प्रतापगढ़ में फार्मर रजिस्ट्री कराने पर ही मिलेगी खाद, किसानों के लिए पर्याप्त उर्वरक उपलब्ध
प्रतापगढ़ में खरीफ सीजन के लिए किसानों को खाद तभी मिलेगी जब वे फार्मर रजिस्ट्री कराएंगे। जिले में उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता है और कृषि विभाग ने धा ...और पढ़ें

फार्मर रजिस्ट्री कराने पर ही मिलेगी खाद।
HighLights
खाद के लिए फार्मर रजिस्ट्री कराना अब अनिवार्य।
प्रतापगढ़ में खरीफ सीजन के लिए पर्याप्त उर्वरक उपलब्ध।
धान की फसल में सही मात्रा में खाद प्रयोग करें।
संवाद सूत्र, प्रतापगढ़। खरीफ सीजन में किसानों को खाद के लिए फार्मर रजिस्ट्री अनिवार्य कर दी गई है। फार्मर रजिस्ट्री कराने वाले किसानों को ही समितियों से खाद दी जाएगी। इसके अलावा फसल के अनुरूप ही खाद का वितरण होगा। जिला प्रशासन एवं कृषि विभाग ने इसके लिए समुचित प्रबंध किया है।
जिले में खरीफ सीजन में इस बार 1,46,374 हेक्टेयर में खेती का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। मुख्य फसल धान की खेती 1,09,390 हेक्टेयर में की जा रही है। खरीफ सीजन में धान की नर्सरी डालने वालों के लिए अब खाद डालने की जरूरत है।
कृषि विभाग का दावा है कि जनपद में उर्वरकों की मांग के अनुसार पर्याप्त मात्रा में उपलब्धता है। जिले में 26000 मीट्रिक यूरिया, 7000 मीट्रिक डीएपी व 7800 मीट्रिक एनपीके उर्वरक उपलब्ध है।
गत वर्ष जुलाई के महीने में 16000 मीट्रिक यूरिया, 3500 मीट्रिक डीएपी तथा 1085 मीट्रिक एनपीके का वितरण किया गया था। जिला कृषि अधिकारी ने किसानों से अनुरोध किया है कि वे किसी भी प्रकार की अफवाहों पर ध्यान न दें और नियमित रूप से अपनी आवश्यकता के अनुसार उर्वरकों का क्रय करें, अनावश्यक उर्वरकों का भंडारण न करें।
सही मात्रा में करें उर्वरकों का प्रयोग
खरीफ के सीजन में धान एक मुख्य फसल है। अधिक उत्पादन लेने के लिए सही देखभाल एवं आवश्यक पोषक तत्वों की जानकारी होना आवश्यक है। इसके अभाव में फसल पर विपरीत प्रभाव देखने को मिल सकता है।
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सही मात्रा में उर्वरकों का इस्तेमाल न होने से फसल को उचित पोषक तत्व नहीं मिलते हैं। इससे फसल का उत्पादन एवं गुणवत्ता प्रभावित होती है। इसलिए उचित मात्रा में उर्वरकों के इस्तेमाल एवं सही समय की जानकारी होना आवश्यक है। धान के खेत में पौधों की रोपाई के समय नाइट्रोजन: फासफोरस: पोटाश को 50:12:12 किलोग्राम प्रति एकड़ के हिसाब से खेत में डालें।
जिला कृषि रक्षा अधिकारी अनिल मिश्र बताते हैं कि इसके साथ ही 110 किलोग्राम यूरिया, 75 किलोग्राम सिंगल सुपर फासफेट और 20 किलोग्राम म्यूरेट ऑफ पोटाश प्रति एकड़ के हिसाब से खेत में डालना उचित रहेगा। पौधों की रोपाई के समय प्रति एकड़ खेत में 20 किलोग्राम यूरिया डालें। फास्फोरस और नाइट्रोजन की पूर्ति के लिए प्रति एकड़ खेत में 40 किलोग्राम डीएपी मिलाएं।
धान की रोपाई के बाद उर्वरक प्रबंधन
- पौधों की रोपाई के 25 दिनों बाद प्रति एकड़ खेत में 35 किलोग्राम यूरिया का इस्तेमाल करें।
- पौधों की रोपाई के 42 दिनों बाद प्रति एकड़ खेत में 35 किलोग्राम यूरिया फिर से डालें।
- पौधों में जिंक की कमी पूरी करने के लिए प्रति एकड़ खेत में तीन से चार किलोग्राम जैविक जिंक या सिंगल सुपर फास्फेट का इस्तेमाल करें।
- खड़ी फसल में खैरा रोग के लक्षण नजर आने पर 800 ग्राम जिंक सल्फेट और 400 ग्राम बुझा हुआ चूना 180 लीटर पानी में मिलाकर छिड़कें।
किसान अपनी आवश्यकता के अनुसार उर्वरक का क्रय करें। जिले मेंं खाद भरपूर मात्रा में उपलब्ध है। इतना जरूर है कि फार्मर रजिस्ट्री कराए बिना खाद नहीं मिलेगी। जहां चकबंदी नहीं हुई है, वहां के किसान अपनी खतौनी, किसान बही व आधार कार्ड लेकर जाएंगे, तब ही खाद मिल जाएगी। -अशोक कुमार, जिला कृषि अधिकारी।