TGT भर्ती 2026 के अंग्रेजी विषय पर इलाहाबाद HC में नया तथ्य, 25% प्रश्न पाठ्यक्रम से इतर; अंक वितरण पर कोर्ट असंतुष्ट
इलाहाबाद हाई कोर्ट में टीजीटी भर्ती 2026 के अंग्रेजी विषय में 25% प्रश्न गलत पाए गए, जिस पर कोर्ट ने अंक वितरण के समाधान पर असंतोष जताया। उप्र शिक्षा ...और पढ़ें

इलाहाबाद उच्च न्यायालय की फाइल फोटो।
HighLights
कुल 125 में 33 प्रश्न गलत, नई संशोधित चयन सूची तैयार इसमें 42 और अभ्यर्थियों को मौका
5 अगस्त को भी कोर्ट सुनेगी मामला, उप्र शिक्षा सेवा चयन आयोग के सचिव, परीक्षा नियंत्रक तलब
विधि संवाददाता, जागरण, प्रयागराज। अंग्रेजी विषय में प्रशिक्षित स्नातक शिक्षक (टीजीटी) भर्ती 2026 को लेकर इलाहाबाद हाई कोर्ट में नया तथ्य सामने रखा गया है। न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन की एकलपीठ के समक्ष आदित्य कुमार सिंह व 17 अन्य की याचिका पर आज मंगगलवार को सुनवाई की गई।
सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया गया कि उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग द्वारा आयोजित इस परीक्षा में कुल 125 प्रश्नों में 33 प्रश्न गलत पाए गए हैं। शुरुआत में 29 प्रश्न पाठ्यक्रम से बाहर बताए गए थे। अब विशेषज्ञों ने यह भी निष्कर्ष निकाला है कि बाकी चार प्रश्न भी गलत थे। इस तरह कुल 33 प्रश्न गलत निकले, जो पूरे पेपर के 125 प्रश्नों का 25 प्रतिशत से अधिक हैं। इन गलत प्रश्नों के अंक बाकी प्रश्नों में बांट कर संशोधित चयन सूची बनाए जाने पर कोर्ट ने असंतोष जताया है।
आयोग के अधिवक्ता के. शाही ने अदालत को बताया कि गलत प्रश्नों के अंक बाकी प्रश्नों में बांट दिए हैं और इसके आधार पर नई संशोधित चयन सूची तैयार की गई है, जिसमें 42 और अभ्यर्थियों को चयन सूची में जगह मिली है। कोर्ट ने आयोग के इस समाधान से असंतोष जताया।
अदालत ने कहा कि जब 25 प्रतिशत से ज्यादा प्रश्न ही गलत निकल रहे हैं, तो सिर्फ अंक बांट देना कोई स्थायी हल नहीं हो सकता। कोर्ट ने कहा कि प्रश्नपत्र तैयार करने की पूरी प्रक्रिया की जांच करना जरूरी है, भले ही यह आयोग की अपनी जिम्मेदारी हो कि वह अपनी प्रक्रिया पर आत्मनिरीक्षण करे।
खबरें और भी
कोर्ट ने आदेश दिया कि आयोग के सचिव और परीक्षा नियंत्रक बुधवार पांच अगस्त 2026 को अदालत में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर हलफनामे पर पूरी प्रक्रिया स्पष्ट करें कि प्रश्न कैसे तैयार किए जाते हैं और परीक्षा कैसे आयोजित की जाती है। दोपहर दो बजे संबंधित याचिकाओं के साथ सुनवाई तय की गई है।
याचीगण की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता आरके ओझा व अधिवक्ता शिवेंदु ओझा, उमंग चंद्र गुप्त ने बहस की। इससे पहले 20 जुलाई को सुनवाई के दौरान आयोग ने बताया था कि प्रश्न संख्या 3, 11, 12 व 100 पर पुनर्विचार के लिए विशेषज्ञ समिति गठित की गई है। पूर्व में हाईकोर्ट यह टिप्पणी भी कर चुका है कि यदि समिति को त्रुटि मिली है तो उस पर आंख बंद नहीं किया जा सकता।