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    अस्पताल आए टीबी के वृद्ध मरीज अचानक गिर पड़े और बंद हो गई धड़कन, डॉक्टरों ने ऐसा क्या किया कि बच गई जान?

    By Amerdeep Bhatt Edited By: Brijesh Srivastava
    Updated: Sun, 15 Feb 2026 03:11 PM (GMT+05:30)

    प्रयागराज के काल्विन अस्पताल में टीबी के 70 वर्षीय मरीज प्यारेलाल ओपीडी में अचानक गिर पड़े, जिससे उनकी हृदय की धड़कन बंद हो गई। डॉक्टरों ने तुरंत सीपी ...और पढ़ें

    प्रयागराज के कॉल्विन अस्पताल में वृद्ध को सीपीआर देते चिकित्सक व अन्य। सौजन्य : अस्पताल प्रशासन

    प्रयागराज के कॉल्विन अस्पताल में वृद्ध को सीपीआर देते चिकित्सक व अन्य। सौजन्य : अस्पताल प्रशासन 

    HighLights

    1. प्रयागराज के काल्विन अस्पताल में संजीवनी बना सीपीआर

    2. ओपीडी में उपस्थित डाॅक्टरों के प्रयास से लौटी मरीज की सांस

    जागरण संवाददाता, प्रयागराज। ट्यूबरकुलोसिस यानी टीबी के 70 वर्षीय एक मरीज को मोतीलाल नेहरू मंडलीय चिकित्सालय 'काल्विन' में शनिवार को सीपीआर से 'संजीवनी' मिली। ओपीडी में आए वृद्ध अचानक गिर पड़े और हृदय की धड़कन बंद हो गई। डऍक्टरों की टीम उनकी जान बचाने में जुट गई।

    वृद्ध को डीसी शॉक भी दिया गया 

    करीब 40 मिनट तक बिना रुकावट सीपीआर (कार्डियकपल्मोनरी रिससिटेशन) करते रहने के अलावा डिफ्रेबिलेटर से उन्हें डीसी शॉक दिया गया। आखिर मरीज की सांस लौट आई और मानिटर पर रेखाएं ऊपर-नीचे चलती हुई दिखीं तो डाॅक्टरों ने खुशी जताई। इसके बाद उसे रेफर करके स्वरूपरानी नेहरू चिकित्सालय भेजा।

    ईसीजी में पता चला दिल की बंद है धड़कन 

    हिम्मतगंज के पास काला डांडा निवासी प्यारेलाल को खांसी आ रही थी, ओपीडी में डाॅक्टर ने दवा लिखी और जांच कराने का परामर्श दिया। कुछ सेकेंड ही बीते थे कि प्यारेलाल अचेत होकर वहीं गिर पड़े। इससे हड़बड़ी मच गई। फिजीशियन ने वहीं पर मरीज को सीपीआर देना शुरू कर दिया। ईसीजी हुई तो पता चला कि दिल की धड़कन बंद हो गई है।

    गंभी हार्ट अटैक मानकर दी गई सीपीआर

    गंभीर हार्ट अटैक मानकर डाॅक्टर व कर्मचारी सीपीआर देने लगे। सूचना दिए जाने पर इमरजेंसी कक्ष से डाॅ. केके मिश्रा, जूनियर रेजीडेंट महिमा, चेस्ट फिजीशियन डाॅ. मायादेवी समेत अन्य स्वास्थ्य कर्मी पहुंचे। मरीज को स्ट्रेचर से इमरजेंसी कक्ष पहुंचाया गया। वहां भी ईसीजी होने पर धड़कन बंद ही पाई गई। जान बचाने का प्रयास चल ही रहा था उस बीच प्रमुख चिकित्साधीक्षक डाॅ. एसके चौधरी ने फेफड़े तक आइवी लाइन डाली। साथ ही डीसी शॉक दिया गया।

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    लौटी सांस तो फिर जुटी टीम

    प्यारेलाल की सांस लौटी तो डाॅक्टरों की टीम का उत्साह और बढ़ गया। सभी फिर जुट गए और जान बचाने के लिए जीवन रक्षक दवा दी गई। कई अन्य मशीनों का उपयोग किया गया। प्यारेलाल की पुत्रवधू कल्पना केसरवानी ने बताया कि स्वरूपरानी नेहरू चिकित्सालय में उपचार हो रहा है, हालत नाजुक बनी है।

    क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

    कॉल्विन अस्पताल के प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डॉ एसके चौधरी का कहना है कि दो बार तो ऐसा लगा कि मरीज अब नहीं रहा लेकिन प्रयास में कोई कमी नहीं की गई। डाक्टर सीपीआर लगातार देते रहे। इमरजेंसी कक्ष में जीवन रक्षक उपकरण समेत दवाओं की उपलब्धता रखी गई है, सभी चीजों का इस्तेमाल हुआ। मरीज की हालत में कुछ सुधार आता देख रेफर किया गया।

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