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    क्या आप भी मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे हैं? प्रयागराज मनोविज्ञानशाला की हेल्पलाइन पर कॉल कर तत्काल पाएं समाधान

    By Amlendu Tripathi Edited By: Brijesh Srivastava
    Updated: Fri, 10 Jul 2026 02:39 PM (IST)

    प्रयागराज के मनोविज्ञानशाला ने खराब जीवनशैली और कॅरिअर के दबाव से उपजे मानसिक रोगों के लिए हेल्पलाइन नंबर 18001805311 जारी किया है। यह हेल्पलाइन सोमवा ...और पढ़ें

    मानसिक परेशान लोगों की समस्या के समाधान को मनोविज्ञानशाला ने हेल्पलाइन नंबर जारी किया है।

    मानसिक परेशान लोगों की समस्या के समाधान को मनोविज्ञानशाला ने हेल्पलाइन नंबर जारी किया है।

    HighLights

    1. प्रयागराज के मनोविज्ञानशाला ने हेल्पलाइन नंबर 18001805311 जारी किया

    2. सोमवार से शुक्रवार तक दिन में 11 से शाम पांच बजे तक कर सकते हैं फोन

    जागरण संवाददाता, प्रयागराज। व्यस्त दिनचर्या, कॅरिअर व परिवार का दबाव, एक-दूसरे से आगे निकलने की प्रतिस्पर्धा लोगों को मानसिक रूप से बीमार बना रही है। किशोर व युवाओं में यह समस्या अधिक नजर आ रही है। इसकी वजह से चिंता (एंग्जायटी), अवसाद (डिप्रेशन), तनाव और अकले में रहने की आदत तेजी से बढ़ी है।

    कॅरिअर, दिनचर्या, जीवनशैली में सुधार को टिप्स 

    इन समस्याओं का इलाज ढूंढने के लिए इन दिनों बड़ी संख्या में लोग मनोविज्ञानशाला पहुंच रहे हैं। यहां कॅरिअर संबंधी सुझाव और दिनचर्या, जीवनशैली में सुधार के लिए भी तौर तरीके बताए जा रहे हैं। समस्याओं से निदान के लिए अलग अलग तरह के अभ्यास भी कराए जा रहे हैं।

    हेल्पलाइन नंबर पर कॉल करें और समाधान पाएं 

    संस्थान की ओर से हेल्पलाइन नंबर 18001805311 जारी किया गया है। सोमवार से शुक्रवार तक पूर्वाह्न 11 बजे से शाम पांच बजे तक इस कोई भी व्यक्ति इस हेल्पलाइन नंबर पर कॉल करके अपनी समस्या साझा करके इसका समाधान भी प्राप्त कर सकता है। 

    सामाजिक संकोच और जागरूकता की कमी

    मनोविज्ञानी डॉ. राजकुमार राय कहते हैं कि 20 से 25 लोग प्रतिदिन अपनी समस्याओं के समाधान और काउंसिलिंग के लिए आ रहे हैं। कुछ लोग सामाजिक संकोच और जागरूकता की कमी से समस्याओं को साझा नहीं कर पाते। इसका असर उनके व्यक्तिगत जीवन, पढ़ाई, नौकरी और पारिवारिक संबंधों पर भी पड़ता है।

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    प्रशिक्षित मनोवैज्ञानिकों और काउंसलरों की मदद लें 

    उन्होंने कहा कि यदि समय से प्रशिक्षित मनोवैज्ञानिकों और काउंसलरों की सहायता ली जाए तो तनाव कम करने और सकारात्मक सोच विकसित करने में मदद मिलेगी। इसके लिए एक दूसरे की भावनाओं को भी समझना जरूरी है। शैक्षणिक संस्थानों और विभिन्न सामाजिक संगठनों की ओर से समय-समय पर मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम, कार्यशालाएं और निश्शुल्क काउंसिलिंग शिविर आयोजित किए जाते हैं। मनोविज्ञानशाला की ओर से भी यह आयोजन होता है।

    इन लक्षणों को नजरअंदाज कतई न करें

    बताया कि स्कूलों में बच्चों से संवाद कार्यक्रम कराए जाते हैं। इनमें विशेषज्ञ मानसिक स्वास्थ्य के महत्व, तनाव प्रबंधन और समय पर सहायता लेने के लिए प्रेरित करते हैं। मानसिक स्वास्थ्य भी शारीरिक स्वास्थ्य जितना महत्वपूर्ण है। यदि किसी व्यक्ति में लगातार उदासी, बेचैनी, नींद की समस्या, निराशा या आत्मविश्वास में कमी जैसे लक्षण दिखाई दें, तो उन्हें नजरअंदाज करना ठीक नहीं। तुरंत परामर्श लेना चाहिए।

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