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नदी के पुलों पर नहीं थमेगी वंदे भारत-राजधानी ट्रेनों की रफ्तार, रेलवे हाई टेक तकनीक का लेगा सहारा; सफर होगा आरामदायक

By Digital Desk Edited By: Brijesh Srivastava
Published: Sat, 27 Jun 2026 07:05 AM (GMT+05:30)

उत्तर मध्य रेलवे प्रयागराज में पुलों पर ट्रेनों की गति बढ़ाने और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए 'रेल-स्ट्रक्चर इंटरैक्शन विश्लेषण' ...और पढ़ें

प्रयागराज में नैनी पुराना रेल पुल। जागरण आर्काइव

प्रयागराज में नैनी पुराना रेल पुल। जागरण आर्काइव

HighLights

  1. उत्तर मध्य रेलवे ने इस बदलाव की प्रयागराज से शुरूआत की

  2. जुलाई में शुरू होगा विश्लेषण, नौ महीने के अंदर पूरा होगा काम

  3. रेल-स्ट्रक्चर इंटरैक्शन विश्लेषण तकनीक के लिए जारी हुआ टेंडर

जागरण संवाददाता, प्रयागराज। नदी या सड़क के ऊपर बने बड़े पुलों से गुजरते समय ट्रेन की रफ्तार अचानक कम नहीं होगी और न ही इन पर झटके लगेंगे। इसके लिए रेलवे रेल-स्ट्रक्चर इंटरैक्शन विश्लेषण तकनीक का सहारा लेने जा रहा है। अक्सर सुरक्षा कारणों से रेलवे को पुलों पर 'स्पीड रेस्ट्रिक्शन' (गति सीमा) लगानी पड़ती है, जिससे ट्रेनें लेट होती हैं।

हालांकि इस नए विश्लेषण के बाद पुलों की सेहत का रियल-टाइम मिजाज पता चल सकेगा। उसी अनुरूप पुलों पर बदलाव होगा ताकि आम ट्रेनों के साथ वंदे भारत और राजधानी जैसी ट्रेनें बिना गति कम किए पुलों को पार कर करें। इससे यात्रियों का समय बचेगा, सफर का झटका कम लगेगा और रेल दुर्घटनाओं की गुंजाइश पूरी तरह खत्म हो जाएगी।

इस बड़े बदलाव की शुरुआत उत्तर मध्य रेलवे (एनसीआर) ने प्रयागराज से कर दी है।यह तकनीक ठीक वैसे ही काम करेगी जैसे डाक्टर इंसान के दिल की धड़कन और नसों की जांच के लिए ईसीजी करते हैं। उत्तर मध्य रेलवे के प्रयागराज स्थित निर्माण विभाग की देखरेख में 'बैलेस्टेड डेक'' (यानी गिट्टी वाले आधुनिक पुलों) पर यह हाईटेक टेस्ट जुलाई से शुरू होने जा रहा है।

इसके तहत प्रोफेशनल टीमें यह जांचेंगी कि जब बेहद भारी और तेज रफ्तार ट्रेनें पुल से गुजरती हैं, तो पटरियों और पुल के ढांचे पर कितना दबाव पड़ता है। मौसम के बदलने, कड़कड़ाती ठंड या भीषण गर्मी में पुल के फैलने और सिकुड़ने से सेफ्टी पर क्या असर होता है, इसका सटीक डेटा यह तकनीक निकाल कर देगी। इसके लिए टेंडर (निविदा) भी जारी कर दिया है।

इस हाईटेक परीक्षण और विश्लेषण के काम को नौ महीने के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए देश भर की बड़ी तकनीकी कंपनियों को आमंत्रित किया गया है, जो 22 जुलाई को टेंडर आवंटित होने के बाद विश्लेषण की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। सीपीआरओ शशिकांत त्रिपाठी ने बताया कि रेल-स्ट्रक्चर इंटरैक्शन विश्लेषण से सुरक्षा का स्तर बहुत अधिक बढ़ जाएगा।

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