'लाइसेंसी हथियार शादी और धार्मिक आयोजनों में हर्ष फायरिंग के लिए नहीं', इलाहाबाद HC की अहम टिप्पणी
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि लाइसेंसी हथियारों का उपयोग हर्ष फायरिंग या धार्मिक आयोजनों में नहीं किया जा सकता। ...और पढ़ें

HighLights
हर्ष फायरिंग के लिए लाइसेंसी हथियार का उपयोग नहीं।
शस्त्र लाइसेंसधारी को कारतूसों का रिकॉर्ड रखना अनिवार्य।
रिकॉर्ड न होने पर शस्त्र लाइसेंस रद हो सकता है।
विधि संवाददाता, प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण टिप्पणी में स्पष्ट किया है कि लाइसेंसी हथियार का उपयोग शादी, धार्मिक आयोजनों या किसी भी प्रकार की हर्ष फायरिंग के लिए नहीं किया जा सकता। प्रत्येक शस्त्र लाइसेंसधारी का दायित्व है कि वह खरीदे गए कारतूसों और उनके उपयोग का पूरा रिकॉर्ड रखे।
ऐसा न करने पर शस्त्र लाइसेंस को निरस्त किया जा सकता है। यह टिप्पणी करते हुए न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी की एकलपीठ ने अखिलेश कुमार की याचिका खारिज कर दी है। याची ने लाइसेंसिंग प्राधिकारी और अपीलीय प्राधिकारी के उस आदेश को याचिका में चुनौती दी थी, जिसके तहत उसका शस्त्र लाइसेंस रद कर दिया गया था।
शस्त्र लाइसेंस वर्ष 2000 में जारी किया गया था। वर्ष 2019 में निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने खरीदे गए और उपयोग में लाए गए कारतूसों का विवरण मांगा। जांच में यह पाया गया कि लाइसेंसी ने कुल 857 कारतूस खरीदे थे, लेकिन केवल 57 कारतूस और 33 खोखे ही प्रस्तुत किए।
शेष 757 कारतूसों के बारे में बताया कि उनका उपयोग प्रशिक्षण, शादी, छठ पूजा और दुर्गा पूजा जैसे आयोजनों में किया गया। लाइसेंसिंग प्राधिकारी ने इस स्पष्टीकरण को असंतोषजनक मानते हुए कहा कि याची ने कारतूसों के उपयोग का कोई रिकॉर्ड या ठोस विवरण नहीं दिया। इसके बाद शस्त्र अधिनियम की धारा 17 के तहत लाइसेंस निरस्त कर दिया गया। अपीलीय प्राधिकारी ने भी इस फैसले को बरकरार रखा।
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दोनों आदेशों को हाई कोर्ट में चुनौती दी गई। याची की ओर से दलील दी गई कि पुराने नियमों के तहत इस्तेमाल कारतूसों का रिकॉर्ड रखना अनिवार्य नहीं था और वर्ष 2018 की अधिसूचना उसके मामले पर लागू नहीं होती। हालांकि, हाईकोर्ट ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया।
कोर्ट ने शस्त्र अधिनियम, शस्त्र नियम, 2016 और लाइसेंस की शर्तों का हवाला देते हुए कहा कि शस्त्र लाइसेंस कोई अधिकार नहीं, बल्कि विशेष सुविधा है, जो निर्धारित शर्तों के कड़ाई से पालन पर ही दी जाती है।
लाइसेंसिंग प्राधिकारी को यह जांचने का अधिकार है कि खरीदे गए कारतूस कहां और किस उद्देश्य से इस्तेमाल किए गए हैं। कोर्ट ने कहा कि याची न तो 757 कारतूसों का कोई रिकॉर्ड प्रस्तुत कर सका और न ही उनके उपयोग का संतोषजनक विवरण दे पाया।