ITI अनुदेशक भर्ती-2016 प्रक्रिया मामले में इलाहाबाद HC का महत्वपूर्ण आदेश, कहा- याची को इंटरव्यू में शामिल करें
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 2016 की आईटीआई अनुदेशक भर्ती मामले में याची एकता सिंह को इंटरव्यू में प्रोविजनल शामिल होने की अनुमति दी है। कोर्ट ने आयोग को चार ...और पढ़ें

इलाहाबाद हाई कोर्ट की फाइल फोटो।
HighLights
आयोग ने 11 जुलाई को आदेश जारी करके याची को इंटरव्यू की सूची से बाहर कर दिया था
आयोग को अनुभव प्रमाण पत्र की प्रामाणिकता जांचने का निर्देश दिया गया।
आयोग को याचिका पर जवाब दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय कोर्ट ने दिया है
विधि संवाददाता, जागरण, प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग की वर्ष 2016 की आइटीआई अनुदेशक (फैशन टेक्नोलॉजी) भर्ती प्रक्रिया से जुड़े मामले में सुनवाई करते हुए वाराणसी निवासी याची एकता सिंह को इंटरव्यू में प्रोविजनल रूप से शामिल होने की अनुमति दी है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि याची का परिणाम न्यायालय की अनुमति के बिना घोषित नहीं किया जाएगा।
याची ने फैशन टेक्नोलॉजी ट्रेड के लिए आवेदन किया था
यह आदेश न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन ने याची के अधिवक्ता सुनील कुमार व वीरेंद्र कुमार गौतम और आयोग के अधिवक्ता को सुनकर दिया है। उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग ने 28 नवंबर 2016 को जारी विज्ञापन के तहत अनुदेशक (सामान्य चयन ) के 293 स्थायी पदों के लिए आवेदन मांगे थे। याची ने फैशन टेक्नोलॉजी ट्रेड के लिए आवेदन किया था। उसने उत्तर प्रदेश औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (अनुदेशक) सेवा नियमावली 2014 के तहत 51.5115 प्रतिशत अंक प्राप्त किए हैं, जो सामान्य वर्ग के लिए निर्धारित कट-ऑफ (41.30%) से काफी अधिक हैं। इसके बावजूद आयोग ने 11 जुलाई से को आदेश जारी कर उसे इंटरव्यू की सूची से बाहर कर दिया।
अनुभव प्रमाणपत्र की प्रामाणिकता पर भी संदेह
आयोग के अधिवक्ता सिद्धार्थ सिंघल ने कहा कि नियमावली के तहत नेशनल ट्रेड सर्टिफिकेट धारकों के लिए तीन वर्ष का कार्य अनुभव अनिवार्य है। नेहा राव बनाम यूपी राज्य फैसले के अनुसार अनुभव की गणना आइटीआइ कोर्स पूरा होने और परिणाम घोषित होने के बाद ही की जा सकती है। आयोग ने याची के अनुभव प्रमाणपत्र की प्रामाणिकता पर भी संदेह जताया है।
याची के अधिवक्ता का तर्क
याची के अधिवक्ता ने तर्क दिया कि नेहा राव वाले फैसले को पहले ही स्पेशल अपील के माध्यम से चुनौती दी जा चुकी है और मामला अभी लंबित है। अंतिम प्रमाण पत्र मिलने से पहले, संस्थान के प्रधानाचार्य द्वारा जारी प्रोविजनल सर्टिफिकेट के आधार पर हासिल किए गए अनुभव को खारिज नहीं किया जा सकता।
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याचिका पर जवाब के लिए चार सप्ताह का समय
कोर्ट ने मामले की गंभीरता और कानूनी पेच को देखते हुए कहा कि आइटीआइ सर्टिफिकेट से पहले का अनुभव मान्य है या नहीं जैसा मुख्य सवाल अपीलीय न्यायालय के समक्ष लंबित है, इसलिए याची को अंतरिम राहत दी जानी चाहिए। कोर्ट ने आयोग को निर्देश दिया कि इंटरव्यू के बाद याची के अनुभव प्रमाणपत्र की सत्यता और प्रामाणिकता की जांच कर लें। राज्य सरकार और आयोग को याचिका पर जवाब दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय कोर्ट ने दिया है।