसत्ता दल लोकतांत्रिक, बाबागंज (सुरक्षित)
बाबागंज बहुत पिछड़ा क्षेत्र आज भी है। सवा चार साल में कोई खास काम नहीं दिख सका। एक ही परिवार में सीट लंबे समय से होने के बाद भी वादे व दावे अधिक हैं, काम कम। बानगी के तौर पर राजापुर पिया मिलन चौराहे के पास से कुशहा से गंगा एक्सप्रेसवे के नीचे से बभनपुर बिहार होते हुए भदरी तक की 16 किमी की सड़क ब्रिटिश शासन काल से अब तक नहीं सुधरी। इस एक सड़क से पूरे विधानसभा क्षेत्र के विकास की नज्ब को समझा जा सकता है। रोजगार, चिकित्सा व शिक्षा के क्षेत्र में कोई कदम उठता नहीं दिखा। रोडवेज की बसों का संचालन न होने से भी यात्रियों को भारी परेशानी झेलनी पड़ती है। जनता को विकास के सपने ही दिखाए गए।
- गिरीश पासी उपविजेता, सपा
बाबागंज (सुरक्षित) विधानसभा
कुल मतदाता : 325039
पुरुष मतदाता : 172628
महिला मतदाता : 152365
विधानसभा क्षेत्र के लोग क्या बोले?
बाबागंज विधायक सदैव जनहित के कार्यों में लगे रहते हैं। क्षेत्र में प्रत्येक छोटी बड़ी-घटना व कार्यक्रम में उनकी उपस्थिति रहती है। उनकी जन उपलब्धता उनकी सेवा के प्रति सजगता की प्रतीक है। उनके द्वारा क्षेत्र में निरंतर सड़कों का जाल बिछाने का कार्य जारी है। क्षेत्र लगातार संवर रहा है।
- रणजीत यादव, डेरवा
विपक्षी चाहे जो कहें, लेकिन बाबागंज विधायक ने कई कार्य किए। हीरागंज से कमासिन तक सड़क चौडीकरण व डामरीकरण की लंबे समय से चल रही मांग पूरी हुई। हर गांव को बिजली मिली। ऊबड़-खाबड़ क्षेत्र है। उसकी दशा बदलने में समय लग रहा है। कई योजनाएं अभी चल रही हैं। उनको पूरा तो होने दीजिए।
- विनोद कुमार, हीरागंज
बाबागंज एक ऐतिहासिक और धार्मिक नजरिए से महत्वपूर्ण विधानसभा क्षेत्र है। यहां अधिकांश किसान रहते हैं। इस क्षेत्र के विकास के लिए वह प्रयास नहीं नजर आता है, जिसका यह क्षेत्र हकदार है। युवाओं को रोजगार के लिए कोई प्रयास न होना हर किसी को अखरता है। अनेक गांव अब भी बदहाल हैं।
- भागीरथी, गोगौर
इस बदलते दौर में अगर अस्पताल में दवाई और डाक्टर भी ना मिलें तो फिर विकास के दावे पर अपने आप ही सवाल उठ जाते हैं। 50 बेड का अस्पताल मंजूर हुआ था। इसे महेशगंज में बनना था। यह आज तक नहीं बना, जो है वह तीस का है। जनता की हर रोज की जरूरत वाला विकास ही बाबागंज मांग रहा है, वह जाने कब होगा।
- कामता प्रसाद,बाघराय