सांसद अफजाल अंसारी की बेटी की याचिका पर इलाहाबाद HC की टिप्पणी- 'स्थगन आदेश न होने पर पिछले आदेशों का अनुपालन अनिवार्य'
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने सपा सांसद अफजाल अंसारी की बेटी नुसरत अंसारी की याचिका पर सुनवाई करते हुए महत्वपूर्ण टिप्पणी की। कोर्ट ने गैंगस्टर एक्ट के तहत कु ...और पढ़ें

इलाहाबाद उच्च न्यायालय की फाइल फोटो।
HighLights
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को 20 जुलाई तक की मोहलत दी
सांसद की बेटी नुसरत व तीन अन्य की याचिका पर खंडपीठ ने की सुनवाई
विधि संवाददाता, जागरण, प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने गाजीपुर से सपा सांसद अफजाल अंसारी की बेटी नुसरत अंसारी व तीन अन्य की याचिका की सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया है कि जब तक किसी अदालत के आदेश को उच्च न्यायालय या सर्वोच्च न्यायालय द्वारा रद या स्थगित नहीं किया जाता, तब तक उस आदेश का पालन किया जाना अनिवार्य है। कोर्ट ने कहा, सिर्फ अपील दाखिल कर देने से आदेश का महत्व कम नहीं हो जाता। मामला गैंग्सटर एक्ट के तहत कुर्क संपत्तियों को आदेश के बावजूद रिलीज नहीं किए जाने से संबंधित है।
खंडपीठ ने की टिप्पणी
यह टिप्पणी न्यायमूर्ति सिद्धार्थ वर्मा एवं न्यायमूर्ति अचल सचदेव की खंडपीठ ने याची के अधिवक्ता उपेंद्र उपाध्याय और सरकारी वकील को सुन कर की है। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल, एजीए रूपक चौबे और पंकज सक्सेना ने 31 जुलाई 2025 के पुराने आदेश के अनुपालन के लिए कोर्ट से दो दिन का अतिरिक्त समय मांगा था।
सुप्रीम कोर्ट के दो ऐतिहासिक फैसलों का जिक्र किया
कोर्ट ने रिकार्ड का अवलोकन करते हुए कहा कि 31 जुलाई 2025 का आदेश अब भी प्रभावी है। इसे किसी भी अदालत द्वारा रोका नहीं गया है। कोर्ट ने कानून की स्थिति स्पष्ट करने के लिए सुप्रीम कोर्ट के दो निर्णयों का जिक्र करते हुए कहा कि इन फैसलों के आलोक में यह साफ है कि जब तक कोई आदेश कानूनी रूप से स्टे नहीं होता, उसका पालन किया जाना ही चाहिए। कोर्ट ने 17 जुलाई को हुई सुनवाई में राज्य सरकार के वकील के अनुरोध पर मामले को 20 जुलाई को सूचीबद्ध करने हुए कहा कि अगली तारीख तक आदेश के अनुपालन में राज्य द्वारा की गई कार्रवाई की रिपोर्ट हर हाल में रिकार्ड पर लाई जाए।
याचीगण ने डीएम को निर्देश देने की मांग की थी
याची अधिवक्ता के अनुसार, सरकार की तरफ से बताया गया था कि जिलाधिकारी (डीएम) ने 16 जुलाई को संपत्ति रिलीज किए जाने के संबंध में आदेश जारी कर दिया है। याचीगण ने हाई कोर्ट से जिलाधिकारी को यह निर्देश देने की मांग की थी कि विशेष न्यायाधीश, एमपी/एमएलए कोर्ट के 31 जुलाई 2025 के आदेश के अनुपालन में कुर्क लगभग 10 बीघे जमीन को मुक्त करने का आदेश पारित किया जाए। यह जमीनें गाजीपुर के तहसील मोहम्मदाबाद के मौजा माचा, धनेथा, नृसिंहपुर करैल और खरदीहा में हैं।