भारतीय रेल जापानी अचूक सुरक्षा से लैस होगी, शहरी रेल व्यवस्था बदलने के लिए टोक्यो में मैनेजमेंट के गुर सीखेंगे रेल अधिकारी
भारतीय रेलवे बोर्ड अपने अधिकारियों को जापान भेजकर शहरी रेलवे प्रबंधन के हाईटेक गुर सिखाएगा। यह प्रशिक्षण 11 नवंबर से 8 दिसंबर 2026 तक चलेगा, जिसका उद् ...और पढ़ें

भारतीयय रेलवे के अधिकारी शहरी रेल प्रबंधन के लिए जापान में प्रशिक्षण लेंगे।
HighLights
30 जून तक अधिकारियों को करना होगा आवेदन
11 नवंबर से आठ दिसंबर तक चलेगा प्रशिक्षण
मेट्रो व रैपिड रेल सफर आने वाले दिनों में बदलेगा
जागरण संवाददाता, प्रयागराज। देश के बड़े शहरों में मेट्रो और रैपिड रेल का सफर आने वाले दिनों में पूरी तरह बदलने वाला है। भारतीय रेल को जापानी सटीकता, अचूक सुरक्षा और अत्याधुनिक मैनेजमेंट से लैस करने के लिए रेलवे अपने अधिकारियों को सीधे जापान भेजकर वहां के 'शहरी रेलवे प्रबंधन' के हाईटेक गुर सिखाने जा रहा है। इसके लिए रेलवे बोर्ड ने एनसीआर समेत सभी जोन के अधिकारियों से आवेदन मांगा है।
प्रयागराज जैसे शहर में मेट्रो शुरू करने की तैयारी
यह वैश्विक प्रशिक्षण 11 नवंबर से आठ दिसंबर 2026 तक जापान में होगा। प्रयागराज जैसे शहर जहां मेट्रो की नींव रखी जानी है, वहां इस जापानी महारत के जरिए परियोजना को पूरी सटीकता व आधुनिक रणनीति के साथ जमीन पर उतारा जा सकेगा।
जापान में सेकेंड के हिसाब से चलती है ट्रेनें
जापान में ट्रेनें मिनट नहीं, बल्कि सेकंड के हिसाब से चलती हैं और एडवांस ट्रैक सेंसर्स की बदौलत सालभर में औसतन महज 20-30 सेकंड ही लेट होती हैं। जब भारतीय रेल के अधिकारी अध्ययन करके लौटेंगे, तो यहां भी रेल प्रोजेक्ट्स को उसी अनुरूप ढालेंगे।
भूकंप की आहट पर ट्रेन स्वतः रुक जाती हैं
जापान के प्लेटफार्म पर कांच के दरवाजे और प्लेटफार्म पर सटीक निशान के कारण लाखों की भीड़ भी बिना धक्का-मुक्की के कतारबद्ध चलती है और 'आटोमैटिक ट्रेन कंट्रोल' (एटीसी) ट्रेन दुर्घटना तो दूर भूकंप की आहट पर भी ट्रेनों को स्वतः रोक देता है। भारतीय अधिकारी वहां स्टेशनों के उस बेहतरीन इंफ्रास्ट्रक्चर को भी समझेंगे जहां एक ट्रेन से उतरते ही चंद कदमों पर दूसरी कनेक्टिंग ट्रेन तैयार मिलती है।
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रेलवे बोर्ड ने सभी जोन को भेजा पत्र
रेलवे बोर्ड के संयुक्त निदेशक (ट्रेनिंग) जितेंद्र कुमार ने इसके लिए 25 मई को सभी जोन को पत्र भेजकर अधिकारियों को भेजने को कहा है। उत्तर मध्य रेलवे के सीपीआरओ शशिकांत त्रिपाठी ने बताया कि इस बेहद अहम और दूरगामी प्रशिक्षण कार्यक्रम के लिए 30 जून तक आवेदन स्वीकार किए जाएंगे।