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UP में बंदरों के बढ़ते उत्पात पर इलाहाबाद हाई कोर्ट सख्त, राज्य सरकार से मांगी प्रभावी व व्यापक कार्ययोजना

By Suresh pandey Edited By: Brijesh Srivastava
Published: Tue, 21 Jul 2026 12:28 PM (IST)

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने उत्तर प्रदेश में बंदरों के बढ़ते उत्पात पर राज्य सरकार को प्रभावी और व्यापक कार्ययोजना बनाने ...और पढ़ें

इलाहाबाद हाई कोर्ट की फाइल फोटो।

इलाहाबाद हाई कोर्ट की फाइल फोटो।

HighLights

  1. 13 सदस्यीय उच्चाधिकार समिति से मांगी ठोस रणनीति, एक सितंबर को सुनवाई

  2. हाटस्पॉट का सर्वे, राहत उपाय और दीर्घकालिक योजना तैयार करने के दिए निर्देश

विधि संवाददाता, जागरण, प्रयागराज। प्रदेश में बंदरों के बढ़ते उत्पात को लेकर इलाहाबाद हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को प्रभावी और व्यापक कार्ययोजना तैयार करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की नेतृत्व में गठित 13 सदस्यीय उच्चाधिकार प्राप्त समिति से कहा है कि वह केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित न रहे, बल्कि नियमित बैठकें कर ठोस और समयबद्ध कार्ययोजना तैयार करे। मामले की अगली सुनवाई एक सितंबर 2026 को होगी।

जनहित याचिका पर खंडपीठ की सुनवाई

मुख्य न्यायमूर्ति अरुण भंसाली और न्यायमूर्ति क्षितिज शैलेंद्र की खंडपीठ ने जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि बंदरों के बढ़ते आतंक से लोगों की सुरक्षा प्रभावित हो रही है, इसलिए तत्काल प्रभावी कदम उठाए जाएं। यह जनहित याचिका गाजियाबाद के सामाजिक कार्यकर्ता विनीत शर्मा और बीटेक छात्रा प्रज्ञा सिंघल ने दाखिल की है। याचिका में कहा गया है कि लगभग सभी जिलों में बंदरों की संख्या तेजी से बढ़ रही है।

प्रयागराज समेत अन्य जिलों में बंदरों के हमले की घटनाएं

कौशांबी, प्रयागराज, सीतापुर, बरेली और आगरा सहित कई जिलों में बंदरों के हमलों की घटनाएं सामने आई हैं। कई स्थानों पर 200-200 बंदरों के झुंड घूम रहे हैं, जिससे स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा, किसानों की फसलें और आम लोगों का दैनिक जीवन प्रभावित हो रहा है। याचिका में यह भी कहा गया कि शहरीकरण के कारण बंदरों का प्राकृतिक भोजन और आवास कम हो गया है, जिससे मानव-बंदर संघर्ष बढ़ा है।

अपर महाधिवक्ता ने दी जानकारी 

अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल ने कोर्ट को बताया कि आठ जनवरी की बैठक में बंदर प्रबंधन की नोडल जिम्मेदारी पर्यावरण विभाग को सौंपी गई है। रीसस मकाक (लाल मुंह वाले बंदर) की संख्या और संघर्ष वाले क्षेत्रों का फील्ड सर्वे कराया जाएगा, जिसमें लगभग एक वर्ष लग सकता है। तब तक बंदरों को पकड़ने, उनके सुरक्षित परिवहन और छोड़ने संबंधी मौजूदा मानक संचालन प्रक्रिया के अनुसार कार्रवाई जारी रहेगी।

याचिकाकर्ताओं की यह है मांगें

हाई कोर्ट ने वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट आफ इंडिया से जल्द अल्पकालिक और दीर्घकालिक रणनीति देने, नगर निकायों को बंदरों को पकड़ने और सुरक्षित स्थानों पर छोड़ने का अभियान जारी रखने तथा भारतीय पशु कल्याण बोर्ड के प्रस्तावित एक्शन प्लान पर भी विचार करने का निर्देश दिया है। साथ ही नगर विकास विभाग के प्रमुख सचिव को भी मामले में पक्षकार बनाया गया है। याचिकाकर्ताओं ने पशु चिकित्सा केंद्र, रेस्क्यू वैन, बंदरों के लिए भोजन की व्यवस्था और 24 घंटे शिकायत हेल्पलाइन शुरू करने की भी मांग की है।

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