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    बुलेट ट्रेन से सुबह आफिस जाएं, रात में आ जाएं घर, दिल्ली-प्रयागराज-वाराणसी के बीच शुरू होगा रफ्तार का नया अध्याय

    By Digital Desk Edited By: Brijesh Srivastava
    Updated: Mon, 02 Feb 2026 09:27 PM (IST)

    दिल्ली, प्रयागराज और वाराणसी के बीच बुलेट ट्रेन का नया कॉरिडोर बनेगा। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि इससे इन शहरों के बीच यात्रा आसान हो जाएगी, ...और पढ़ें

    केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव की वर्चुअल प्रेस कांफ्रेंस में शामिल प्रयागराज मंडल के अधिकारी। सौजन्य : रेलवे

    केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव की वर्चुअल प्रेस कांफ्रेंस में शामिल प्रयागराज मंडल के अधिकारी। सौजन्य : रेलवे 

    HighLights

    1. आने वाले समय में दिल्ली से प्रयागराज या वाराणसी की दूरी रोजमर्रा के आवागमन जैसी होगी

    2. पांच वर्ष का तय किया गया लक्ष्य, अब बनेगा डीपीआर, इसके बाद किया जाएगा सर्वे

    3. केंद्रीय रेल मंत्री ने वर्चुअल प्रेस कांफ्रेंस में प्रयागराज डीआरएम कार्यालय में साझा कीं ये बातें

    जागरण संवाददाता, प्रयागराज। आने वाले समय में दिल्ली से प्रयागराज या वाराणसी की दूरी महज एक लंबी यात्रा नहीं, बल्कि रोजमर्रा के आवागमन जैसी बन जाएगी। कल्पना कीजिए कि आप सुबह दिल्ली से बुलेट ट्रेन पकड़ें, प्रयागराज या वाराणसी स्थित अपने आफिस या फैक्ट्री में काम निपटाएं और शाम होते-होते वापस दिल्ली अपने घर लौट आएं। यह महत्वाकांक्षी सपना अब धरातल पर उतरने को तैयार है। यह बातें केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने सोमवार को वर्चुअल प्रेस कांफ्रेंस के दौरान प्रयागराज डीआरएम कार्यालय में साझा की।

    उन्होंने कहा कि ऐसा देखा जाता है कि लोग उन स्थानों पर रहना पसंद करते हैं जो हेल्थ केयर सेंटर हो, शिक्षा का हब हो, पर्याटन का केंद्र और सभी सुविधाएं भी मिल जाएं। मान लीजिए की दिल्ली से कोई व्यक्ति अपनी फैक्ट्री इस इकोनामिक कारिडोर में लगाता है और वह दिल्ली से आवागमन करना चाहता है तो वह प्रतिदिन आवागमन कर सकेगा। बनारस और प्रयागराज भी इसी तरह विभिन्न आयाम के हब होंगे।

    रेलमंत्री ने बताया कि दिल्ली से वाया प्रयागराज होते हुए वाराणसी तक एक नया इकोनामिक कारिडोर विकसित किया जाएगा, जिससे इन शहरों के बीच पहुंचना इतना आसान हो जाएगा जैसे आज दिल्ली से एनसीआर के इलाकों में कार से जाना लगता है।

    इस परियोजना के तहत कारिडोर के किनारे बड़ी कंपनियां और उद्योग धंधे विकसित किए जाएंगे। यह उन उद्यमियों और पेशेवरों के लिए क्रांतिकारी बदलाव होगा जो दिल्ली में रहकर इस कारिडोर में अपनी फैक्ट्री या व्यापार संचालित करना चाहते हैं। वर्तमान में दिल्ली से प्रयागराज पहुंचने में जो आठ घंटे का समय लगता है, वह हाई-स्पीड रेल की बदौलत सिमटकर मात्र पौने चार घंटे के करीब रह जाएगा। यह तीव्र गति न केवल आम यात्रियों को राहत देगी, बल्कि कुंभ और माघ मेले जैसे विशाल आयोजनों के दौरान बुनियादी ढांचे पर पड़ने वाले अतिरिक्त दबाव को भी संतुलित करने में गेम-चेंजर साबित होगी।

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    प्रयागराज की पहचान अब केवल आध्यात्मिक केंद्र के रूप में ही नहीं, बल्कि एक आधुनिक हाई-स्पीड ट्रांसपोर्ट हब के रूप में भी होगी। केंद्रीय बजट में उत्तर प्रदेश को मिले 20,012 करोड़ रुपये के भारी-भरकम निवेश से यह बदलाव होगा। अब कारिडोर के लिए डीपीआर बनेगा। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने स्पष्ट किया है कि दिल्ली-वाराणसी और वाराणसी-सिलीगुड़ी प्रोजेक्ट सरकार की प्राथमिकता में हैं। सबसे खास बात यह है कि बुलेट ट्रेन का किराया मध्यम और निम्न वर्ग की जरूरतों को ध्यान में रखकर तय किया जाएगा, ताकि यह हर खास-ओ-आम के लिए सुलभ हो।

    अगले पांच साल के लक्ष्य के साथ बढ़ रही यह परियोजना प्रयागराज को पटना और सिलीगुड़ी जैसे शहरों से और भी मजबूती से जोड़ देगी। यह निवेश क्षेत्र के पर्यटन, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार में नई जान फूंकेगा। रफ्तार का यह नया युग प्रयागराज और वाराणसी को विकास की एक ऐसी ऊंचाई पर ले जाएगा, जहां से उत्तर प्रदेश की प्रगति का रास्ता और भी उज्ज्वल नजर आता है।