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    मकान मालिक निजी जरूरत के लिए किरायेदार से खाली करा सकता है दुकान, इलाहाबाद हाई कोर्ट का महत्वपूर्ण निर्णय

    By Sharad Dwivedi Edited By: Brijesh Srivastava
    Updated: Sun, 05 Apr 2026 06:58 PM (IST)

    इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा है कि मकान मालिक अपनी निजी जरूरत के लिए किरायेदार से दुकान खाली करा सकता है। कोर्ट ने रेंट कंट्रोल अथॉरिटी के बेदखली आदेश मे ...और पढ़ें

    इलाहाबाद हाई कोर्ट की फाइल फोटो।

    इलाहाबाद हाई कोर्ट की फाइल फोटो।

    HighLights

    1. हाई काेर्ट का रेंट अथारिटी के बेदखली आदेश पर हस्तक्षेप से इन्कार

    2. कानपुर नगर के गांधी नगर का मामला, अथारिटी ने बेदखली का आदेश दिया

    विधि संवाददाता, प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा है कि यदि मकान मालिक निजी जरूरत के कारण दुकान खाली कराना चाहता है तो उसकी वास्तविकता अथवा सदाशयता का परीक्षण नहीं किया जा सकता। मकान मालिक को केवल यह साबित करना होगा कि अपने इस्तेमाल के लिए उस जगह की उसे जरूरत है। चाहे मौजूदा रूप में या गिराकर।

    कोर्ट ने कहा

    हाई कोर्ट ने कहा कि किरायेदार यह नहीं कह सकता कि मकान मालिक के पास वैकल्पिक स्थान मौजूद हैं, इसलिए वह किरायेदारी समाप्त नहीं कर सकता। इसकी जांच नहीं की जा सकती कि जरूरत कितनी अधिक, जरूरी अथवा वास्तविक है। किरायेदार को दुकान खाली करनी होगी।

    कोर्ट ने बेदखली आदेश पर हस्तक्षेप से इन्कार कर दिया

    कोर्ट ने रेंट कंट्रोल अथारिटी व अधिकरण के याची किरायेदार की बेदखली आदेश पर हस्तक्षेप करने से इन्कार कर दिया। कहा कि आदेश किराया नियंत्रण कानून 2021 के अनुरूप है, इसमें कोई अवैधानिकता नहीं है। यह आदेश न्यायमूर्ति डाॅ. वाईके श्रीवास्तव ने श्यामपाल बनाम बीएस इंटरप्राइजेज केस को खारिज करते हुए दिया है।

    तुलनात्मक कठिनाई पर विचार नहीं किया जा सकता

    कोर्ट ने कहा नये कानून में जरूरत की सदाशयता या वास्तविकता को हटा दिया गया है। इसलिए तुलनात्मक कठिनाई पर विचार नहीं किया जा सकता। यह कानून बनाने वालों की चूक नहीं है। यह उनका इरादा दर्शाती है। मकसद न्यायिक निर्णय के दायरे को सीमित करना है। कोर्ट ने साफ किया कि अदालत कानून की व्याख्या के नाम पर उसमें (कानून में) छूटी बात छोड़ नहीं सकती। अदालत जैसा कानून है वैसा ही देखेगी, उसी दायरे में व्याख्या करेगी। जिसे कानून बनाने वाले ने नहीं जोड़ा। कानून सीधे सादे शब्दों में लागू किया जाना चाहिए। अदालत का अधिकार मकान मालिक की बताई गई जरूरत की पुष्टि करना भर है। वास्तविक जरूरत की जांच करना नहीं।

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    क्या है पूरा मामला?

    मामले के अनुसार कानपुर नगर के गांधी नगर में याची दुकान का किरायेदार और विपक्षी मकान मालिक हैं। मालिक ने निजी व्यवसाय बढ़ाने की जरूरत बताते हुए दुकान खाली करने की याची को नोटिस दी। रेंट अथारिटी के समक्ष दुकान खाली कराने की अर्जी दी। याची ने कहा मकान मालिक के पास अन्य स्थान उपलब्ध है जहां बिना पूरी दुकान खाली कराए वह गोदाम बना सकता है। इससे उसका जीवन यापन हो रहा। अथारिटी ने बेदखल करने का आदेश दिया। अपील भी खारिज हो गई।