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    यूपी में असुरक्षित 3500 धरोहरों पर HC ने मांगा जवाब, राज्य सरकार को छह सप्ताह में शपथ पत्र दाखिल करने का निर्देश

    Updated: Wed, 27 May 2026 11:19 PM (IST)

    इलाहाबाद हाई कोर्ट ने उत्तर प्रदेश में 3,500 से अधिक असुरक्षित ऐतिहासिक और पुरातात्विक स्थलों के संरक्षण पर राज्य सरकार से जवाब मांगा है। कोर्ट ने सरक ...और पढ़ें

    असुरक्षित 3,500 धरोहरों पर हाई कोर्ट ने मांगा जवाब।

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    विधि संवाददाता, प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने प्रदेश में संरक्षण की दरकार वाले साढ़े तीन हजार से ज्यादा ऐतिहासिक और पुरातात्विक स्थलों के संबंध में राज्य सरकार से जवाब मांगा है। गाजियाबाद निवासी अधिवक्ता आकाश वशिष्ठ की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायमूर्ति अरुण भंसाली तथा न्यायमूर्ति क्षितिज शैलेंद्र की खंडपीठ ने कहा, धरोहरें धीरे-धीरे लुप्त हो रही हैं और इन्हें बचाना जरूरी है।

    अदालत ने राज्य सरकार को छह सप्ताह में हलफनामा दाखिल करने के लिए कहा है। मामले में अगली सुनवाई जुलाई के आखिरी सप्ताह में संभावित है। याची की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता संजय उपाध्याय, पवन कुमार तिवारी, ईशा कृष्ण, मनासी बचानी ने दलीलें रखीं।

    दावा किया कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) और राज्य पुरातत्व विभाग के रिकॉर्ड के मुताबिक 3,500 से ज्यादा ऐसे स्थल हैं जो चिन्हित तो हैं, लेकिन ‘असुरक्षित’ श्रेणी में हैं। इन्हें न तो कानूनी संरक्षण मिला है और न ही रखरखाव के लिए कोई बजट। अतिक्रमण, खुदाई और उपेक्षा के चलते कई प्राचीन मंदिर, मकबरे, किले और बौद्ध-जैन स्थल बर्बाद हो रहे हैं।

    खंडपीठ ने राज्य सरकार और एएसआई से पूछा कि इतनी बड़ी संख्या में धरोहरें असुरक्षित क्यों हैं? साथ ही केंद्र व राज्य सरकार को निर्देश दिया कि सभी असुरक्षित स्थलों की जिला वार सूची दें तथा इनके संरक्षण की योजना बताएं। कोर्ट को बताया गया कि 23 मार्च को जारी नोटिस पर कोई कार्रवाई नहीं की गई है।

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    याचिका दायर करने से पहले अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल कार्यालय और मुख्य स्थायी वकील को नोटिस तामील किए गए थे। प्रदेश सरकार, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) संस्कृति, पर्यटन और आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालयों तथा राष्ट्रीय स्मारक प्राधिकरण को प्रतिवादी बनाया गया है।

    अधिवक्ता पवन कुमार तिवारी के अनुसार इंडियन नेशनल ट्रस्ट फार आर्ट एंड कल्चरल हेरिटेज (इंटैक) की सूची के अनुसार प्रदेश में कुल 5416 ऐतिहासिक और पुरातात्विक स्थल हैं, लेकिन इनमें केवल 421 ही संरक्षित हैं।

    राज्य पुरातत्व विभाग ने 2011 के बाद से ऐसे असुरक्षित स्मारकों की पहचान और सूची तैयार करने का कोई ठोस प्रयास नहीं किया। कई जगह नए निर्माण हो गए हैं। चेतावनी संकेतक लगाने तथा हेरिटेज संरक्षण एवं विकास बोर्ड बनाने की मांग याचिका में की गई है।

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