रिट कार्यवाही में नियुक्त व्यक्ति को सुनवाई का है अधिकार, इलाहाबाद हाई कोर्ट ने दिया महत्वपूर्ण आदेश
इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने उचित दर की दुकानों के आवंटन-निरस्तीकरण मामलों की सुनवाई के दौरान कहा कि बाद में नियुक्त व्यक्ति को भी सुनवाई का अधिकार है। उ ...और पढ़ें

इलाहाबाद हाई कोर्ट की फाइल फोटो।
HighLights
इलाहाबाद HC में उचित दर की दुकानों के आवंटन-निरस्तीकरण मामलों की सुनवाई
कोर्ट ने कहा- ऐसे व्यक्ति को पक्षकार बनाए बिना हुआ आदेश विधि विरुद्ध माना जाएगा
कोर्ट ने मामले में दाखिल याचिकाएं स्वीकार कर अपीलीय प्राधिकरण का आदेश रद किया
विधि संवाददाता, प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने उचित दर की दुकानों के आवंटन और निरस्तीकरण से जुड़े मामलों में सुनवाई करते हुए कहा, बाद में नियुक्त व्यक्ति को भी अपील व रिट कार्यवाही में सुने जाने का पूरा अधिकार है। ऐसे व्यक्ति को पक्षकार बनाए बिना हुआ आदेश विधि विरुद्ध माना जाएगा।
यह सिद्धांत अपील और रिट दोनों कार्यवाही पर लागू होगा
न्यायमूर्ति कुणाल रवि सिंह ने कहा कि बाद में नियुक्त दुकानदार आवश्यक पक्षकार होता है। उसे सुनवाई का अवसर नहीं दिया गया तो वह आदेश को चुनौती दे सकता है। यह सिद्धांत अपील और रिट दोनों कार्यवाही पर लागू होगा। कोर्ट ने कहा कि अपील पहले हुई हो या बाद में, बाद के अलाटी को पक्षकार बनाने की पहली जिम्मेदारी मूल आवंटी की होगी। मूल आवंटी ऐसा नहीं करता तो बाद में नियुक्त व्यक्ति को आदेश को चुनौती देने का अधिकार रहेगा।
निरस्तीकरण के एक माह में नई नियुक्ति अनिवार्य
कोर्ट ने कहा कि यह कहना गलत है कि बाद का आवंटी खुद पक्षकार बनाने की अर्जी न दे तो उसका अधिकार खत्म हो जाता है। वर्ष 2019 के सरकारी आदेशों का विश्लेषण करते हुए कहा कि राशन दुकान का चयन ग्राम सभा की खुली बैठक से होता है। निरस्तीकरण के बाद एक माह के भीतर नई नियुक्ति अनिवार्य है। अपील लंबित रहने पर भी नई नियुक्ति की जा सकती है लेकिन वह अंतिम निर्णय के अधीन होगी।
अपीलीय प्राधिकरण का आदेश रद
कोर्ट ने इस मामले में दाखिल महालक्ष्मी सेल्फ हेल्प ग्रुप और राजकुमार उर्फ राजू की याचिकाएं स्वीकार करते हुए अपीलीय प्राधिकरण का आदेश रद कर दिया है। निर्देश दिया कि नए आवंटी को पक्षकार बनाया जाए तथा तीन माह के भीतर अपील का निस्तारण किया जाए। कोर्ट ने सभी मंडलायुक्तों को निर्देश दिया कि अपील सुनते समय यह जांचें कि नई नियुक्ति हुई है या नहीं। अगर हुई है तो नए आवंटी को नोटिस देकर सुनवाई का अवसर दें।