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    प्रयागराज की गोशालाओं में अनियमितता, गोवंश चबा रहे सूखा भूसा व पुआल; नसीब नहीं हो पा रहा हरा चारा

    By Digital Desk Edited By: Brijesh Srivastava
    Updated: Thu, 26 Mar 2026 02:42 PM (GMT+05:30)

    प्रयागराज की गोशालाओं में अनियमितता उजागर हुई है। यहां गोवंश को सूखा भूसा और पुआल खाने को दिया जा रहा है। अफसरों का दावा है कि सभी गोशालाओं में हरा चा ...और पढ़ें

    प्रयागराज की एक गोशाला, जहां सूखा चारा खाने को मजबूर हैं गाेवंश। जागरण

    प्रयागराज की एक गोशाला, जहां सूखा चारा खाने को मजबूर हैं गाेवंश। जागरण 

    HighLights

    1. सरकार ने विकल्प तो काफी दिए हैं, किसानों से हरा चारा खरीदने की छूट भी है

    2. ग्राम प्रधानों और सचिवों की लापरवाही, ग्राम पंचायतें नहीं दिखा रहीं दिलचस्पी

    जागरण संवाददाता, प्रयागराज। सरकारी गोशालाओं में संरक्षित मवेशियों को भूसे के साथ हरा चारा भी मिले, इसके लिए सरकार ने खूब जनत किए। यहां तक कि यहां तक कि किसानों से हरा चारा खरीदने की छूट दी। इसके अलावा साइलेज की उपलब्धता सुनिश्चित कराई, ताकि क्षेत्र में हरा चारा न होने पर उसकी कमी पूरी की जा सके। फिर भी गोवंश सूखा भूसा व पुआल ही चबाने की मजबूर हैं।

    121 गोशालाओं में करीब 25 हजार गोवंश संरक्षित

    गोशालाओं का संचालन करने वाली ग्राम पंचायतें सिर्फ हर महीने मवेशियों की गिनती कराकर भरण- पोषण के बजट के भुगतान तक दिलचस्पी दिखाती हैं। जिले के गंगापार व यमुनापार में स्थायी व अस्थायी मिलाकर 121 गोशालाओं का संचालन हो रहा है। इनमें करीब 25 हजार गोवंश संरक्षित हैं। प्रति गोवंश भरण पोषण के लिए प्रतिदिन 50 रुपये का भुगतान शासन से हो रहा है।

    अफसरों का दावा- सभी गोशालाओं में हरा चारा उपलब्ध 

    अफसरों का दावा है कि इन सभी गोशालाओं में मवेशियों को हरा चारा उपलब्ध हो रहा है, जबकि हकीकत कुछ और ही है। जागरण की पड़ताल में कौड़िहार, जसरा, कोरांव, शंकरगढ़, मऊआइमा समेत अन्य ब्लाक क्षेत्रों की करीब 15 गोशालाओं में से सिर्फ कौधियारा ब्लाक क्षेत्र की कुल्हड़िया गोशाला में साइलेज मिला। अन्य गोशालाओं में हरे चारे का कोई नामोनिशान नहीं था। जबकि यह सरकार की प्राथमिकता में है।

    व्यवस्था मवेशियों के काम नहीं आई 

    हरे चारे की उपलब्धता के लिए शासन ने ग्राम पंचायतों की खाली पड़ी जमीन पर चारे की बोआई का निर्देश दिया है। इसके अलावा किसानों से सहमति बनाकर हरा चारा खरीदने की सुविधा दी। यही नहीं जिले स्तर से एक कार्यदायी संस्था तय कर दी थी। इसकी जिम्मेदारी गोशालाओं तक साइलेज पहुंचाने की थी। ताकि, हरे चारे की कमी पूरी हो सके। इनमें से एक भी व्यवस्था गोशालाओं में संरक्षित मवेशियों के काम नहीं आई। साइलेज खरीदने के नाम पर महज कोरम पूरा किया गया। कुछ प्रधान तो ऐसे हैं, जिन्हें पता ही नहीं कि साइलेज क्या होता है।

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    45 गोशालाओं में बोया नहीं गया हरा चारा

    प्रशासन की ओर से निर्देश दिए गए थे कि गोशालाओं वाली ग्राम पंचायतों में रिक्त पड़ी सरकारी जमीनों पर हरे चारे की बोआई कराई जाए। जिले की 121 में से 45 गोशालाओं में हरे चारे की बोआई हुई ही नहीं। कुछ जगह हरे चारे की बोआई के नाम पर खानापूरी की गई।

    सीवीओ का दावा

    इस संबंध में मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी (सीवीओ) डॉ. शिवनाथ यादव का कहना है कि सभी गोशालाओं में हरा चारा खिलाया जा रहा है। हरे चारे की कमी होने पर साइलेज भी खिलाया गया है।

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