Indian Railways : अब 'गुड्स ट्रेन मैनेजर' बनना नहीं होगा आसान, रेलवे ने बदल दी भर्ती और प्रमोशन की पूरी प्रक्रिया
भारतीय रेलवे ने गुड्स ट्रेन मैनेजर की भर्ती प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया है। अब इस पद के लिए शैक्षणिक योग्यता और प्रशिक्षण अनिवार्य होगा। रेलवे ने 60% ...और पढ़ें

भारतीय रेलवे ने मालगाड़ी प्रबंधक भर्ती प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया है। जागरण आर्काइव
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इस पद पर पहुंचने को अनुभव ही नहीं, बल्कि शैक्षणिक योग्यता और कड़ा प्रशिक्षण भी जरूरी होग।
19 जनवरी 2026 को नियम संग्रह 'इंडियन रेलवे एस्टेब्लिशमेंट मैनुअल' (आइआरईएम) मे बदलाव
अमरीश मनीष शुक्ल, प्रयागराज। भारतीय रेलवे ने 19 जनवरी 2026 को अपने नियम संग्रह 'इंडियन रेलवे एस्टेब्लिशमेंट मैनुअल' (आइआरईएम) में एक बड़ा बदलाव किया है। यह बदलाव रेलवे के उन कर्मचारियों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है, जो 'गुड्स ट्रेन मैनेजर' (जिसे पहले गुड्स गार्ड कहा जाता था) बनने का सपना देख रहे हैं। रेलवे बोर्ड के जारी किए गए नए दिशा-निर्देशों ने अब यह साफ कर दिया है कि इस पद पर पहुंचने के लिए केवल अनुभव ही नहीं, बल्कि शैक्षणिक योग्यता और कड़ा प्रशिक्षण भी जरूरी होगा।
क्यों खास है यह बदलाव?
आसान शब्दों में कहें तो रेलवे अब अपने परिचालन विभाग को और अधिक पेशेवर बनाना चाहता है। गुड्स ट्रेन मैनेजर (लेवल-पांच) का पद रेल सुरक्षा और संचालन में रीढ़ की हड्डी माना जाता है। इसलिए, भर्ती प्रक्रिया को इस तरह से तैयार किया गया है कि अनुभवी कर्मचारियों के साथ-साथ शिक्षित और युवा प्रतिभाओं को भी आगे बढ़ने का मौका मिले। इस नए नियम में सबसे ज्यादा जोर तीन वर्ष की अनिवार्य सेवा और ग्रेजुएशन की डिग्री पर दिया गया है।
भर्ती के तीन मुख्य रास्ते, पहला यह है
रेलवे ने पदों को भरने के लिए तीन दरवाजे खोले हैं। पहला रास्ता 60 प्रतिशत विभागीय कोटे का है। यह उन कर्मचारियों के लिए है जो पहले से ही निचले पदों पर काम कर रहे हैं। इनमें ट्रेन क्लर्क, टिकट कलेक्टर, पॉइंट्समैन, केबिनमैन और शंटमैन जैसे पद शामिल हैं। अगर कोई कर्मचारी लेवल-दो से लेवल-4 के बीच काम कर रहा है और उसने रेलवे को अपने जीवन के तीन साल दे दिए हैं यानी नौकरी करते हुए तीन साल हो गए हैं तो वह 'सामान्य चयन' प्रक्रिया के जरिए इस पद पर प्रमोट हो सकता है।
भर्ती का दूसरा रास्ता
दूसरा रास्ता 15 प्रतितशत एलडीसीई (विभागीय प्रतियोगी परीक्षा) का है। यह उन कर्मचारियों के लिए एक सुनहरा मौका है जो पढ़ाई-लिखाई में तेज हैं। इसके लिए कर्मचारी के पास स्नातक की डिग्री होनी चाहिए। इसमें आपरेटिंग और कमर्शियल विभाग के वे कर्मचारी भी शामिल हो सकते हैं जो लेवल-वन (ग्रुप-डी) में काम कर रहे हैं, बशर्ते उनकी तीन साल की सर्विस पूरी हो चुकी हो। इसके लिए आयु सीमा 40 वर्ष तय की गई है, जिसमें आरक्षित वर्गों को नियमानुसार छूट दी जाएगी।
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तीसरा तरीका भी जान लें
तीसरा रास्ता 25 प्रतिशत सीधी भर्ती का है। यह रास्ता उन युवाओं के लिए है जो अभी रेलवे का हिस्सा नहीं हैं। रेलवे भर्ती बोर्ड (आरआरबी) के माध्यम से सीधी भर्ती से स्नातक पास युवाओं को सीधा 'गुड्स ट्रेन मैनेजर' बनने का मौका मिलेगा।
अगर पद खाली रह जाएं तो क्या होगा?
रेलवे ने इस बार रिक्तियों को भरने के लिए एक बहुत ही स्पष्ट नीति अपनाई है। अगर 60 प्रतिशत वाले कोटे में योग्य कर्मचारी नहीं मिलते, तो उन खाली सीटों को बेकार नहीं जाने दिया जाएगा, बल्कि उन्हें 15 प्रतिशत वाले परीक्षा कोटे (एलडीसीई) में जोड़ दिया जाएगा। अगर वहां भी उम्मीदवार कम पड़ते हैं, तो अंत में इन पदों को जीडीसीई के जरिए भरा जाएगा। जीडीसीई एक ऐसी परीक्षा है जिसमें रेलवे के किसी भी विभाग का कर्मचारी अपनी किस्मत आजमा सकता है।
लेवल-पांच से लेवल-तक तक का सफर
एक बार जब कोई कर्मचारी गुड्स ट्रेन मैनेजर बन जाता है, तो उसके आगे बढ़ने के रास्ते भी तय कर दिए गए हैं। प्रमोशन के लिए तीन प्रमुख श्रेणियां बनाई गई हैं। सबसे पहले आता है 'सीनियर गुड्स ट्रेन मैनेजर' का पद, जो पूरी तरह आपकी सीनियरिटी यानी वरिष्ठता के आधार पर मिलता है। इसके बाद 'सीनियर पैसेंजर ट्रेन मैनेजर' और 'मेल/एक्सप्रेस ट्रेन मैनेजर' के उच्च पद आते हैं। इन पदों के लिए केवल सीनियरिटी काफी नहीं है, बल्कि आपके काम का रिकार्ड और आपकी योग्यता को भी परखा जाएगा।
ट्रेनिंग है सबसे जरूरी शर्त
इस नए नियम की सबसे बड़ी बात यह है कि ऊंचे पदों (लेवल-छह) पर जाने के लिए ट्रेनिंग को अनिवार्य कर दिया गया है। प्रमोशन से पहले कर्मचारी को एक खास ट्रेनिंग कोर्स करना होगा और उसके बाद एक लिखित परीक्षा पास करनी होगी। यदि कोई कर्मचारी इस परीक्षा या ट्रेनिंग में फेल होता है, तो उसे ऊपर के पद पर प्रमोट नहीं किया जाएगा। यह सुनिश्चित करता है कि एक्सप्रेस ट्रेनों की जिम्मेदारी केवल सबसे योग्य हाथों में ही हो।
आसान भाषा से सबकुछ समझें
रेलवे का यह नया कदम कर्मचारियों के लिए जहां करियर के नए रास्ते खोलता है, वहीं उन्हें खुद को अपडेट रखने की चुनौती भी देता है। ग्रेजुएशन की शर्त और ट्रेनिंग की अनिवार्यता यह बताती है कि भविष्य में भारतीय रेल का संचालन और भी सुरक्षित और आधुनिक होने वाला है। अब कर्मचारियों को केवल वर्षों की नौकरी के भरोसे नहीं, बल्कि अपनी काबिलियत और पढ़ाई के दम पर आगे बढ़ना होगा।