लांस नायक पर राइफल तानने में बर्खास्त BSF कांस्टेबल को इलाहाबाद HC से नहीं मिली राहत, याचिका खारिज
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने लांस नायक पर राइफल तानने वाले बीएसएफ कांस्टेबल की बर्खास्तगी को बरकरार रखा है। कोर्ट ने पाया कि कांस्टेबल ने स्वयं अपना दोष स्वी ...और पढ़ें

इलाहाबाद हाई कोर्ट।
HighLights
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा कि याची स्वीकार कर चुका है दोष
याची ने बर्खास्तगी व 6 माह की सश्रम कारावास सजा को चुनौती दी थी
विधि संवाददाता, जागरण, प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) कांस्टेबल देवरिया निवासी देवेंद्र मिश्रा की बर्खास्तगी बरकरार रखते हुए उसकी याचिका खारिज कर दी है। याची ने अपनी बर्खास्तगी और छह महीने की सश्रम कारावास की सजा को चुनौती दी थी। यह आदेश न्यायमूर्ति अनीश कुमार गुप्ता की एकलपीठ ने दिया है।
कोर्ट ने पाया कि याची ने स्वयं अपना दोष स्वीकार किया था और आरोपों पर कोई आपत्ति नहीं जताई थी, इसलिए आदेश में कोई कानूनी खामी नहीं है। मुकदमे से जुड़े तथ्य यह हैं कि 10 मई 2001 को याची को उनकी प्लाटून के लांस नायक पवन कुमार ने बीओपी सावना पर ड्यूटी सौंपी थी। आरोपित है कि इसी दौरान याची ने अपनी राइफल उठाकर लांस नायक की ओर तान दी और उन्हें जान से मारने की धमकी दी।
इस घटना के बाद समरी कोर्ट मार्शल का आदेश दिया गया। 18 मई 2001 को हुए कोर्ट मार्शल में याची ने अपना गुनाह कुबूल कर लिया और गवाह पेश करने का अवसर भी ठुकरा दिया। इसके आधार पर देवेंद्र मिश्रा को छह महीने की सश्रम कारावास और सेवा से बर्खास्तगी की सजा सुनाई गई। दया याचिका भी 18 अक्टूबर 2001 को खारिज कर दी गई।
याची के वकील ने दलील दी कि सजा तय करने से पहले उन्हें सुनवाई का अवसर नहीं दिया गया, जो सुप्रीम कोर्ट के तुलसीराम पटेल मामले (1985) के विपरीत है। कांस्टेबल की मानसिक स्थिति ठीक नहीं थी, इसलिए दया याचिका स्वीकार होनी चाहिए थी।
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भारत सरकार के अधिवक्ता अरविंद गोस्वामी ने दिल्ली हाई कोर्ट के बृजेश कुमार सिंह मामले (2024) और सुप्रीम कोर्ट के भागीरथ चौधरी मामले (2026) के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि बीएसएफ अधिनियम 1968 की धारा 50 के तहत सिक्योरिटी फोर्स कोर्ट को एक साथ कई सजाएं देने का अधिकार है। साथ ही नियमावली, 1969 के नियम 22 के प्रावधान (ए) के अनुसार यदि बर्खास्तगी किसी दोषसिद्धि के आधार पर हो रही है तो अलग से सुनवाई की प्रक्रिया अनिवार्य नहीं है।