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Pitru Paksha 2026 : 'पितृ पैकेज' से पितरों को करें तृप्त, आपके रहने व खाने-पीने और तीर्थ पुरोहितों का प्रबंध रहेगा

By Sharad Dwivedi Edited By: Brijesh Srivastava
Published: Tue, 22 Sep 2026 02:02 PM (IST)

Pitru Paksha 2026 प्रयागराज में 'पितृ पैकेज' की शुरुआत हुई है, जो पितृपक्ष के दौरान पिंडदान करने वालों को रहने, ...और पढ़ें

Pitru Paksha 2026 पितृपक्ष में 'पितृ पैकेज' से पितरों को तृप्त करें।

Pitru Paksha 2026 पितृपक्ष में 'पितृ पैकेज' से पितरों को तृप्त करें।

HighLights

  1. टूर पैकेज की तर्ज पर प्रयागराज की समिति ने शुरू की यह व्यवस्था

  2. प्रयागराज, काशी और गया में पिंडदान करने वालों को मिलेगी सुविधा

  3. जो प्रयागराज नहीं आ सकते, उनके लिए ऑनलाइन पिंडदान की व्यवस्था

शरद द्विवेदी, प्रयागराज। Pitru Paksha 2026 आपने टूर, खाने-पीने, वैवाहिक समारोह के लिए तो पैकेज सुना और उसका उपयोग किया होगा। पैकेज के अनुरूप पैसा देकर समस्त चिंताओं से मुक्त हो जाते हैं। कुछ ऐसा ही पैकेज पितरों को तारने के लिए भी शुरू हुआ है। यह है 'पितृ पैकेज'। इसे प्रयागराज में शुरू किया गया है।

पिंडदान करने वालों को सुविधा 

जय त्रिवेणी जय प्रयाग सेवा समिति ने पितृपक्ष के लिए पैकेज शुरू किया है। इसमें प्रयागराज के साथ काशी और गया में तीर्थ पुरोहितों का प्रबंध, आने-जाने, खाने-पीने और रहने की समस्त सुविधा दी जाएगी। इंटरनेट मीडिया पर इसका प्रचार किया जा रहा है।

संगम तट पर पिंडदान व तर्पण का विशेष विधान 

पितृपक्ष में पूर्वज धरती पर वंशजों से अपनी मुक्ति और भोजन लेने पृथ्वी पर आते हैं। इस दौरान पिंडदान, तर्पण, हवन और अन्न दान का विशेष होता है। संगम तट पर पिंडदान व तर्पण का विशेष विधान है। इसे देखते हुए तीर्थ पुरोहितों ने पैकेज शुरू किया है। जो पितृपक्ष में प्रयाग नहीं आ सकते उनके लिए आनलाइन पिंडदान का प्रबंध है। वाट्सएप पर वीडियो काल करके उन्हें अपने घर में बैठना होगा। तीर्थ पुरोहित उनके नाम और गोत्र के अनुसार समस्त अनुष्ठान करेंगे। पितृपक्ष के बाद जब वह प्रयाग आएंगे तब पुन: पिंडदान करवाया जाएगा।

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श्रद्धा के अनुसार लेंगे दान : प्रदीप 

Pitru Paksha 2026 जय त्रिवेणी जय प्रयाग सेवा समिति के अध्यक्ष प्रदीप पांडेय का कहना है कि व्यस्तता के कारण अधिकतर लोग चाहकर भी पितृपक्ष में कर्मकांड कराने नहीं आ पाते। जो आते हैं उन्हें तीर्थ पुरोहित ढूंढने, रहने व खाने-पीने में समस्या आती है। इसे देखते हुए 'पितृ पैकेज' शुरू करने का निर्णय लिया गया है। इसमें किसी से मोटा पैसा नहीं लिया जाएगा। श्रद्धा के अनुरूप दान लेकर लोगों का कर्मकांड करवाया जाएगा।

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मुक्ति के लिए पृथ्वी पर आते हैं पितर : डॉ. बिपिन

विश्व पुरोहित परिषद के अध्यक्ष डा. बिपिन पांडेय के अनुसार प्रयाग में परमपिता ब्रह्मजी ने सृष्टि रचना को यज्ञ किया था। इसी से प्रयाग में पहले पिंडदान व तर्पण करने का विधान है। गरुण पुराण में इसका उल्लेख है। यहां पिंडदान से पूर्वज तृप्त होते हैं और 21 पीढ़ियां तरती हैं। प्रयागराज के बाद काशी व गया में पिंडदान किया जाता है।

अष्टमी व नवमी का श्राद्ध चार अक्टूबर को

Pitru Paksha 2026 पितृपक्ष में इस बार नवमी तिथि का क्षय हो रहा है। इसकी वजह से अष्टमी व नवमी तिथि का श्राद्ध चार अक्टूबर को किया जाएगा। ज्योतिर्विद आचार्य देवेंद्र प्रसाद त्रिपाठी के अनुसार पितृपक्ष भाद्रपद शुक्लपक्ष की पूर्णिमा तिथि पर 26 सितंबर से शुरू हो जाएगा। पूर्णिमा तिथि 25 सितंबर की रात 10.19 बजे लगकर 26 सितंबर को रात 10.04 बजे तक रहेगी। आश्विन कृष्णपक्ष की अमावस्या तिथि पर 10 अक्टूबर पितृ विसर्जन किया जाएगा। बताया कि अष्टमी तिथि चार अक्टूबर को सुबह 7.28 बजे तक है। इसके बाद सुबह 7.29 बजे से नवमी तिथि लग जाएगी। नवमी पांच अक्टूबर को सूर्योदय से पहले सुबह 5.06 बजे समाप्त हो जाएगी।

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