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    ‘स्वेच्छा से विवाह करने वाली युवती को माता-पिता के पास लौटने के लिए बाध्य नहीं कर सकते’, इलाहाबाद HC का महत्वपूर्ण आदेश

    By Suresh pandey Edited By: Brijesh Srivastava
    Updated: Tue, 04 Aug 2026 08:06 PM (IST)

    इलाहाबाद हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि वयस्क युवती को अपनी मर्जी से शादी करने पर माता-पिता के पास लौटने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने रामप ...और पढ़ें

    इलाहाबाद हाई कोर्ट की फाइल फोटो।

    इलाहाबाद हाई कोर्ट की फाइल फोटो।

    HighLights

    1. इलाहाबाद हाई कोर्ट में रामपुर से जुड़े मामले में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका खारिज

    2. याची ने प्रतिवादी पर बेटी को बहला-फुसलाकर ले जाने का लगाया था आरोप

    विधि संवाददाता, जागरण, प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि कोई युवती अपनी मर्जी से अपने निवास स्थान और साथी का चयन करने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र है, और उसे उसके माता-पिता के पास लौटने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। न्यायमूर्ति संदीप जैन की एकलपीठ ने यह टिप्पणी रामपुर निवासी राकेश कुमार की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका खारिज करते हुए की है।

    याची का आरोप था कि उनकी बेटी निकिता (लगभग 20 वर्ष) को प्रतिवादी मनीष बहला-फुसलाकर अपने साथ ले गया है। मामले में 22 जून 2026 को थाना बिलारी, जिला मुरादाबाद में मनीष और अजीत के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई थी।

    याची के वकील ने यह भी दलील दी कि मनीष पहले से विवाहित है, इसलिए निकिता के साथ हुआ विवाह कानूनी रूप से मान्य नहीं है। राज्य सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त शासकीय अधिवक्ता ने बताया कि जांच के दौरान मजिस्ट्रेट के समक्ष निकिता का बयान दर्ज कराया गया, जिसमें उसने कहा कि उसके परिवार वाले उसकी शादी मानसिक रूप से अस्वस्थ व्यक्ति से करना चाहते थे।

    इस प्रस्ताव को अस्वीकार करते हुए वह 21/22 जून 2026 की रात अपने घर से निकल गई तथा मनीष के साथ बरेली में जाकर विवाह किया और अब वह अपनी मर्जी से ससुराल में रह रही है। उसने किसी भी प्रकार के दबाव या धमकी से इन्कार किया। हालांकि उसने कहा कि पति के रिश्तेदार शादी से खुश नहीं हैं और उसे धमकियां दे रहे हैं।

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    कोर्ट ने कहा, रिकार्ड से स्पष्ट है कि निकिता की जन्मतिथि पहली जनवरी 2006 है, यानी घर छोड़ने के समय वह वयस्क हो चुकी थी। कोर्ट ने कहा कि जब यह साबित हो जाए कि संबंधित व्यक्ति वयस्क है और अपनी इच्छा से किसी स्थान पर रह रहा है तो अदालत उसे केवल माता-पिता की असहमति के आधार पर वापस लौटने का आदेश नहीं दे सकती। इस आधार पर कोर्ट ने पाया कि गैरकानूनी बंधक बनाए जाने का कोई मामला नहीं बनता।