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    अब यूपी पुलिस की पोस्ट ने 'पंडित' शब्द विवाद को दिया तूल, दारोगा भर्ती परीक्षा में पूछे गए प्रश्न में इसका जिक्र था

    By Digital Desk Edited By: Brijesh Srivastava
    Updated: Sun, 15 Mar 2026 08:03 PM (IST)

    उत्तर प्रदेश पुलिस की दरोगा भर्ती परीक्षा के प्रश्न में पंडित शब्द को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। परीक्षा के प्रश्नपत्रों के विश्लेषण पर पुलिस ने रोक ...और पढ़ें

    दारोगा भर्ती परीक्षा के पूछे गए प्रश्न में आए पंडित शब्द को लेकर विवाद बढ़ रहा है।

    दारोगा भर्ती परीक्षा के पूछे गए प्रश्न में आए पंडित शब्द को लेकर विवाद बढ़ रहा है। 

    HighLights

    1. दारोगा भर्ती परीक्षा के प्रश्नपत्र विश्लेषण पर पुलिस का प्रतिबंध, अब विश्लेषण पर रोक से बढ़ा टकराव

    2. प्रतियोगी छात्र बोले- परंपरा है प्रश्नपत्रों का विश्लेषण, परीक्षा समाप्ति के बाद इसे रोकना तानाशाही

    राज्य ब्यूरो, जागरण, प्रयागराज। उत्तर प्रदेश पुलिस एवं प्रोन्नति बोर्ड की पुलिस उपनिरीक्षक (दारोगा) भर्ती परीक्षा में पूछे गए प्रश्न में 'पंडित' शब्द का विवाद थमा नहीं है और रविवार को यूपी पुलिस के संदेश ने इसको और भड़का दिया। उत्तर प्रदेश पुलिस ने इंटरनेट मीडिया प्लेटफार्म ‘एक्स’ पर एक संदेश जारी कर परीक्षा के प्रश्नपत्रों या उनके कंटेंट पर चर्चा, विश्लेषण अथवा प्रसार को प्रतिबंधित बताते हुए चेतावनी दी। 

    छात्रों की क्या है मांग?

    संदेश में कहा गया कि ऐसा करने पर उत्तर प्रदेश सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों का निवारण) अधिनियम, 2024 के तहत कठोर वैधानिक कार्रवाई की जा सकती है। इस संदेश को प्रतियोगी छात्र सीनाजोरी बताते हुए संदेश डिलीट करने की मांग कर रहे हैं।

    प्रश्न में ‘पंडित’ शब्द को लेकर विवाद जोरों पर 

    परीक्षा में आए एक बहुविकल्पीय प्रश्न में ‘अवसर के अनुसार बदलने वाला’ वाक्यांश का सही विकल्प पूछते हुए चार विकल्प पंडित, निष्कपट, सदाचारी और अवसरवादी दिए गए थे। प्रश्न में ‘पंडित’ शब्द को विकल्प के रूप में शामिल किए जाने को लेकर विवाद जोरों पर है। समाज के एक वर्ग की भावनाओं से जुड़ने के कारण प्रश्न विवादों में आया तो पुलिस ने संदेश जारी कर विश्लेषण पर प्रतिबंध लगा दिया। इसपर विवाद खड़ा हो गया।

    प्रतियोगी छात्र संघर्ष समिति के अध्यक्ष बोले...

    प्रतियोगी छात्रों ने कहा कि किसी भी भर्ती परीक्षा के प्रश्नों पर चर्चा और विश्लेषण प्रतियोगी संस्कृति का सामान्य हिस्सा है। प्रतियोगी छात्र संघर्ष समिति के अध्यक्ष अवनीश पांडेय कहते हैं कि परीक्षा हो गई। पेपर आउट नहीं हुआ तो फिर छात्रों को विश्लेषण से रोकना तानाशाही है। कई प्रतियोगी छात्र, कोचिंग संस्थान, शिक्षक प्लेटफार्म पर प्रश्नों का हल निकाकर कठिनाई, प्रश्नों की शुद्धता और पैटर्न का मूल्यांकन करते हैं। विश्लेषण से रोकने का अधिकार पुलिस को किसने दिया है। विज्ञापन की शर्तों में या कहीं निर्देश है कि परीक्षा समाप्त होने के बाद कोई पेपर हल नहीं करेगा। पुलिस को संदेश क्षमा मांगकर डिलीट करना चाहिए।

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    प्रतियोगी बोले- प्रश्नपत्रों के विश्लेषण पर रोक गलत

    प्रतियोगी छात्र संघर्ष समिति के मीडिया प्रभारी प्रशांत पांडेय का कहना है कि अब तक के इतिहास में किसी भी भर्ती बोर्ड या आयोग ने परीक्षा समाप्त होने के बाद प्रश्नपत्रों के विश्लेषण पर प्रतिबंध नहीं लगाया है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग, शिक्षा सेवा चयन आयोग सहित अन्य भर्ती परीक्षाओं में आए विवादित प्रश्नों पर हमेशा छात्रों ने आवाज उठाई है। यदि परीक्षा समाप्त होने के बाद पेपर का विश्लेषण ही प्रतिबंधित कर दिया जाएगा तो पारदर्शिता पर प्रश्नचिह्न खड़े होंगे।

    'उठे विवाद को गंभीरता से लिया जाना चाहिए'

    प्रशांत ने कहा कि ‘पंडित’ शब्द को लेकर उठे विवाद को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। यदि सरकार प्रश्न बनाने वाले जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं करती तो वे उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगे। समिति के प्रतिनिधियों का तर्क है कि इस प्रकार का प्रश्न करोड़ों लोगों की भावनाओं को आहत करता है और इसे संविधान के अनुच्छेद 15 की भावना के विरुद्ध बताया जा रहा है।