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    Allahabad High Court ने कहा- 'संज्ञेय अपराध की सूचना मिलने पर FIR दर्ज करना अनिवार्य

    By Suresh pandey Edited By: Brijesh Srivastava
    Updated: Thu, 30 Jul 2026 08:29 PM (GMT+05:30)

    इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा है कि संज्ञेय अपराध की सूचना मिलने पर FIR दर्ज करना पुलिस का अनिवार्य कर्तव्य है। कोर्ट ने एससी/एसटी एक्ट के तहत एक छात्र ने ...और पढ़ें

    इलाहाबाद उच्च न्यायालय।

    इलाहाबाद उच्च न्यायालय।

    HighLights

    1. हाई कोर्ट में एससी एसटी एक्ट में एफआइआर दर्ज करने की मांग खारिज किए जाने वाला आदेश रद

    2. विशेष अदालत (एससी/एसटी एक्ट) ने अनुसूचित जाति से जुड़े आइसा छात्रनेता की मांग खारिज की थी

    विधि संवाददाता, जागरण, प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा है कि संज्ञेय अपराध की सूचना मिलने पर एफआईआर दर्ज करना पुलिस का अनिवार्य कर्तव्य है। यह टिप्पणी करते हुए न्यायमूर्ति जयप्रकाश तिवारी की एकलपीठ ने विशेष अदालत (एससी/एसटी एक्ट) के उस आदेश को रद कर दिया है, जिसमें अनुसूचित जाति से जुड़े आइसा छात्र नेता विवेक कुमार की शिकायत पर एफआइआर दर्ज कराने की मांग को ‘संदिग्ध’ बताकर खारिज कर दिया गया था।

    याची का आरोप 

    इलाहाबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय से हिंदी में स्नातकोत्तर और यूजीसी-नेट उत्तीर्ण याची आल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) की इलाहाबाद इकाई के अध्यक्ष रह चुके हैं। उनका आरोप है कि 17 अक्टूबर 2023 को विश्वविद्यालय के लाइब्रेरी गेट के बाहर छात्रों के शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान विश्वविद्यालय के चीफ प्राक्टर राकेश सिंह ने बिना किसी उकसावे जातिसूचक गालियों का प्रयोग किया और लाठी से उन पर हमला कर दिया।

    सीसीटीवी व मोबाइल फुटेज में घटना कैद बताया  

    बताया कि यह घटना मौके पर मौजूद सब-इंस्पेक्टर के सामने हुई और सीसीटीवी व मोबाइल फुटेज में भी कैद है। पुलिस द्वारा मेडिकल जांच नहीं कराए जाने पर वह खुद तेज बहादुर सप्रू अस्पताल गए और इलाज कराया। इसकी फोटो अखबारों में छपी है। घटना के दिन ही उन्होंने कर्नलगंज थाने में लिखित शिकायत दी। इसके बाद सेवानिवृत्त आइपीएस अधिकारी के साथ मिलकर उन्होंने एससी/एसटी एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज कराने के लिए दोबारा शिकायत दी, लेकिन पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। 

    आदेश को त्रुटिपूर्ण और गैर-तर्कसंगत करार दिया

    पुलिस आयुक्त सहित उच्च अधिकारियों को रजिस्टर्ड डाक से शिकायत भेजी, फिर भी एफआईआर दर्ज नहीं हुई। इसके बाद सीआरपीसी की धारा 156(3) के तहत विशेष न्यायाधीश, एससी/एसटी एक्ट, प्रयागराज की अदालत में आवेदन दिया, जिसे 18 फरवरी 2024 के आदेश से खारिज कर दिया गया। हाई कोर्ट ने संबंधित अदालत के आदेश को त्रुटिपूर्ण और गैर-तर्कसंगत करार दिया।

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    कोर्ट ने क्या कहा? 

    कोर्ट ने कहा, विशेष न्यायाधीश ने साक्ष्यों पर विचार किए बिना ही आवेदन खारिज कर दिया, जो न्यायिक मस्तिष्क के प्रयोग के अभाव को दर्शाता है। प्रकरण दोबारा विचार के लिए विशेष अदालत को भेजा गया है। एससी/एसटी एक्ट की धारा 4 के तहत कर्तव्य में लापरवाही बरतने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई पर भी विचार करने का निर्देश कोर्ट ने दिया है।

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