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41वीं इंदिरा मैराथन: क्या टूटेगा 39 साल से स्वरूप सिंह और सत्यभामा का अजेय रिकार्ड? लोगों के जेहन में उठ रहा सवाल 

By Amarish Kumar Edited By: Brijesh Srivastava
Published: Fri, 06 Nov 2026 05:34 PM (IST)

41वीं इंदिरा मैराथन 19 नवंबर को प्रयागराज में होगी, जहाँ धावक 39 साल पुराने स्वरूप सिंह और 29 साल पुराने ...और पढ़ें

प्रयागराज में इंदिरा मैराथन। फोटो: जागरण आर्काइव

प्रयागराज में इंदिरा मैराथन। फोटो: जागरण आर्काइव

HighLights

  1. 1986 में स्वरूप सिंह ने बनाया रिकार्ड, -1996 से अजेय है सत्यभामा का रिकार्ड

  2. 19 नवंबर को होगी 41 वीं इंदिरा मैराथन, शुरू हो चुका है आनलाइन पंजीकरण

जागरण संवाददाता, प्रयागराज। संगम नगरी की सड़कों पर 19 नवंबर को जब हजारों धावकों के कदम एक साथ ताल ठोकेंगे, तब मुकाबला सिर्फ एक-दूसरे से नहीं, बल्कि समय और इतिहास से भी होगा। सवाल वही पुराना और बेहद रोमांचक है-क्या 41वीं इंदिरा मैराथन में स्वरूप सिंह और सत्यभामा का दशकों पुराना तिलिस्म टूटेगा?

बात साल 1986 की है। न जीपीएस ट्रैकर थे, न स्मार्टवाच, न वैज्ञानिक डाइट और न ही कार्बन-प्लेट वाले महंगे जूते। धूल भरी हवाओं और सामान्य सड़कों के बीच स्वरूप सिंह ने 42.195 किलोमीटर की दूरी महज दो घंटे 13 मिनट 57 सेकेंड में नापकर एक ऐसा इतिहास रचा, जो आज 39 साल बाद भी अजेय है।

आज जब ट्रेनिंग एप, स्पोर्ट्स साइंस और विश्वस्तरीय गियर धावकों के साथ हैं, लेकिन कोई स्वरूप सिंह के समय को छू तक नहीं सका। 2007 में ओलंपियन राम सिंह यादव (2:18:20) करीब जरूर पहुंचे, लेकिन पांच मिनट पीछे रह गए। इसके बाद दीप चंद्र शरण (2:19:34), वीएस धोनी (2:19:11) और शेर सिंह (2:20:11) ने जोर लगाया, मगर कीर्तिमान तोड़ नहीं पाए।

महिला वर्ग में 1996 में सत्यभामा ने दो घंटे 44 मिनट 40 सेकेंड का जो रिकार्ड सेट किया, वह 29 वर्षों से चट्टान की तरह अडिग है। 1998 में शास्त्री देवी (2:50:34), 2009 में सुकन्या मल (2:49:53) और 2022 में अंतरराष्ट्रीय एथलीट सुधा सिंह (2:51:40) जैसी दिग्गज धाविकाओं ने पसीना बहाया, पर सत्यभामा आगे ही रहीं।

39 वीं इंदिरा मैराथन (2024) में तो लगा था कि इतिहास बदल जाएगा। चैंपियन सोनिका ने जबरदस्त रफ्तार दिखाई, मगर फिनिश लाइन पर जब घड़ी रुकी, तो समय था दो घंटे 45 मिनट 28 सेकेंड। वह सत्यभामा के रिकार्ड से महज 48 सेकेंड दूर रह गईं। मैराथन के लिए आनलाइन पंजीकरण शुरू हो गया है। देश के विभिन्न हिस्सों से धावक पसीना बहा रहे हैं और कोच नई रणनीतियां तैयार कर रहे हैं। 19 नवंबर को निगाहें सिर्फ जीत के साथ टाइमर पर भी होगी। क्या इस बार स्वरूप सिंह और सत्यभामा का कीर्तिमान टूटेगा ? जवाब दौड़ के आखिरी पलों में ही मिलेगा।

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