इलाहाबाद HC ने कहा- आपदा या आपात स्थिति में कार्ययोजना के लिए SDRF-NDRF दें सुझाव, नोएडा में इंजीनियर की मौत मामला
इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने नोएडा में इंजीनियर की खाई में डूबने से हुई मौत पर SDRF, NDRF, पुलिस, प्रशासन और अग्निशमन विभाग से आपदा या आपात स्थिति में सम ...और पढ़ें

इलाहाबाद हाई कोर्ट की फाइल फोटो।
HighLights
पूछा- यदि ऐसी कोई सूचना मिलती है तो पूरी तरह तैयार होने में कितना समय लगेगा
नोएडा में पानी भरी खाई में कार समेत डूबने से इंजीनियर की मौत का मामला
विधि संवाददाता, जागरण, प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने नोएडा में एक इंजीनियर की पानी भरी खाई में कार समेत डूबने से हुई मौत के मामले में राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (एसडीआरएफ), राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ), पुलिस, नोएडा के स्थानीय प्रशासन और अग्निशमन विभाग से सुझाव मांगे हैं। कोर्ट ने कहा है कि एजेंसियां अपने प्रस्तावित सुझावों से अवगत कराएं, ताकि किसी भी आपदा या आपात स्थिति में निपटने के लिए समन्वय और बचाव के संबंध में स्वीकार्य कार्ययोजना तैयार की जा सके।
प्रकरण में अगली सुनवाई एक अप्रैल को होगी
हाई कोर्ट ने दोनों संस्थाओं, एनडीआरएफ व एसडीआरएफ के वकील से यह भी पूछा कि यदि उन्हें ऐसी कोई सूचना मिलती है तो पूरी तरह से तैयार होने में कम से कम कितना समय लगेगा? प्रकरण में अगली सुनवाई एक अप्रैल को होगी।
इंजीनियर की मौत मामले में जनहित याचिका पर सुनवाई
यह आदेश न्यायमूर्ति एमसी त्रिपाठी और न्यायमूर्ति कुणाल रवि सिंह की खंडपीठ ने पारित किया है। अदालत 27 वर्षीय इंजीनियर युवराज मेहता की मौत के मामले में हिमांशु जायसवाल की तरफ से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी। युवराज की मौत 15 /16 जनवरी 2026 को नोएडा के सेक्टर 150 स्थित अविकसित साइट पर पानी से भरी खाई में उनकी कार गिरने के बाद डूबने से हो गई थी।
यह आरोप लगाया गया है
आरोप है कि इंजीनियर जिस खाई में डूबा, वह बारिश के पानी के उचित निकास की व्यवस्था नहीं होने के कारण बन गई थी। यह साइट कई वर्षों से विजटाउन प्लानर्स के नियंत्रण में थी और अविकसित पड़ी थी। कोर्ट ने 17 मार्च को पारित आदेश में कहा था ‘हमने न्यू ओखला इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथारिटी (नोएडा) द्वारा दायर जवाबी हलफनामे का भी अवलोकन किया है।
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कमी दूर करने को क्या सुधारात्मक कदम उठाए गए?
यद्यपि इसमें छह फरवरी 2026 को विभिन्न दोषी बिल्डरों को नोटिस जारी कर तीन दिनों के भीतर कमियों को दूर करने का निर्देश है, लेकिन इस बात का कोई उल्लेख नहीं है कि उन कमियों को दूर करने के लिए वास्तव में क्या सुधारात्मक कदम उठाए गए? और क्या प्राधिकरण ने उन कदमों का सत्यापन किया था या नहीं।