देवरिया में सलेमपुर बाइपास के लिए भूमि अधिग्रहण संबंधी अवार्ड रद, Allahabad High Court से किसानों को मिली राहत
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने देवरिया में सलेमपुर बाइपास के लिए भूमि अधिग्रहण संबंधी मुआवजा अवार्ड रद्द कर दिए हैं, जिससे किसानों को बड़ी राहत मिली है। कोर्ट ...और पढ़ें

इलाहाबाद उच्च न्यायालय।
HighLights
हाई कोर्ट ने किसानों को दिया दावा पेश करने का अवसर
कोर्ट ने नौ याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए दिया आदेश
विधि संवाददाता, जागरण, प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने देवरिया जिले में राष्ट्रीय राजमार्ग-727बी (सलेमपुर बाइपास) के निर्माण के लिए भूमि अधिग्रहण से संबंधित मुआवजा निर्धारण के अवार्डों को रद कर दिया है। न्यायमूर्ति महेश चंद्र त्रिपाठी और न्यायमूर्ति कुणाल रवि सिंह की खंडपीठ ने मनोज कुमार बरनवाल एवं अन्य सहित कुल नौ याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया है।
याचियों की भूमि बाईपास निर्माण को अधिग्रहीत की थी
याची देवरिया के ग्राम कौड़िया जयराम के भूमिधर हैं। उनकी भूमि सलेमपुर बाईपास के चार लेन निर्माण के लिए अधिग्रहीत की गई थी। अधिग्रहण की घोषणा आठ दिसंबर 2023 को राजपत्र में प्रकाशित हुई और मुआवजा अवार्ड 15 फरवरी 2024 को पारित किया गया। याचियों का तर्क था कि धारा 3जी (3) के तहत अनिवार्य सार्वजनिक सूचना, जिसमें दो स्थानीय समाचार पत्रों में सूचना प्रकाशित की जानी चाहिए थी, कभी प्रकाशित नहीं की गई। इसके कारण उन्हें मुआवजा निर्धारण से पहले अपना दावा प्रस्तुत करने का अवसर नहीं मिला।
राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण व राज्य सरकार की दलील
राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण और राज्य सरकार ने दलील दी कि 28 दिसंबर 2023 को एक हिंदी तथा एक अंग्रेजी अखबार में सूचना प्रकाशित की गई थी, लेकिन पूरक शपथपत्र में यह स्वीकार किया गया कि उसमें केवल धारा 3डी का उल्लेख था। प्राधिकरण ने इसे मामूली तकनीकी चूक बताते हुए कहा कि लगभग 83 प्रतिशत भू-स्वामी मुआवजा ले चुके हैं और सड़क निर्माण काफी आगे बढ़ चुका है, इसलिए हस्तक्षेप उचित नहीं होगा।
अवार्ड रद कर कोर्ट ने मामला एसडीएम को वापस भेजा
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि धारा 3डी और धारा 3 जी(3) दोनों अलग-अलग प्रयोजनों के लिए हैं और एक को दूसरे का विकल्प नहीं माना जा सकता। खंडपीठ ने कहा कि यदि प्रकाशन में कोई त्रुटि हुई थी तो प्रतिवादियों को शुद्धिपत्र जारी करना चाहिए था, जो नहीं किया गया। अदालत ने मुआवजा अवार्ड 15 फरवरी 2024 सहित अन्य तिथियों के अवार्ड रद कर दिए और मामला सक्षम प्राधिकारी उप जिलाधिकारी यानी एसडीएम को वापस भेज दिया।
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कोर्ट का निर्देश
कोर्ट ने निर्देश दिया है कि प्राधिकारी को धारा 3जी (3) के अनुपालन में नई सार्वजनिक सूचना दो स्थानीय समाचार पत्रों में प्रकाशित करानी होगी, जिसमें भूमि का पूर्ण विवरण होगा। प्रभावित भू-स्वामियों को अपने दावे प्रस्तुत करने का अवसर मिलेगा। यह प्रक्रिया आदेश की प्रमाणित प्रति प्रस्तुत होने की तिथि से दो महीने के भीतर पूरी करनी होगी। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि उसने मुआवजे की मात्रा के गुण-दोष पर कोई राय नहीं दी है।