जनगणना ड्यूटी से नहीं बच सकेंगे LIC कर्मचारी, इलाहाबाद HC का सख्त आदेश; छूट देने की मांग वाली याचिका खारिज की
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) के कर्मचारियों को जनगणना कार्य से छूट देने की याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट ने कहा कि जनगणना अधिनियम ...और पढ़ें

इलाहाबाद हाई कोर्ट की फाइल फोटो।
HighLights
हाई कोर्ट ने कहा, किसी भी संस्थान के कर्मियों को जनगणना में लगाया जा सकता है कानून के तहत
एलआइसी के नॉर्थ सेंट्रल जोन के तृतीय और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के संघ ने दाखिल की थी याचिका
विधि संवाददाता, जागरण, प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआइसी) के कर्मचारियों को जनगणना कार्य से छूट देने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी है। न्यायमूर्ति दिनेश पाठक की एकल पीठ ने कहा है कि जनगणना अधिनियम, 1948 और जनगणना नियम, 1990 के तहत किसी भी संस्थान के कर्मचारियों को गणनाकर्ता (एन्यूमरेटर) या पर्यवेक्षक (सुपरवाइजर) के रूप में जनगणना कार्य में लगाया जा सकता है।
एलआइसी के संघ ने क्या तर्क दिया था?
यह याचिका एलआइसी के नॉर्थ सेंट्रल जोन के तृतीय और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के संघ ने दाखिल की थी। संघ का तर्क था कि जनगणना अधिनियम की धारा 4-ए के तहत केवल स्थानीय निकायों के कर्मचारियों को ही जनगणना कार्य के लिए लगाया जा सकता है और एलआइसी स्थानीय निकाय नहीं है।
केंद्र सरकार ने कोर्ट को क्या बताया?
केंद्र सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि अधिनियम की धारा 6 (1) (ई), धारा 7 (सी) और जनगणना नियम, 1990 के नियम-3 में फैक्ट्री, फर्म, व्यावसायिक प्रतिष्ठान और अन्य संस्थानों के कर्मचारियों को भी जनगणना कार्य में लगाने का प्रावधान है। एलआइसी वाणिज्यिक प्रतिष्ठान है, इसलिए उसके कर्मचारियों को यह जिम्मेदारी दी जा सकती है।
अदालत ने आदेश दिया
अदालत ने कहा कि नियम-3 में गणनाकर्ता के रूप में शिक्षक, लिपिक, अधिकारी या "कोई भी व्यक्ति" नियुक्त किए जाने का प्रावधान है। इसलिए एलआइसी कर्मचारियों को जनगणना कार्य सौंपना कानून के अनुरूप है। अदालत ने माना कि जनगणना राष्ट्रीय महत्व का कार्य है और अधिकृत अधिकारी द्वारा एलआइसी कर्मचारियों को एन्यूमरेटर या सुपरवाइजर नियुक्त करने में कोई कानूनी त्रुटि नहीं है।