हाई-स्पीड रेल से पहले पटरियों की जांच को 'सिंगल विंडो' व्यवस्था लागू, 200 किमी गति से दौड़ती ट्रेन यात्रियों की सुरक्षा का विशेष ख्याल
प्रयागराज रेलवे बोर्ड ने यात्री सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। अब रेलवे पटरियों की मजबूती और सुरक्षा जांच के लिए सिंगल वि ...और पढ़ें

रेलवे ट्रैक निरीक्षण के लिए सिंगल विंडो सिस्टम लागू की गई है।
HighLights
कंक्रीट स्लीपर और ट्रैक फिटिंग की गुणवत्ता की जांच की जिम्मेदारी केवल राइट्स लिमिटेड को
उत्तर मध्य रेलवे (एनसीआर) समेत सभी जोन में तत्काल प्रभाव से व्यवस्था के लिए बोर्ड ने भेजा पत्र
जागरण संवाददाता, प्रयागराज। यात्री जब 160 से 200 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ रही ट्रेन में बैठे होंगे, हाईस्पीड कारिडोर और बुलेट ट्रेन से चल रहे होंगे तो सबसे बड़ी जिम्मेदारी सुरक्षा की होगी। इसे देखते हुए रेलवे बोर्ड ने देश के हर कोने में रेल पटरियों की मजबूती और सुरक्षा जांच की 'सिंगल विंडो' व्यवस्था लागू कर दी है। अब रेलवे बोर्ड ने कंक्रीट स्लीपर (पटरियों के नीचे के पत्थर के खंभे) और ट्रैक फिटिंग (पटरियों को जोड़ने वाले उपकरण) की गुणवत्ता की जांच की जिम्मेदारी केवल एक ही संस्था राइट्स लिमिटेड को सौंपी है।
गुणवत्ता का प्रमाणपत्र राइट्स से ही लेना होगा
वर्तमान में वंदे भारत जैसी सेमी हाई-स्पीड ट्रेनों का जाल पूरे देश में बिछाया जा रहा है। तीसरी और चौथी लाइन बिछाई जा रही है, जिसके लिए पटरियों का बेहद मजबूत होना अनिवार्य है। बोर्ड का मानना है कि जब देश भर में एक ही मानक से सामान की जांच होगी तो पटरियों की फिटिंग में एकरूपता आएगी। अब चाहे कोई भी एजेंसी रेल प्रोजेक्ट पर काम करे उसे गुणवत्ता का प्रमाणपत्र राइट्स से ही लेना होगा, वरना वह सामान्य पटरियों पर इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा।
गुणवत्ता की कमी खत्म करने को 'सिंगल विंडो प्रणाली
अब तक रेलवे के विभिन्न निर्माण खंडों और सार्वजनिक उपक्रमों जैसे इरकान, आरवीएनएल और डीएफसीसीआइएल के पास गुणवत्ता जांच के लिए अलग-अलग व्यवस्थाएं थीं, इनमें शिकायतें मिलती थी। अगर स्लीपर, इलास्टिक रेल क्लिप (पटरी को पकड़ने वाला हुक) और रेल पैड की गुणवत्ता में जरा सी भी कमी आई तो 'रेल फ्रैक्चर' (पटरी का टूटना) तय है। इस 'क्वालिटी गैप' (गुणवत्ता की कमी) को खत्म करने के लिए अब 'सिंगल विंडो' (एकल व्यवस्था) जांच प्रणाली लागू कर दी गई है।
सभी बड़े प्रोजेक्ट्स पर तत्काल प्रभाव से लागू
रेलवे बोर्ड के कार्यकारी निदेशक (ट्रैक) अनुराग कुमार ने 17 मार्च को इसके लिए एनसीआर समेत सभी जोन को पत्र जारी कर दिया है। पटरियों का सामान केवल आरडीएसओ द्वारा अनुमोदित वेंडरों से लेने और नई रेल लाइन बिछाने, पुरानी लाइनों के दोहरीकरण और ट्रैक के नवीनीकरण जैसे सभी बड़े प्रोजेक्ट्स पर तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है।
खबरें और भी
क्या है राइट्स?
राइट्स लिमिटेड (रेल इंडिया टेक्निकल एंड इकोनामिक सर्विस) रेल मंत्रालय के अधीन एक 'नवरत्न' सरकारी कंपनी है। यह संस्था रेलवे और बुनियादी ढांचा क्षेत्र में तकनीकी परामर्श और इंजीनियरिंग का काम करती है। इसका मुख्य कार्य रेल पटरियों, डिब्बों और अन्य उपकरणों की गुणवत्ता जांच सुनिश्चित करना है ताकि रेल यात्रा सुरक्षित बनी रहे।