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पारिवारिक सदस्यों की उपस्थिति में मृत्यु पूर्व बयान पूरी तरह भरोसेमंद नहीं : हाई कोर्ट

Published: Sat, 22 Aug 2026 09:37 AM (IST)

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने पत्नी को आग लगाकर मारने के आरोप में दोषी ठहराए गए पति को बरी कर दिया ...और पढ़ें

इलाहाबाद हाई कोर्ट। जागरण

इलाहाबाद हाई कोर्ट। जागरण

HighLights

  1. पति को पत्नी की हत्या के आरोप से बरी किया।

  2. मृत्यु पूर्व बयान की विश्वसनीयता पर हाई कोर्ट ने सवाल उठाए।

  3. परिजनों की उपस्थिति में बयान को अविश्वसनीय माना गया।

विधि संवाददाता, जागरण, प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने पत्नी को आग लगाकर मारने के आरोप में गैर-इरादतन हत्या के दोषी ठहराए गए पति को बरी कर दिया है। न्यायमूर्ति सिद्धार्थ वर्मा और न्यायमूर्ति अचल सचदेव की खंडपीठ ने मुरादाबाद की फास्ट ट्रैक कोर्ट द्वारा 2018 में दी गई आजीवन कारावास की सजा के खिलाफ दायर अपील को स्वीकार करते हुए यह फैसला सुनाया।

कोर्ट ने माना कि पारिवारिक सदस्यों की उपस्थिति में दर्ज किए गए मृत्यु पूर्व बयान पर पूरी तरह भरोसा नहीं किया जा सकता और केवल इसके आधार पर दोषी ठहराना उचित नहीं है। मामला 23 दिसंबर 2015 का है।

अपीलकर्ता जगन पर आरोप था कि उसने केरोसिन छिड़ककर पत्नी त्रिवेनी को आग लगा दी। अस्पताल में पीड़िता का मृत्यु पूर्व बयान दर्ज किया गया, उसने पति पर आग लगाने का आरोप लगाया था। जिरह के दौरान मृतक के भाई ने यह स्वीकार किया कि जब मजिस्ट्रेट बयान दर्ज कर रहे थे तब पीड़िता का बेटा, उसकी पत्नी और बुआ सहित परिवार के अन्य सदस्य उपस्थित थे।

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पीठ ने स्पष्ट किया कि जब मृत्यु पूर्व बयान परिजनों की उपस्थिति में दर्ज कराया गया हो तो उसमें सिखाए-पढ़ाए जाने की संभावना से इन्कार नहीं किया जा सकता। अदालत ने अन्य परिस्थितियों और चिकित्सीय साक्ष्यों पर भी ध्यान दिया। इससे यह सिद्ध हुआ कि अभियुक्त ने अपनी पत्नी को बचाने का प्रयास किया था और इस प्रक्रिया में वह स्वयं भी झुलस गया था।

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