जल निगम के 774 जूनियर इंजीनियरों की बहाली का अंतिम मौका, हाई कोर्ट का सख्त आदेश
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने उत्तर प्रदेश जल निगम के 774 जूनियर इंजीनियरों को एक महीने के भीतर सेवा में बहाल करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने चेतावनी दी है कि ...और पढ़ें

इलाहाबाद हाई कोर्ट
HighLights
774 जूनियर इंजीनियरों की एक माह में बहाली का आदेश।
आदेश न मानने पर अधिकारियों को कोर्ट में हाजिर होना होगा।
हाई कोर्ट ने अवमानना याचिका पर दिया यह निर्णय।
विधि संवाददाता, जागरण, प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने वर्ष 2017 में उत्तर प्रदेश जल निगम में चयनित 853 जूनियर इंजीनियरों में 774 की सेवा में बहाली एक महीने में करने का आदेश दिया है। कहा है कि ऐसा नहीं होने की दशा में प्रमुख सचिव नगर विकास विकास विभाग समेत छह अधिकारियों को 21 मई 2026 को अदालत में उपस्थित होना होगा, ताकि उनके खिलाफ आरोप तय किए जा सकें।
यह आदेश न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल की एकलपीठ ने मीरजापुर के प्रवीण चौरसिया की अवमानना याचिका पर दिया है। मामले से जुड़े तथ्य ये हैं कि उक्त जूनियर इंजीनियरों की नियुक्ति तीन मार्च को बिना कोई कारण बताओ नोटिस दिए निरस्त कर दी थी। इस आदेश को इलाहाबाद हाई कोर्ट में चुनौती दी गई।
हाई कोर्ट ने चार अक्टूबर 2024 को अपने आदेश में फोरेंसिक रिपोर्ट के आधार पर 69 अभ्यर्थियों की चयन प्रक्रिया को दोषपूर्ण मानते हुए उन्हें अलग रखा तथा शेष 774 जूनियर इंजीनियरों को आदेश तिथि से दो माह के भीतर सेवा में बहाल करने का स्पष्ट निर्देश दिया। इस आदेश का उत्तर प्रदेश जल निगम एवं राज्य सरकार द्वारा अब तक अनुपालन नहीं किया गया। इस पर अवमानना याचिका दायर की।
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कोर्ट ने आदेश का अनुपालन नहीं होने पर जिन अधिकारियों को उपस्थित होने के लिए आदेशित किया हैं उनमें प्रमुख सचिव, नगर विकास विभाग, अपर मुख्य सचिव, नमामि गंगे एवं ग्रामीण पेयजलापूर्ति विभाग, प्रबंध निदेशक, उत्तर प्रदेश जल निगम (नगरीय), प्रबंध निदेशक, उत्तर प्रदेश जल निगम (ग्रामीण), मुख्य अभियंता, उत्तर प्रदेश जल निगम (नगरीय) व मुख्य अभियंता, उत्तर प्रदेश जल निगम (ग्रामीण) हैं।