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    रेलवे स्टेशन पर कचरा फेंका और पकड़े गए तो आपको झाड़ू लगाना पड़ेगा, रेलवे ने अपराध की सजा का बदला तरीका

    By Digital Desk Edited By: Brijesh Srivastava
    Updated: Mon, 20 Apr 2026 12:43 PM (IST)

    रेलवे ने स्टेशनों पर गंदगी फैलाने या हुड़दंग मचाने वालों के लिए नए नियम लागू किए हैं। अब ऐसे अपराधों के लिए जेल की बजाय सामुदायिक सेवा, जैसे स्टेशन की ...और पढ़ें

    प्रयागराज जंक्शन।

    प्रयागराज जंक्शन।

    HighLights

    1. रेलवे स्टेशनों पर हुड़दंग मचाने वाले भी सावधान हो जाएं

    2. कचरा फेंकने व हुड़दंग करने वालों के खिलाफ ऐसी मिलेगी सजा

    जागरण संवाददाता, प्रयागराज। अब स्टेशन पर कचरा फैलाना या हुड़दंग मचाना आपकी जेब ही नहीं, बल्कि आपकी 'साख' पर भी भारी पड़ेगा! क्या आप इमेजिन कर सकते हैं कि स्टेशन परिसर में गंदगी फैलाते पकड़े जाने पर आपको वहां झाड़ू पकड़कर सफाई करते हुए देखा जाएगा? जी हां, भारतीय रेलवे ने अब अपराध की सजा का तरीका पूरी तरह बदल दिया है।

    रेलवे के नियमों में बड़ा बदलाव

    भारतीय रेलवे ने अपने नियमों में एक बड़ा बदलाव किया है। 'जन विश्वास 2.0 संशोधन विधेयक 2026' के लागू होते ही रेलवे ने अपनी दंड प्रणाली में एक ऐसा बदलाव किया है, जो न केवल सख्त है, बल्कि रचनात्मक भी है। अब छोटे-मोटे अपराधों के लिए जेल की सलाखों के पीछे जाने के बजाय, आपको सार्वजनिक रूप से स्टेशन की सफाई करते हुए देखा जा सकता है।

    नया कानून आ गया है

    भारतीय रेलवे ने अपने नियमों में एक बड़ा और क्रांतिकारी बदलाव किया है। अब रेलवे स्टेशन पर उपद्रव मचाना, गंदगी फैलाना या अनुशासनहीनता करना यात्रियों को भारी पड़ सकता है। 'जन विश्वास 2.0 संशोधन विधेयक 2026' के लागू होते ही रेलवे ने अपनी दंड प्रणाली में एक ऐसा बदलाव किया है, जो न केवल सख्त है, बल्कि रचनात्मक भी है। अब छोटे-मोटे अपराधों के लिए जेल की सलाखों के पीछे जाने के बजाय, आपको सार्वजनिक रूप से स्टेशन की सफाई करते हुए देखा जा सकता है।

    जेल नहीं, अब 'कम्युनिटी सर्विस' का दौर

    रेलवे प्रशासन का मानना है कि छोटे अपराधों के लिए यात्रियों को जेल भेजने से सिस्टम पर अनावश्यक बोझ पड़ता है। इसी को ध्यान में रखते हुए, अब 'जेल की जगह जुर्माना और कम्युनिटी सर्विस' (सामुदायिक सेवा) का नया प्रावधान लाया गया है।

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    सफाई ही सजा

    यदि कोई यात्री स्टेशन पर हंगामा करता है या गंदगी फैलाता है, तो उसे जुर्माने के साथ-साथ सफाई जैसे कार्यों में हाथ बटाना पड़ सकता है।
    उद्देश्य : इस अनूठी पहल का मुख्य उद्देश्य यात्रियों के व्यवहार में सुधार लाना और उन्हें उनकी जिम्मेदारी का अहसास कराना है।

    बढ़ गए जुर्माने

    केवल सेवा ही नहीं, रेलवे ने अपनी दंड राशि में भी भारी बढ़ोतरी की है। विशेष रूप से अवैध वेंडिंग (बिना अनुमति सामान बेचना) पर नकेल कसने के लिए रेलवे ने कड़ा रुख अपनाया है।
    पहली बार पकड़े जाने पर 2,000 रुपये का भारी जुर्माना लगेगा। दोबारा पकड़े जाने पर यह जुर्माना बढ़कर 5,000 रुपये तक हो जाएगा।

    अन्य अपराध पर जुर्माना

    रेलवे लाइन पार करना, महिलाओं के डिब्बे में अनाधिकृत प्रवेश और नशा करने जैसे अपराधों के लिए भी अब जुर्माने की राशि में वृद्धि की गई है।

    अभी स्पष्टता का इंतजार

    हालांकि ये नियम 8 अप्रैल से राजपत्र (गजट) में अधिसूचित होने के बाद आधिकारिक रूप से लागू हो चुके हैं, लेकिन ज़मीनी स्तर पर इसे लेकर अभी भी कुछ सवाल बरकरार हैं। रेलवे सुरक्षा बल के अधिकारियों का कहना है कि इन प्रावधानों को पूरी तरह से लागू करने के लिए अभी विस्तृत 'रूल्स' या नियमावली आने का इंतज़ार है। फिलहाल, अभी भी पकड़े गए आरोपियों को मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया जा रहा है, क्योंकि जुर्माना वसूलने की प्रक्रिया के स्पष्ट तौर-तरीके अभी तय किए जा रहे हैं।

    रेलवे के सफर में बदलाव की बयार

    सफाई और जुर्माने के सख्त नियमों के साथ-साथ, रेलवे ने यात्रियों के सफर को आरामदायक बनाने के लिए एक और बड़ा कदम उठाया है। अब देश के किसी भी कोने में यात्रा करें, आपको मिलने वाले बेडरॉल किट की गुणवत्ता एक समान होगी।

    'एक देश, एक तकिया' की नीति

    अक्सर यात्रियों की शिकायत होती थी कि अलग-अलग जोन में मिलने वाले बेडरॉल की गुणवत्ता में भारी अंतर होता है। किसी जगह तकिया बहुत नरम होता था, तो किसी जगह काफी सख्त या पुराना। रेलवे बोर्ड ने अब इस असंतुलन को खत्म करने के लिए भारतीय मानक ब्यूरो के नए मानकों को अनिवार्य कर दिया है। अब पूरे भारत में सभी ज़ोनल रेलवे को आईएस 18930:2024 के मानकों के अनुरूप ही तकियों की खरीद करनी होगी।

    क्या होगा बदलाव?

    अब तक अलग-अलग जोन अपने अनुसार तकिए खरीदते थे, जिससे उनके आकार, वज़न और भरने वाली सामग्री में अंतर होता था। नए नियम से अब देश के हर यात्री को एक समान गुणवत्ता का तकिया मिलेगा। एनसीआर (उत्तर मध्य रेलवे) के सीपीआरओ शशिकांत त्रिपाठी ने स्पष्ट किया है कि बोर्ड के निर्देशों का पालन करते हुए अब तकियों की खरीद में केवल स्वीकृत मानकों का ही ध्यान रखा जाएगा।

    यात्रियों को मिलेगा बेहतर अनुभव

    रेलवे का यह कदम दर्शाता है कि वह केवल सुरक्षा और नियमों पर ही नहीं, बल्कि यात्री सुविधाओं पर भी विशेष ध्यान दे रहा है। 'एक मानक, एक उत्पाद' की नीति से न केवल खरीदारी में पारदर्शिता आएगी, बल्कि यात्रियों को पूरे सफर के दौरान एक जैसा आरामदायक अनुभव प्राप्त होगा। अब जब भी आप लंबी दूरी की ट्रेन का सफर करेंगे, तो रेलवे का नया तकिया आपके सफर की थकान को कम करने में आपकी मदद करेगा। भारतीय रेलवे का यह 'सफाई और सुधार' का मिशन निश्चित रूप से आने वाले समय में रेल यात्रा के अनुभव को और भी सुखद बनाएगा।

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