'जइसे वज्र फाट परा...', धमाके जैसी आवाज से दहल उठे ग्रामीण, 70 वर्षीय रजोला का छलका दर्द
प्रतापगढ़ के महुली में प्रमोद कुमार श्रीवास्तव का जर्जर मकान ढह गया, जिससे परिवार के कई सदस्य मलबे में दब गए। ...और पढ़ें


समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
राज नारायण शुक्ल राजन, प्रतापगढ़। हम सोवत रहे...एकाएक ‘जइसे वज्र फाट परा...हमार अंखिया खुलि गय’...हम बहुत डेराय गए, हिम्मत कइके निकरे तो पता लाग कि परमोद के घर वाले दबान अहैं...। नान-नान लरिकन कै एस मरन हम नाहीं देखे रहे...। बस इतना कहते-कहते 70 साल की रजोला बिलख पड़ीं। उनका गला रुंध गया।
महुली में बुधवार रात तेज धमाके जैसी आवाज के साथ जब प्रमोद कुमार श्रीवास्तव के जर्जर घर की दो छतों का मलबा गिरा तो आसपास के लोग सहम गए। किसी ने समझा कि जोरदार बिजली गिरी यानी वज्रपात हुआ। किसी ने अनुमान लगाया कि सड़क पर वाहनों की भीषण टक्कर हो गई है।
वह अपने घर से निकल पड़े। संयोग से जीवित बच गया प्रमोद का पुत्र अमन श्रीवास्तव सहम गया था, फिर भी वह अपने हाथों से मलबा हटाने में लगा था कि उसके बच्चे, पत्नी व माता-पिता भाई को बचा सके, लेकिन इसमें वह सफल नहीं रहा।
तब वह मदद के लिए परिवार के रजत को पुकारने लगा, क्योंकि उनका घर सामने ही था। रजत ने जागरण को बताया कि मलबे का ढेर देख दिमाग झन्ना गया कि अब क्या किया जाए...। फिर भी बचाव में लग गयए। इस दौरान रजत के पैर में चोट भी लग गई।
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तब तक परिवार के ही आरएसएस के प्रचार प्रमुख अंकुर श्रीवास्तव के साथ ही अंकित श्रीवास्तव, मुकेश श्रीवास्तव पहुंचे। पवन कुमार व कान्हा ने बताया कि पुलिस-प्रशासन की टीम ने तत्परता से काम किया। इस बीच महुली के सभासद दीपक उमरवैश्य पहुंचे।
उन्होंने बुलडोजर बुलवाया, लेकिन उसे चलाने को शहर कोतवाल सुभाष यादव ने रोक दिया, क्योंकि झटका लगने पर मकान की दीवारें भी ढह सकती थीं और हादसा बढ़ सकता था। मदद में पहुंचे बबलू सिंह खभोर कहने लगे कि श्रीवास्तव परिवार बहुत मेहनतकश था।
अचानक हादसे की सूचना मिली तो घर पर नहीं रुक सके। यहां आने पर चीत्कार ने हिलाकर रख दिया। रमेश, सौरभ, अनिल कुमार, लल्लू बताने लगे कि उस मकान की दशा देखकर उसके पास जाने का साहस नहीं हो रहा था।